9 माह जेल में रखवाया, 2 साल बाद बताया बेदाग, अब बोले डॉ. कफील खान- उम्मीद है कातिल का लेबल हटेगा

गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से 60 बच्चों की मौत के मामले के जांच अधिकारी और स्टांप और निबंधन विभाग के प्रमुख सचिव हिमांशु कुमार की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ.कफील के खिलाफ ऐसा कोई भी साक्ष्य नहीं पाया गया, जो चिकित्सा में लापरवाही को साबित करता हो।

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कोलकाता प्रेस क्लब में शुक्रवार को पत्रकारों को इन्क्वायरी रिपोर्ट दिखाकर अपनी बात रखते हुए डॉ.कफील खान। (एक्सप्रेस फोटोः पार्था पॉल)

यूपी के गोरखपुर स्थित बीआरडी अस्पताल में दो साल पहले ऑक्सीजन की कमी से 60 बच्चों की मौत के मामले में डॉ.कफील खान को बड़ी जीत मिली है। शुक्रवार (27 सितंबर, 2019) को जांच टीम ने नौ माह तक जेल में रखे गए खान को क्लीन चिट दे दी। यानी उन्हें लगभग दो साल बाद इस केस में बेदाग बताया गया। खान ने इसी को लेकर पहली प्रतिक्रिया जाहिर की और जज्बाती होकर बोले कि उन्हें उम्मीद है शायद अब उनके सिर से कातिल का टैग (लेबल) हट जाएगा।

खान ने शुक्रवार को इस बाबत वीडियो संदेश ट्वीट किया। वह इसमें कह रहे थे, “खुश हूं, आज बहुत खुश हूं। पूरे परिवार के लिए बड़ी खुशी आई है। ये इन्क्वायरी रिपोर्ट खुद योगी जी ने आर्डर की थी। इस रिपोर्ट ने यह माना कि 10 अगस्त 2017 की उस रात लिक्विड ऑक्सीजन खत्म हो गई थी। डॉ.कफील की टीम ने 54 घंटों में 500 सिलेंडर मंगाए थे। यह माना है कि ये सिलेंडर डॉ.कफील के पैसे से आए थे। यह माना है कि डॉ.कफील पर मेडिकल लापरवाही को लेकर कोई सबूत नहीं मिला। यह माना है कि बहुत से बच्चे मारे गए थे।”

बकौल डॉ.कफील, “दो साल से कुख्यात डॉ कफील, मर्डरर डॉ कफील कातिल का दाग लेकर घूम रहा हूं। शायद कुछ धुल जाए। पर सही में जस्टिस मैं मानता हूं कि जब सही अपराधी जेल के पीछे पहुंचाए जाएंगे। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कह दिया कि डॉ.कफील खान की ओर से कोई गड़बड़ी नहीं है। सबसे बड़ी बात…इन्क्वायरी ऑफिसर ने लिखा है कि जो आरोप डॉ.कफील पर लगे हैं, वे बेबुनियाद हैं।”

उन्होंने अंत में कहा, “लाखों लोगों ने मुझे प्यार दिया है। गोरखपुर से लेकर कोच्चि तक, बिहार से असम तक। सबने प्यार दिया है। मुझे लगता है कि यह आगे भी मिलता रहेगा।” देखें, उनका VIDEO संदेशः

मामले के जांच अधिकारी और स्टांप और निबंधन विभाग के प्रमुख सचिव हिमांशु कुमार की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ.कफील के खिलाफ ऐसा कोई भी साक्ष्य नहीं पाया गया जो चिकित्सा में लापरवाही को साबित करता हो। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य गणेश कुमार ने शुक्रवार को बताया कि डॉक्टर खान को जांच रिपोर्ट की एक प्रति गुरुवार को सौंप दी गई है। डॉ.कफील ने इसे अपनी जीत बताया और योगी सरकार फौरन नौकरी पर बहाल करने की मांग की।

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