Madhya Praesh News: मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने संघ को लेकर कहा है कि संगठन तो बड़ा हो रहा है, लेकिन अच्छे इंसानों की कमी होती जा रही है। उन्होंने कहा कि कई अधिकारी कहते हैं कि वे पहले शाखा में जाते थे।
कैलाश विजयवर्गीय भोपाल के मानस भवन में संस्था नवलय द्वारा आयोजित श्री शालिग्राम तोमर स्मृति राष्ट्रसेवी सम्मान समारोह में बोल रहे थे। विजयवर्गीय ने कहा, “हम सरकार में हैं तो कोई अधिकारी आता है तो कहता है कि सर मैं शाहजहांपुर में था तो शाखा में जाता था। अरे भाई तुम अभी जाते हो, हमारी सरकार बनी उसके पहले तो कभी तुमने बताया नहीं। हर अधिकारी के मन में कुछ ना कुछ रहता है कि मैं अपने कमर दिखाऊं की मैंने भी बेल्ट पहनी है। हर कोई अधिकारी और कर्मचारी यही सोचता है। सरकार आने के बाद सब संघ के हो गए। हर अधिकारी संघ का हो गया। मेरे पिताजी शाखा में जाते थे।”
कैलाश विजयवर्गीय ने आगे कहा, “एक अधिकारी ने तो मेरे से यह भी कहा कि मेरे पिता जी शाखा में अध्यक्ष थे। अब मैं उससे क्या बोलूं। हालांकि, ऐसी तो कोई पोस्ट होती ही नहीं है। अब अपने-अपने तरीके से बहुत ही भीड़ हो गई है। इस भीड़ में अच्छे इंसानों की कमी है। शालिग्राम जी अच्छे इंसान थे, देवधर जी अच्छे इंसान थे और सदाशिव जी अच्छे इंसान थे। ऐसे लोग कम ही मिलते हैं। संगठन बढ़ रहा है और कहा जाता है कि विचारधारा भी बढ़ रही है। लेकिन अगर अच्छे इंसान ही न हों, तो उस विचारधारा की क्या कीमत है? हमें इस पर सोचना और आत्म-मंथन करना चाहिए।”
प्रियांक खड़गे ने मोहन भागवत को लिखा था पत्र
ये बातें ऐसे समय में कही गई हैं जब कर्नाटक के मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रियांक खड़गे ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को एक खुला पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने संगठन के कानूनी स्टेटस, फाइनेंशियल ट्रांसपेरेंसी और संवैधानिक जवाबदेही के बारे में स्पष्टता मांगी है, क्योंकि संगठन अपने अस्तित्व के 100 साल पूरे कर रहा है। उन्होंने कहा कि जो संगठन भारत और विदेशों में 60000 से ज्यादा शाखाओं और करोड़ों स्वयंसेवकों का दावा करता है, उसे ट्रांसपेरेंसी, जवाबदेही और संवैधानिक नियमों के पालन के सबसे ऊंचे मानकों पर खरा उतरना चाहिए।
पत्र में उन्होंने आरएसएस के कानूनी स्टेटस और संगठनात्मक ढांचे, पदाधिकारियों, चंदे और आय के स्रोतों, खर्च और संपत्ति, टैक्स नियमों के पालन और बिना औपचारिक रजिस्ट्रेशन के गतिविधियां चलाने के कानूनी आधार के बारे में जानकारी मांगी।
आरएसएस ने इस मांग को ज्यादातर नजरअंदाज कर दिया है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने पहले कहा था कि उन्हें खड़गे को जवाब देने की कोई जरूरत नहीं लगती और उन्होंने इन सवालों को राजनीतिक हथकंडा बताकर खारिज कर दिया, जिसका संघ को सामना करना पड़ता रहा है।
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भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता और मोहन यादव सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने स्वतंत्रता को लेकर विवादास्पद टिप्पणी की है। इससे राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि हमें अधूरी आजादी मिली। हमें वह आजादी नहीं मिली जिसका सपना भगत सिंह ने देखा था। गलत नीतियों के कारण भारत माता का बंटवारा हुआ। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…
