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रोजगार का आंकड़ा जारी करने में हिचक रही सरकार? छह माह से तिमाही और डेढ़ साल से सालाना डेटा का हो रहा इंतजार

रविवार (एक अक्टूबर) को समाप्त हुए वर्तमान वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई—सितंबर) में भी रिपोर्ट के प्रकाशन पर कोई फैसला नहीं हो सका है। अप्रकाशित रिपोर्ट पिछले वित्तीय वर्ष (2017—18) की आखिरी तिमाही और मौजूदा वित्तीय वर्ष (2018—19) की पहली तिमाही की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (express photo)

रोजगार के तिमाही आंकड़ों को काफी भरोसेमंद माना जाता है। यहां तक कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के विरोधी भी इन आंकड़ों को विश्वसनीय मानते हैं। लेकिन इस साल अभी तक सरकार ने इन आंकड़ों को जारी नहीं किया है। द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, रोजगार के तिमाही आंकड़ों की दो रिपोर्ट अभी तक लंबित हैं। ये रिपोर्ट हर तीसरे महीने प्रकाशित की जाताी है, रिपोर्ट में पिछली तिमाही के आंकड़े बताए जाते हैं।

रविवार (एक अक्टूबर) को समाप्त हुए वर्तमान वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई—सितंबर) में भी रिपोर्ट के प्रकाशन पर कोई फैसला नहीं हो सका है। अप्रकाशित रिपोर्ट पिछले वित्तीय वर्ष (2017—18) की आखिरी तिमाही और मौजूदा वित्तीय वर्ष (2018—19) की पहली तिमाही की है। पिछले कुछ दिनों से मैन्यूफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में रोजगार में लगातार गिरावट आ रही है। सूत्रों का कहना है कि सालाना रिपोर्ट जल्द ही प्रकाशित हो सकती है। बता दें, सालाना रोजगार-बेरोजगार सर्वे, 2016—17 की रिपोर्ट 18 महीनों से जारी नहीं की गई है। यद्यपि इससे पहले साल 2015—16 की रिपोर्ट सितंबर 2016 में प्रकाशित की गई थी।

2015-16 में बढ़ी थी बेरोजगारी: साल 2015—16 की सालाना रिपोर्ट में बेरोजगारी की दर में बढ़ोत्तरी पाई गई थी। इस रिपोर्ट में 15 साल से अधिक उम्र के लोगों की बेरोजगारी की दर 4.9 फीसदी पाई गई थी। साल 2014—15 में कोई भी रिपोर्ट प्रकाशित नहीं की गई थी। सरकार का कहना है कि साल 2016—17 को आंकड़े पर अभी भी काम चल रहा है। रोजगार के तिमाही और सालना दोनों ही आंकड़ों पर लेबर ब्यूरो में काम किया जाता है।

रिपोर्ट जारी करने में लगातार हो रही देरी: जून 2011 में जब एक तिमाही (जनवरी—मार्च 2018) के रोजगार के आंकड़े ​लंबित थे। तब श्रम और रोजगार मंत्रालय ने मीडिया रिलीज जारी करते हुए कहा था कि एक कमिटी सर्वे की सीमाओं को अध्ययन कर रही थी। इस कमिटी का नेतृत्व टीसीए अनंत ने किया था। अनंत भारत के सांख्यिकीविद रह चुके हैं। उन्हें इस काम के लिए एक महीने का वक्त दिया गया था। लेकिन उन्होंने अपनी रिपोर्ट करीब तीन महीने बाद सौंपी थी। अन्य रोजगार के आंकड़ों की तिमाही रिपोर्ट (अप्रैल—जून 2018) भी अभी प्रकाशित नहीं हुई है।

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