कोरोना काल में लोग मजबूर! लेना पड़ा 90000 करोड़ का गोल्ड लोन, दूसरी लहर में पहली से 77% ज्यादा; पर्सनल लोन का आंकड़ा भी बढ़ा

नाम न बताने की शर्त पर एक राष्ट्रीयकृत बैंक के एक अफसर ने बताया, “लोगों को सोना गिरवी रखकर लोना पाना आसान लगता है। एक अवसर को देखते हुए, बैंकों ने उधार देना शुरू कर दिया क्योंकि इस व्यवसाय में वसूली बोझिल नहीं है।

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हालांकि, गोल्ड लोन के कारोबार में भारी उछाल राष्ट्रीय लॉकडाउन, नौकरी छूटने, वेतन में कटौती और उच्च चिकित्सा खर्चों के बाद कोविड-19 महामारी से पनपे संकट को भी दर्शाता है। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटोः अमित चक्रवर्ती)

कोरोना काल ने लोगों को आर्थिक तौर पर इस कदर तोड़ा कि वे गोल्ड लोन (सोना गिरवी रखकर पैसे लेना) लेने तक को मजबूर हुए। मोटा-मोटी आंकड़ा देखें तो इस दौरान 90 हजार करोड़ रुपए (जुलाई 2020 – 27,223 करोड़ + जुलाई 2021 – 62,412 करोड़) के आसपास का गोल्ड लोन लिया गया, जबकि वैश्विक महामारी की दूसरी लहर में पहली के मुकाबले 77 फीसदी अधिक इस तरह का लोन लिया गया। पर्सनल लोन का आंकड़ा भी इस समयकाल में बढ़ा।

दरअसल, फॉर्मल और सर्विस सेक्टर द्वारा क्रेडिट (जमा रकम) की मांग बीते 12 महीनों में कम रही, पर गोल्ड लोन और क्रेडिट कार्ड कारोबार आधारित चलने वाले रीटेल लोन्स में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। रीटेल या पर्सनल लोन -जो कुल बैंक ऋण का 26 फीसदी है- पिछले 12 महीनों में नौ प्रतिशत की तुलना में जुलाई 2021 तक 12 महीनों में 11.2 प्रतिशत उछला।

रीटेल लोन्स में गोल्ड लोन का बकाया सालाना आधार पर जुलाई 2021 तक 77.4 प्रतिशत या 27,223 करोड़ रुपए बढ़कर 62,412 करोड़ रुपए हो गया। सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने जून 2021 तक गोल्ड लोन में 338.76 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। एसबीआई के एक अधिकारी ने बताया, “बैंक की कुल गोल्ड लोन बुक 21,293 करोड़ रुपए थी।”

हालांकि, गोल्ड लोन के कारोबार में भारी उछाल राष्ट्रीय लॉकडाउन, नौकरी छूटने, वेतन में कटौती और उच्च चिकित्सा खर्चों के बाद कोविड-19 महामारी से पनपे संकट को भी दर्शाता है। नाम न बताने की शर्त पर एक राष्ट्रीयकृत बैंक के एक अफसर ने बताया, “लोगों को सोना गिरवी रखकर लोना पाना आसान लगता है। एक अवसर को देखते हुए, बैंकों ने उधार देना शुरू कर दिया क्योंकि इस व्यवसाय में वसूली बोझिल नहीं है।

जुलाई 2021 को खत्म 12 महीने की अवधि के वक्त क्रेडिट कार्ड बकाया भी 9.8 प्रतिशत (10,000 करोड़ रुपए) बढ़कर 1.11 लाख करोड़ रुपए हो गया, जबकि यह विवेकाधीन खर्च में वृद्धि का सुझाव देता है। यह उपभोक्ताओं को अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए उच्च लागत वाले उधार का सहारा लेने की ओर भी इशारा करता है। जुलाई 2020 को खत्म हुए पिछले 12 महीनों में क्रेडिट कार्ड का बकाया 8.6 फीसदी बढ़ा था।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, पूरी तरह से रीटेल सेगमेंट के लिए बकाया ऋण जुलाई 2021 तक 2.88 लाख करोड़ रुपए बढ़कर 28.58 लाख करोड़ रुपए हो गया। इसके साथ तुलना करने पर, इंडस्ट्री और सर्विस सेक्टर द्वारा क्रेडिट की मांग क्रमशः एक प्रतिशत और 2.7 प्रतिशत पर सुस्त थी। ये दो सेगमेंट 108.32 लाख करोड़ रुपए के कुल ऋण बकाया के आधे से अधिक के लिए जिम्मेदार हैं।

रीटेल सेगमेंट में हाउसिंग लोन – 51.3 प्रतिशत की उच्चतम हिस्सेदारी के साथ – पिछले 12 महीनों के दौरान दोहरे अंकों में 11.1 प्रतिशत की वृद्धि की तुलना में विकास दर 8.9 प्रतिशत घटकर 14.66 लाख करोड़ रुपए हो गई। केयर रेटिंग्स के मुताबिक, हाउसिंग सेगमेंट में कोई उचित पिक-अप न होने से हाउसिंग लोन सेगमेंट ने महामारी की दूसरी लहर के दौरान एक हिट लिया।

दूसरी ओर आरबीआई डेटा दर्शाते हैं कि जुलाई 2021 में बड़े उद्योगों का ऋण 2.9 प्रतिशत बढ़कर 22.75 लाख करोड़ रुपए हो गया, जिसमें एक साल पहले 1.4 प्रतिशत की वृद्धि थी। नतीजतन इंडस्ट्री के लिए ओवरऑल क्रेडिट ग्रोथ (समग्र ऋण वृद्धि), जो अभी तक नए निवेश करने के लिए है, पिछले 12 महीनों में 0.9 प्रतिशत के मुकाबले जुलाई 2021 तक 12 महीनों में एक प्रतिशत पर कमोबेश सपाट रही। गिरावट का एक कारण डी-लीवरेजिंग (ऋण कम करना) और बांड बाजार तक पहुंच है।

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