गोपाल कांडा के केस में जज ने उठाई थी अंगुली, लिखा था- कम दिलचस्पी ले रही सरकार

जज ने आगे कहा कि "यह मेरे लिए बड़ी ही हैरानी की बात है कि... राज्य सरकार इस मामले में कम दिलचस्पी ले रही ही। ऐसा लगता है कि प्रोसिक्यूशन निदेशक ने सिर्फ राज्य सरकार को एक चिट्ठी लिखकर इस केस की जिम्मेदारी से अपने हाथ झाड़ लिए हैं।"

gopal kandaसिरसा सीट से विधायक गोपाल कांडा। (फाइल फोटो)

हरियाणा विधानसभा की सिरसा सीट से जीत दर्ज करने वाले हरियाणा लोकहित पार्टी के नेता गोपाल कांडा ने चुनाव नतीजों के बाद ही भाजपा को समर्थन देने का ऐलान कर दिया था। इसके बाद निर्दलीय विधायकों के समर्थन से ही हरियाणा में भाजपा सरकार बनने के कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन अब लोगों द्वारा गोपाल कांडा का विरोध किए जाने पर भाजपा को दोबारा सोचने के लिए मजबूर होना पड़ा और आखिरकार भाजपा ने कांडा से दूरी बनाते हुए जेजेपी के साथ गठबंधन का ऐलान कर दिया है।

बता दें कि गोपाल कांडा एक एयरहोस्टेस को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी हैं और फिलहाल दिल्ली में मुकदमे का सामना कर रहे हैं। गौरतलब है कि 3 हफ्ते पहले ही इस मुकदमे की सुनवाई के दौरान जज ने केस की धीमी प्रगति पर नाराजगी जतायी थी। जज ने केस में पब्लिक प्रोसिक्यूटर और गवाहों की, सुनवाई के दौरान गैरमौजूदगी पर सवाल खड़े किए थे और कहा था कि ‘यह बेहद ही हैरान करने वाला है जहां राज्य केस के अभियोजन में बिल्कुल भी दिलचस्पी नहीं ले रहा है।’

बता दें कि गोपाल कांडा पर एयरहोस्टेस के साथ बलात्कार, आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप हैं। वहीं बाद में अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने के आरोप भी मामले में जोड़े गए थे। इस मामले में गोपाल कांडा के साथ ही अरुणा चड्ढा भी आरोपी हैं। मई 2013 में गोपाल कांडा और अरुणा चड्ढा ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। जहां अदालत ने अपने फैसले में बलात्कार और अप्राकृतिक यौन संबंध के आरोपों को हटाने का आदेश दिया और अभी कांडा और चड्ढा पर आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपों को लेकर ट्रायल कोर्ट में मुकदमा चल रहा है।

हालांकि 6 साल बीत जाने के बाद भी गोपाल कांडा के खिलाफ चल रहे केस में कोई खास प्रगति नहीं हुई है और इसकी वजह सुनवाई के दौरान पब्लिक प्रोसिक्यूटर, गवाहों का समन के बावजूद अदालत में पेश नहीं होना है। इसके साथ ही अदालत में अधूरे सबूत पेश किए गए हैं। जिसके चलते अदालती कार्यवाही में खास प्रगति नहीं हुई है।

बीती 3 अक्टूबर को इस मामले में सुनवाई के दौरान स्पेशल जज अजय कुमार कुहार ने अपनी अदालत के निदेशक (प्रोसिक्यूशन) को समन जारी कर पूछा है कि स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्यूटर 23 सितंबर से सबूत रिकॉर्ड कराने के लिए अदालत में पेश क्यों नहीं हुए हैं? जज ने कहा कि “यह ध्यान देने वाली बात है कि स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्यूटर जो कि राज्य सरकार द्वारा इस केस के लिए नियुक्त किए गए हैं, वह 23 सितंबर से अदालत में पेश नहीं हो रहे हैं। सुनवाई की अंतिम तारीख पर प्रोसिक्यूशन निदेशक को इस बात की सूचना दे दी गई है और वह इस बात की जानकारी सरकार को दें।”

जज ने आगे कहा कि “यह मेरे लिए बड़ी ही हैरानी की बात है कि… राज्य सरकार इस मामले में कम दिलचस्पी ले रही ही। ऐसा लगता है कि प्रोसिक्यूशन निदेशक ने सिर्फ राज्य सरकार को एक चिट्ठी लिखकर इस केस की जिम्मेदारी से अपने हाथ झाड़ लिए हैं।”

अदालत ने कहा कि कई गवाहों से पूछताछ नहीं हुई है, क्योंकि स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्यूटर अदालत में मौजूद नहीं थे। अदालत ने इस मामले में दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है। फिलहाल दिल्ली सरकार ने इस मामले में बीती 10 अक्टूबर को एक अतिरिक्त पब्लिक प्रोसिक्यूटर मनीष रावत को नियुक्त किया है। अब अदालत 27-28 नवंबर को मामले में प्रोसिक्यूशन के सबूत रिकॉर्ड करेगी। बता दें कि अभियोजन पक्ष के 94 गवाहों में से 45 के बयान दर्ज हो चुके हैं और 12 नामों को लिस्ट से ड्रॉप कर दिया गया है।

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