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रिपोर्ट: कंपनी पर 91000 करोड़ रुपये का है कर्जा, मोदी सरकार ढूंढ़ रही खरीदार!

एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा कि आईएलएंडएफएस संकट में कुछ ही सप्ताह में चीजें सामान्य हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि इस संकट के मद्देनजर प्रणाली को शीघ्रता से स्थिर करने की दिशा में सरकार और रिजर्व बैंक के साथ ही एसबीआई भी कोशिशें कर रहा है।

पीएम मोदी (PTI Photo/Atul Yadav)

भारत सरकार, इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग और वित्तीय सेवा लिमिटेड को बेचने के सभी विकल्पों पर विचार कर रही है। इस मामले के एक जानकार के मुताबिक, इस कंपनी पर 91,000 करोड़ रुपये का कर्ज है। सरकार किसी ऐसे खरीदार की तलाश में है जो कंपनी को इस लोन समेत खरीद ले। एनडीटीवी ने एक सूत्र के हवाले से अपनी खबर में लिखा है कि बीते बुधवार (24 अक्टूबर) को राज्य के द्वारा गठित किए गए लेनदारों के बोर्ड ने दिवालिया मामलों की सुनवाई करने वाली अदालत के सामने ये प्रस्ताव रखा था कि इस पूरी संपत्ति को अार्थिक रूप से मजबूत निवेशक को बेच दिया जाए और इससे कारोबारी समुदाय को आश्वासन मिल जाएगा।

वहीं न्यूयॉर्क में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा कि आईएलएंडएफएस संकट में कुछ ही सप्ताह में चीजें सामान्य हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि इस संकट के मद्देनजर प्रणाली को शीघ्रता से स्थिर करने की दिशा में सरकार और रिजर्व बैंक के साथ ही एसबीआई भी कोशिशें कर रहा है।

रजनीश कुमार ने कहा कि आईएलएंडएफएस बुनियादी संरचना एवं निर्माण के क्षेत्र में वित्तपोषण करने वाली अनोखी संस्थान रही। उन्होंने कहा कि भारत में बुनियादी संरचना में वित्तपोषण चाहे गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) कर रही हों या फिर बैंक कर रहे हों, उन्हें दिक्कतों का सामना करना ही पड़ेगा।

भारतीय वाणिज्य दूतावास में आयोजित नौवें नया भारत व्याख्यान के तहत परिचर्चा सत्र में कुमार ने कहा, ‘‘बुनियादी संरचना क्षेत्र मूल तौर पर निर्माण-परिचालन-हस्तांतरण तरीके पर आधारित है और इस क्षेत्र ने बैंकों के लिये भी समस्याएं खड़ी की हैं। इस क्षेत्र में वित्तपोषण को लेकर हमें भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है।’’

आईएलएंडएफएस तथा भारतीय अर्थव्यवस्था पर एनबीएफसी के प्रभाव के बारे में एक सवाल पूछे जाने पर कुमार ने कहा कि चूंकि आईएलएंडएएफएस एक एनबीएफसी है, इसका संक्रामक असर होता है। उन्होंने कहा, ‘‘आईएलएंडएफएस के ऋण भुगतान में चूक करने से म्यूचुअल फंडों पर दबाव है। म्यूचुअल फंडों को तरल कोष प्रदान करने वाली कंपनियां काफी सावधान हो गयी हैं। इसके कारण म्यूचुअल फंड अपने निवेश के प्रति सजग हो गये हैं।’’

कुमार ने कहा कि आईएलएंडएफएस संकट के मद्देनजर एसबीआई ने भी बड़े कदम उठाये हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हम इस तरह से तंत्र को स्थिर करने और परिस्थिति से निपटने की कोशिश कर रहे हैं। रिजर्व बैंक ने एनबीएफसी को तरलता प्रदान करने के लिए कदम उठाने की घोषणा की है। सरकार, रिजर्व बैंक और एसबीआई, हम तीनों तंत्र को शीघ्रता से स्थिर करने की कोशिशें कर रहे हैं। मेरा मानना है कि यह महज कुछ समय की बात है…एक दो सप्ताह में चीजें सामान्य हो जाएंगी।’’

दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता के बारे में पूछे जाने पर कुमार ने कहा कि मौजूदा सरकार द्वारा किया गया यह सबसे महत्वपूर्ण सुधार है। उन्होंने कहा, ‘‘यह एक नया कानून है, एक नयी प्रक्रिया है। अत: यह निश्चित है कि कुछ झटके लगेंगे क्योंकि मुद्दा यह है कि किस तरह से संहिता के प्रावधानों की व्याख्या की जाती है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मौजूदा प्रवर्तकों के लिये यह यकीन कर पाना काफी मुश्किल है कि अब एक ऐसा भी कानून है जिसके तहत उन्हें कंपनी के ऊपर नियंत्रण से हाथ धोना पड़ सकता है। यह भारत में इससे पहले कभी नहीं हुआ। यही असली लड़ाई है लेकिन इसकी बेहद सख्त जरूरत थी।’’ कुमार ने कहा कि कुछ समय बाद मुकदमे कम हो जाएंगे और ऋणशोधन की प्रक्रिया 180 से 270 दिन की समयसीमा के भीतर पूरी होने लगेगी।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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