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प्रधानमंत्री की सलाहकार ने कहा- चार साल में जो किया, उससे ज्‍यादा कर सकती थी मोदी सरकार

उन्होंने बताया, "मोदी सरकार ने गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) और इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) लाने के साथ प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में काफी ढील दी।...पर मुझे लगता है कि देश को और भी बड़े आर्थिक सुधारों की आवश्यकता थी।"

शमिका रवि, पीएम के आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य हैं। (एक्सप्रेस फोटोः अमित मेहरा/फेसबुक)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) की सदस्य शमिका रवि ने कहा है, “मोदी सरकार ने चार साल में जो सुधार किए हैं, वह उससे कहीं ज्यादा काम कर सकती थी।” प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) को हाल ही में दिए साक्षात्कार में उन्होंने बताया, “मोदी सरकार ने गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) और इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) लाने के साथ प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में काफी ढील दी। पर मुझे लगता है कि देश को और भी बड़े आर्थिक सुधारों की आवश्यकता थी। हम और भी बहुत कुछ कर सकते थे।”

शमिका, ईएसी-पीएम सदस्य के साथ ब्रूकिंग्स इंडिया में सीनियर फेलो भी हैं। वह आगे इस बारे में बोलीं, “आर्थिक नजरिए से देखें तो मुझे लगता है कि पीएम मोदी का चुनाव विकास और आर्थिक सुधारों के लिए एक जनादेश था।” उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि मोदी सरकार उदारीकरण पर और भी बहुत कुछ कर सकती थी।

बकौल ईएसी-पीएम की सदस्य, “आईटीडीसी होटल, एयर इंडिया के साथ हमारे पर एसे सार्वजनिक उपक्रम हैं जिनके विनिवेश पर निश्चित रूप से आगे बढ़ना चाहिए।’’  उन्होंने कहा कि देश में निजी एयरलाइंस कारोबार तेजी से आगे बढ़ रहा है। रवि ने राष्ट्रीय एयरलाइन एयर इंडिया को फिर खड़ा करने की सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि कारोबार को चलाने में सरकार की भूमिका को लेकर मुझे कम भरोसा है। एयर इंडिया के पुनरोद्धार की क्या योजना है और हमें ऐसा करने की क्यों जरूरत है? हमारे यहां निजी एयरलाइंस तेजी से पंख पसार रही हैं।

जारी ग्लोबल टैरिफ वॉर पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यह भारत के लिए एक अच्छा अवसर है। शमिका का मानना है, “हमें आगे बढ़ना चाहिए और उस अंतर को भरने का प्रयास करना चाहिए।” बता दें कि नौ मार्च को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इंपोर्टेड स्टील और अल्युमिनियम के उत्पादों पर भारी टैरिफ लगा दिए थे। चीन और यूरोपीय देशों ने मनमाने और भारी टैरिफ के खिलाफ अमेरिकी उत्पादों के प्रति विरोध जताया था। रुपए के गिरते स्तर पर शमिका ने कहा कि रुपए की कमजोरी को देश की क्षमता में गिरावट के तौर पर नहीं देखना चाहिए। बता दें कि शुक्रवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 26 पैसे टूटकर 71 के सबसे निचले स्तर पहुंच गया था।

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