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आडवाणी, जोशी जैसे बुजुर्ग नेताओं के ल‍िए 2019 में आएंगे ‘अच्‍छे द‍िन’, अम‍ित शाह ने द‍िए संकेत

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेताओं के लिए 2019 का लोकसभा चुनाव सौगात लेकर आ सकता है। मीडिया को ऐसी अटकलों के बारे में पता चला है कि लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे बीजेपी के मार्गदर्शक मंडल में शामिल वरिष्ठ और बुजुर्ग नेता अगला लोकसभा चुनाव लड़ सकेंगे।

बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेताओं के लिए 2019 का लोकसभा चुनाव सौगात लेकर आ सकता है। मीडिया को ऐसी अटकलों के बारे में पता चला है कि लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे बीजेपी के मार्गदर्शक मंडल में शामिल वरिष्ठ और बुजुर्ग नेता अगला लोकसभा चुनाव लड़ सकेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से अनौपचारिक रूप से कहा है कि 2019 में चुनाव लड़ने के लिए वरिष्ठ नेताओं पर लगा बैन हटा लिया गया है। जानकारों की मानें तो अमित शाह का यह फैसला हाल ही में कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह को देखते हुए आया जहां तमाम विपक्ष भाजपा के खिलाफ एकजुट दिखा था। बीजेपी के शीर्ष नेताओं में जो लोग 75 की उम्र पार कर चुके हैं उनमें लाल कृष्ण आडवाणी, डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी, शत्रुघ्न सिन्हा, करिया मुंडा और सुमित्रा महाजन आदि शामिल हैं। पार्टी के अंदरुनी सूत्रों के मुताबिक ज्यादातर वरिष्ठ नेताओं को 2019 में चुनाव लड़ते हुए देखा जा सकता है।

हाल ही में लोकसभा और विधासभा के उपचुनावों के नतीजे बीजेपी के लिए निराशाजनक रहे। नाक का सवाल बने कैराना के उपचुनाव में विपक्ष की गोलबंदी के आगे बीजेपी को मुंह की खानी पड़ी। हालांकि राज्यों के ज्यादातर चुनावों में भाजपा की जीत का रथ दौड़ा लेकिन कर्नाटक और फिर लोकसभा और विधानसभा उपचुनावों में परिणाम बीजेपी के अनुकूल न रहने पर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व नए सिरे से चुनाव संबंधी रणनीतियों पर विचार विमर्श करने को विवश समझा रहा है। ऐसे में इस बात की जरूरत और ज्यादा समझी जा रही है कि 2019 से पहले मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के विधानसभा चुनाव नजदीक है और तीनों राज्यों में भाजपा की वर्तमान सरकारों के खिलाफ विरोध के स्वर खासे जोर पकड़ रहे हैं।

मध्य प्रदेश में भी पिछले दिनों दो लोकसभा सीटों पर हुए उपचुनावों में भाजपा को मुंह की खानी पड़ी थी। कांग्रेस राज्य में किसानों की आत्महत्या संबंधी मुद्दे भुनाने में सफल रही थी। जानकारों की मानें तो बीजेपी एकबार फिर अनुभवी और बुजुर्ग नेताओं से मार्गदर्शन के अलावा सीधे तौर पर चुनावी जंग में उन्हें भेजकर और उनके जौहर का इस्तेमाल कर किला फतेह करने पर विचार बना रही है।

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