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योगी आदित्य नाथ से नाराज हैं भाजपा के कई मंत्री और बड़े नेता, बढ़ सकती है पार्टी की मुसीबत!

सूत्रों के अनुसार, कई मंत्री और बड़े नेता योगी आदित्यनाथ से खुश नहीं हैं। कहा जा रहा है कि कई नेताओं की पावर छीन ली गई है। योगी सरकार से नाराजगी के कारण ही नेता पार्टी के जनाधार को मजबूत करने में कोई दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं।

Author Updated: March 25, 2018 12:14 PM
उत्तर प्रदेश के कई नेता और मंत्री योगी आदित्यनाथ के कामकाज से खुश नहीं है। (file photo)

2014 को लोकसभा चुनाव और फिर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा ने प्रचंड बहुमत हासिल कर अपने विरोधियों को चित्त कर दिया था, लेकिन अब गोरखपुर उप-चुनाव में पार्टी की हार से कई गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। हालांकि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह अभी भी आत्मविश्वास से भरे हैं। उनका कहना है कि पार्टी 8 राज्यों में चुनाव जीती, लेकिन देश के मीडिया का फोकस उप-चुनाव में हुई पार्टी की हार पर है। भाजपा भले ही गोरखपुर और फूलपुर उप-चुनाव में मिली हार का ठीकरा बसपा-सपा गठबंधन से बने जातीय समीकरणों पर फोड़े, लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि इन उप-चुनावों की हार से पता चलता है कि भाजपा का कैडर पार्टी से खुश नहीं है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिस पार्टी की संगठन पर जबरदस्त पकड़ है, उस पार्टी के सीएम योगी आदित्यनाथ की अपनी ही सीट पर सिर्फ 37 प्रतिशत वोट पड़े। वो भी तब जब गोरखपुर योगी आदित्यनाथ के दबदबे वाली सीट रही है और पिछले काफी सालों से वह इस सीट से सांसद चुने जाते रहे हैं। वहीं फूलपुर सीट पर भी सिर्फ 20 प्रतिशत वोट ही पड़ सके। सूत्रों के अनुसार, कई मंत्री और बड़े नेता योगी आदित्यनाथ से खुश नहीं हैं।

कहा जा रहा है कि कई नेताओं की पावर छीन ली गई है। जिस कारण नेता पुलिस को निर्देश नहीं दे पा रहे हैं और साथ ही परमिट और कोटे का कंट्रोल भी उनके पास नहीं रह गया है। योगी सरकार से नाराजगी के कारण ही नेता पार्टी के जनाधार को मजबूत करने में कोई दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। कुछ नेताओं का कहना है कि योगी आदित्यनाथ वन मैन शो की तरह अपने मठ को चलाने के आदी रहे हैं, ऐसे में सरकार चलाने में उनका कम अनुभव भी कई नेताओं को निराश कर रहा है। नेताओं का कहना है कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो आगामी लोकसभा चुनावों में पार्टी की मुसीबतें बढ़ सकती हैं।

कुछ नेता दबी जुबान में यह भी कह रहे हैं कि पिछले साल विधानसभा चुनाव में मिली पार्टी की जबरदस्त जीत का कारण गैर यादव, ओबीसी और गैर जाटव दलित वोटों का समर्थन था, लेकिन चुनाव जीतने के बाद पार्टी ने एक ठाकुर को सीएम बना दिया। वहीं किसी ओबीसी नेता की जगह एक ब्राह्मण को पार्टी का अध्यक्ष चुन लिया गया। इस कारण उप-चुनाव में भाजपा का ओबीसी और दलित वोटबैंक छिटक गया। इसके साथ कुछ नेताओं का बड़बोलापन भी पार्टी की हार की बड़ी वजह बना। जिस तरह से चुनावों से पहले योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल नंदी ने मुलायम सिंह यादव की तुलना रावण और मायावती की तुलना शूर्पणखा से की थी, उससे भी पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा।

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