केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (Defence Acquisition Council) ने गुरुवार को तीनों सेनाओं के कई अधिग्रहण प्रस्तावों को मंजूरी दे दी। टॉप अधिकारियो ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि इनमें फ्रांस से 114 राफेल फाइटर जेट की खरीद का सौदा भी शामिल है। डीएसी ने भी अमेरिका से छह पी-8आई मैरिटाइम सर्विलांस और एंटी सबमरीन वारफेयर एयरक्राफ्ट की खरीद को भी मंजूरी दे दी है।

यह मंजूरी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की 17 से 19 फरवरी के बीच होने वाली भारत यात्रा से कुछ दिन पहले मिली है। टॉप अधिकारियों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि 114 राफेल फाइटर जेट्स में से 90 की मैन्युफैक्चरिंग घरेलू स्तर पर करने का प्लान है। इसमें लगभग 50 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री होगी।

इससे पहले भारत में बनने वाले जेट में 30 फीसदी स्वदेशी सामग्री की बात चल रही थी। हालांकि, अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि बाद की बातचीत में इसे बढ़ाकर लगभग 50 प्रतिशत कर दिया जाएगा। इसके अलावा, भारत को विमान में भारतीय हथियार और सिस्टम लगाने का पूरा अधिकार होगा। कमर्शियल बातचीत खत्म होने और कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी द्वारा अधिग्रहण को मंजूरी मिलने के बाद अंतिम समझौते पर साइन किए जाएंगे।

इंडियन एयरफोर्स के पास अभी 36 राफेल विमान

भारतीय वायु सेना के पास पहले से ही 36 राफेल विमान हैं और भारतीय नौसेना अगले कुछ सालों में कैरियर ऑपरेशन के लिए 26 राफेल एम विमान शामिल करेगी। राफेल विमानों की खरीद से रसद और ट्रेनिंग की लागत को कम करने में मदद मिलेगी। आधुनिक फाइटर जेट भारतीय वायु सेना की फाइटर स्क्वाड्रन क्षमता में मौजूद कमी को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएंगे। यह स्क्वाड्रन क्षमता अभी 42 के मुकाबले 29 है।

अमेरिका से छह पी-8आई मैरिटाइम सर्विलांस के सौदे को भी मंजूरी

डीएसी ने अमेरिका से छह पी-8आई मैरिटाइम सर्विलांस और एंटी सबमरीन वारफेयर एयरक्राफ्ट की खरीद को भी मंजूरी दी है। बता दें कि नवंबर 2019 में, डीएसी ने छह पी-8आई विमानों की खरीद को मंजूरी दी थी। इसके बाद अमेरिकी रक्षा विभाग ने अप्रैल 2021 में लगभग 2.42 अरब डॉलर की अनुमानित लागत पर बिक्री को मंजूरी दे दी थी। हालांकि, यह सौदा पूरा नहीं हो सका। तब से विमान की कीमत में काफी बढ़ोतरी होने की आशंका है।

नए सिरे से प्रयास करते हुए भारत और अमेरिका पिछले कुछ महीनों से इस समझौते की बारीकी पर चर्चा कर रहे हैं। पिछले साल सितंबर में, अमेरिकी रक्षा विभाग और बोइंग के अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल इस सिलसिले में भारत आया था। पिछले महीने, भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ रक्षा सचिव आरके सिंह से मुलाकात की थी।