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RBI की शक्तियां और IBC कमजोर करने पर उर्जित पटेल ने की मोदी सरकार की आलोचना, बोले- मुश्किल होगा बैड लोन की भरपाई करना

उर्जित पटेल जब रिजर्व बैंक के गवर्नर थे, तब फरवरी 2018 में IBC सर्कुलर आया था। इस सर्कुलर की वजह से बैंकों को रिपेमेंट नहीं करने वाले कर्जदारों को तुरंत डिफॉल्टर के रूप में वर्गीकृत करने को मजबूर किया जाना था और कई बड़े डिफॉल्टर्स को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में लाया जाना था।

Author Edited By प्रमोद प्रवीण नई दिल्ली | Updated: July 25, 2020 9:51 AM
RBI, Ex Governor, Urjit Patelरिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल सरकार से जुड़ी थिंक टैंक के चेयरमैन के तौर पर लौटे हैं। (एक्सप्रेस फोटो)

भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल ने इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) और केंद्रीय बैंक (RBI) की शक्तियों को कम करने के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि ऐसा करने से बैड लोन के खिलाफ साल 2014 से चलाई गई मुहिम को धक्का लगेगा और एनपीए की भरपाई करना मुश्किल होगा।

पटेल ने अपनी नई किताब ‘Overdraft: Saving the Indian Saver’में लिखा है, “सुप्रीम कोर्ट के अप्रैल 2019 के फैसले में केंद्रीय बैंक के फरवरी 2018 के एक दिवसीय डिफॉल्ट रिजोल्यूशन को समस्याग्रस्त नहीं बताया गया था। हालांकि, बाद में (7 जून, 2019 को) केंद्रीय बैंक के एक सर्कुलर ने उस पहलू को कमजोर बना दिया और दिवालियेपन शासन से जुड़े प्रावधान को भंगुर बना दिया है।” उन्होंने लिखा है कि इसकी वजह से कई डिफॉल्टर के खिलाफ कार्रवाई करने में देरी हुई और कई को दिवालियापन अदालतों की कार्रवाई से बचने में मदद मिली।

बता दें कि उर्जित पटेल जब रिजर्व बैंक के गवर्नर थे, तब फरवरी 2018 में IBC सर्कुलर आया था। इस सर्कुलर की वजह से बैंकों को रिपेमेंट नहीं करने वाले कर्जदारों को तुरंत डिफॉल्टर के रूप में वर्गीकृत करने को मजबूर किया जाना था और कई बड़े डिफॉल्टर्स को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में लाया जाना था।  इसके बाद पटेल ने दिसंबर 2018 में केंद्र सरकार के साथ अनबन होने पर रिजर्व बैंक के गवर्नर पद से इस्तीफा दे दिया था।

पटेल ने लिखा है, “सुप्रीम कोर्ट में रिजर्व बैंक का पक्ष रखने वाले वकील को अंतिम घड़ी में हटा दिया हया था। सुनवाई से चंद घंटे पहले रात में वकील को हटाए जाने से मामला साफ हो गया था। फरवरी 2018 के सर्कुलर को किनारे किए जाने के बाद दिवालियापन कानून कमजोर बन गया।”

सरकार के साथ अपने मतभेद पर पटेल ने लिखा है कि 2018 के मध्य में IBC के प्रति दृष्टिकोण “प्रत्यक्ष रूप से बदल गया” – इसके बजाय जो लाभ और भविष्य में होने वाले लाभ का अनुमान लगाया गया था, उसने माहौल को आसान बना दिया। पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली से मतभेदों पर उर्जित पटेल ने लिखा है, “2018 के सर्कुलर के अधिकांश भाग पर वित्त मंत्री और मैं एक समान विचार रखते थे। गोनों के बीच लैंडमार्क कानून की परिचालन दक्षता बढ़ाने पर लगातार बातचीत हुई। बाद में “फरवरी के सर्कुलर को वापस लेने के अनुरोध किए गए थे। एक अफवाह फैलाया गया था कि इससे एमएसएमई को विशेष रूप से नुकसान होगा, जबकि वास्तव में, उधारकर्ताओं के इस वर्ग के लिए पिछले डिस्पेंशंस को नए नियमों में स्पष्ट रूप से संरक्षित किया गया था।”

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