महाराष्ट्र के मीरा भयंदर में हाउसिंग सोसाइटियों के भीतर बकरी लाने, रखने और कुर्बानी करने पर रोक लगा दी गई है। मीरा भयंदर नगर निगम ने बुधवार, 19 अगस्त को BJP समर्थित प्रस्ताव को बहुमत से मंजूरी दे दी। नए नियमों के तहत घरों, हाउसिंग कॉम्प्लेक्स, दुकानों और सार्वजनिक स्थानों पर कुर्बानी के लिए बकरियां रखने की अनुमति नहीं होगी।

नगर निगम के मुताबिक, कुर्बानी के लिए लाई गई बकरियों को अनधिकृत स्थानों पर नहीं रखा जा सकेगा। कुर्बानी केवल नगर निगम की ओर से निर्धारित स्थानों पर ही की जा सकेगी। इसके अलावा बकरीद के मौके पर अस्थायी मंडप लगाने के लिए भी नगर निगम से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

नियम तोड़ने पर जुर्माना और आपराधिक कार्रवाई

बीजेपी के नगरसेवक प्रशांत दलवी ने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाने के साथ-साथ आपराधिक कार्रवाई भी की जा सकती है। उनका कहना है कि यह फैसला लंबे समय से सामने आ रहे विवादों और आवासीय परिसरों में बढ़ते तनाव को देखते हुए लिया गया है।

मीरा भयंदर में यह मुद्दा पिछले करीब दो वर्षों से लगातार चर्चा में है। बकरीद से पहले कई हाउसिंग सोसाइटियों में परिसर के भीतर बकरियां लाने को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। कई जगहों पर सोसाइटी के सदस्यों के बीच बहस और टकराव की स्थिति भी बनी।

चार महीने पहले बढ़ा था विवाद

बकरियों को हाउसिंग सोसाइटियों में लाने को लेकर विवाद करीब चार महीने पहले उस समय और बढ़ गया था, जब मीरा रोड की एक आवासीय सोसाइटी में बकरीद पर कुर्बानी के लिए बकरियां लाई गई थीं। इस घटना के बाद इलाके में सांप्रदायिक तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी।

इसके बाद हाउसिंग सोसाइटियों में बकरियां रखने और कुर्बानी को लेकर नियम तय करने की मांग तेज हुई। स्थानीय स्तर पर शुरू हुआ यह विवाद धीरे-धीरे राजनीतिक मुद्दा भी बन गया।

विपक्ष ने उठाए ‘ब्लैंकेट बैन’ पर सवाल

हालांकि, विपक्ष ने नगर निगम के इस फैसले की व्यापकता पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के नगरसेवक अनिल सावंत ने कहा कि अगर किसी हाउसिंग सोसाइटी के सभी सदस्य बकरियां लाने पर सहमत हैं, तो सोसाइटी को अपना फैसला लेने की अनुमति मिलनी चाहिए।

सावंत के मुताबिक, अगर बकरीद से तीन-चार दिन पहले कोई बकरी किसी सोसाइटी में लाई जाती है और सोसाइटी के किसी सदस्य को इससे आपत्ति नहीं है, तो ऐसी स्थिति में उस पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जानी चाहिए।

मुंबई में कुर्बानी को लेकर हाईकोर्ट का क्या रुख रहा है?

मीरा भयंदर के फैसले के बीच मुंबई में कुर्बानी को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट के 2019 के अंतरिम आदेश का भी हवाला दिया जा रहा है। अदालत ने व्यक्तिगत आवासीय फ्लैट के भीतर पशु वध की अनुमति देने से BMC को रोका था। इसके पीछे स्वच्छता, साफ-सफाई और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं को आधार बनाया गया था।

हालांकि, अदालत ने सहकारी हाउसिंग सोसाइटियों या सामुदायिक परिसरों में कुर्बानी पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई थी। आदेश में कहा गया था कि अगर करीब एक किलोमीटर की पैदल दूरी के भीतर अधिकृत बूचड़खाना या निर्धारित सामुदायिक स्थान उपलब्ध हो, तो आम तौर पर आवासीय परिसर में अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

मीरा भयंदर नगर निगम का ताजा प्रस्ताव ऐसे समय में आया है, जब बकरीद के दौरान आवासीय परिसरों में धार्मिक गतिविधियों, सोसाइटी के नियमों और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को लेकर बहस जारी है। अब इस फैसले को लेकर सत्तारूढ़ पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक खींचतान बढ़ने की संभावना है।

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वंदे मातरम् को लेकर जारी सियासी विवाद के बीच कांग्रेस ने अपना रुख एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है। कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक में पार्टी ने 1937 में लिए गए अपने फैसले को दोहराते हुए स्पष्ट किया कि कांग्रेस के कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत की केवल पहली दो अंतरों को ही गाया जाएगा। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।