देश में सोलर पार्क और अल्ट्रा मेगा सौर ऊर्जा पार्क की सात परियोजना में से केवल एक संयंत्र चालू हो सका है। यह संयंत्र छत्तीसगढ़ के राजनंद गांव में तैयार किया गया है और इससे 100 मेगावाट बिजली ही मिल पा रही है। केंद्र सरकार ने देश भर में ऐसे सात संयंत्र तैयार करने की योजना बनाई थी।
सरकारी एजंसियों के तकनीकी पेच, मुकदमेबाजी और वित्तीय इंतजामों के कारण ये संयंत्र तैयार नहीं हो सके। योजना के तहत सौर ऊर्जा से 24 गीगावाट तक बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था लेकिन केवल 9.3 गीगावाट बिजली का उत्पादन ही ऊर्जा मंत्रालय शुरू कर पाया है।
ये योजनाएं आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, केरल, मध्यप्रदेश व ओड़ीशा में लागू करनी थी। माना जा रहा था कि इन योजनाओं का लाभ राज्यों के उपभोक्ताओं को होगा और उन्हें निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। इसके अतिरिक्त ये योजनाएं हरित ऊर्जा को बढ़ावा देंगे और वित्तीय घाटे (एटीएंडसी) कम करने में भी मददगार होंगी।
सबसे बड़ी सौर ऊर्जा योजना एमपी में शुरू होनी थी
ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक, इन सबसे बड़ी सौर ऊर्जा परियोजना को एनटीपीसी पार्क मध्य प्रदेश में शुरू किया जाना था। इस संयंत्र से 4750 मेगावाट क्षमता तक बिजली का उत्पादन सुनिश्चित करना था। लेकिन इस योजना के लिए वितरण नेटवर्क तैयार करने में सबसे अधिक देरी हुई है। इसके अब तक 23750 एक जमीन का अधिग्रहण किया जा चुका है और ग्रिड से नेटवर्क जोड़ने की अनुमति भी मिल चुकी है।
संभावना जताई जा रही है कि इस साल के अंदर ही इस संयंत्र को पूर्ण करने का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। इस संयंत्र में दूसरा बड़ा संयंत्र मध्य प्रदेश के बरेठी में तैयार किया जा रहा है। इसकी क्षमता 630 मेगावाट होगी।
मंत्रालय का कहना है कि इस संयंत्र के लिए ट्रांसमिशन सिस्टम को अंतिम रूप दिए जाने और सब स्टेशन पैकेज की आपूर्ति में अधिक समय लगा है, लेकिन अब योजना के अक्तूबर 2027 तक पूर्ण होने का दावा किया जा रहा है।
इस पार्क में पूलिंग सब स्टेशन ओर 630 मेगावाट की ट्रांसमिशन की आवंटन लाइन का कार्य चल रहा है और एजंसी अब तक 2809 एकड़ जमीन का अधिग्रहण कर चुकी है। इसके अतिरिक्त देरी से चल रही योजनाओं में 400 मेगावाट क्षमता की ओड़ीशा सौर पार्क, 50 मेगावाट का फ्लोटिंग सोलर पार्क केरल, सोलर पार्क झारखंड सौ मेगावाट और सोलर पार्क सौ मेगावाट छत्तीसगढ़ शामिल है।
यह भी पढ़ें: दिल्ली-देहरादून हाईवे पर सौर ऊर्जा से बनाई जाएगी बिजली
दिल्ली-देहरादून राजमार्ग अपने लिए खुद बिजली तैयार करेगा। यह देश का पहला उपरगामी मार्ग है, जहां केंद्र सरकार पहली बार सोलर पैनल के माध्यम से सौर ऊर्जा बिजली उत्पादन करने जा रही है। सरकार ने इस योजना को परीक्षण के तौर पर लागू किया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
