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गतिरोध खत्‍म: जस्टिस केएम जोसेफ बनेंगे सुप्रीम कोर्ट जज, केंद्र ने कॉलेजियम की सिफारिश मानी

सरकार ने दूसरे उच्च न्यायालयों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने के उद्देश्य से सरकार ने जस्टिस केएम जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट भेजने की कॉलेजियम की सलाह को दरकिनार कर दिया था।

Author August 3, 2018 12:17 PM
सरकार ने मानी सुप्रीम कोर्ट कॉलजियम की सलाह, जस्टिस केएम जोसेफ जाएंगे सुप्रीम कोर्ट। (Photo by Neeraj Priyadarshi/File)

Ravish Tiwari

केन्द्र सरकार और न्यायपालिका के बीच पिछले काफी समय से चल रहा गतिरोध खत्म हो गया है। बता दें कि सरकार ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ को प्रमोट कर सुप्रीम कोर्ट भेजे जाने की कॉलजियम की सिफारिश मान ली है। जस्टिस केएम जोसेफ के साथ ही मद्रास हाईकोर्ट चीफ जस्टिस इंदिरा बनर्जी और ओडिशा हाईकोर्ट चीफ जस्टिस विनीत सरन को भी सुप्रीम कोर्ट भेजा गया है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस केएम जोसेफ के नाम की सिफारिश 10 जनवरी को सरकार के पास भेजी थी। जस्टिस केएम जोसेफ के साथ ही वरिष्ठ वकील इंदु मल्होत्रा के नाम की भी सिफारिश सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा भेजी गई थी। लेकिन सरकार ने इंदु मल्होत्रा के नाम को तो मंजूरी दे दी थी, लेकिन जस्टिस केएम जोसेफ के नाम को सरकार ने पुनर्विचार के लिए कॉलेजियम के पास वापस भेज दिया था।

जस्टिस केएम जोसेफ का नाम वापस भेजे जाने का कारण बताते हुए केन्द्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा को एक पत्र लिखा, जिसमें बताया गया था कि उच्च न्यायालयों की वरिष्ठता सूची में जस्टिस जोसेफ का नाम सबसे आगे नहीं हैं। इसके साथ ही केरल हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में पर्याप्त प्रतिनिधित्व है, बता दें कि जस्टिस केएम जोसेफ केरल उच्च न्यायालय से ताल्लुक रखते हैं। यही वजह थी कि दूसरे उच्च न्यायालयों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने के उद्देश्य से सरकार ने जस्टिस केएम जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट भेजने की कॉलेजियम की सलाह को दरकिनार कर दिया था। बहरहाल सरकार के इस फैसले से सरकार और न्यायपालिका में ठन गई। जस्टिस केएम जोसेफ के मुद्दे पर जस्टिस जे चेलमेश्वर ने बीते 21 मार्च को सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों को एक पत्र लिखा और चीफ जस्टिस से इस मुद्दे पर बैठक करने की मांग रखी। जस्टिस जे. चेलमेश्वर ने सरकार पर न्यायपालिका के काम-काज में दखल देने का आरोप भी लगाया।

9 अप्रैल को जस्टिस कुरियन जोसेफ ने भी चीफ जस्टिस को एक पत्र लिखकर चीफ जस्टिस से 7 वरिष्ठ जजों की एक पीठ बनाने की मांग की थी, जो कि जस्टिस केएम जोसेफ के मुद्दे पर सरकार की चुप्पी के मुद्दे पर सुनवाई करेगी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की 2 मई को एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें जस्टिस केएम जोसेफ का नाम फिर से सरकार के पास फिर से भेजने पर सहमति बनी। जिसे फिलहाल सरकार द्वारा सहमति दे दी गई है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दिल्ली उच्च न्यायालय की कार्यकारी चीफ जस्टिस गीता मित्तल को जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश बनाने, केरल हाईकोर्ट के कार्यकारी चीफ जस्टिस ऋषिकेश रॉय को मुख्य न्यायाधीश बनाने, राजस्थान हाईकोर्ट के जज जस्टिस केएस झावेरी को उड़ीसा हाईकोर्ट और गुजरात हाईकोर्ट के जज जस्टिस एमआर शाह को पटना हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की भी सलाह दी थी, जिसे सरकार द्वारा मान लिया गया है।

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