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गोवा: समानांतर इकाई के गठन के वेलिंगकर के फैसले पर बंटा आरएसएस

वेलिंगकर ने निर्देश के माध्यम के तौर पर क्षेत्रीय भाषा की प्रधानता की खातिर अभियान चलाने के लिए बीबीएसएम का गठन किया था। इसी के तहत उन्होंने राज्य की भाजपा सरकार को निशाने पर लिया हुआ है।

Author पणजी | September 2, 2016 21:18 pm
गोवा आरएसएस प्रमुख रहे सुभाष वेलिंगकर एक जनसभा को संबोधित करते हुए। ( file photo)

गोवा में आरएसएस अपने बर्खास्त नेता सुभाष वेलिंगकर और उनके समर्थकों के संघ के ‘गोवा प्रांत’ के तौर पर एक समानांतर संगठन का गठन करने और मूल संगठन से अलग काम करने के फैसले को लेकर विभाजित है। गोवा में आरएसएस के एक वरिष्ठ नेता डी भीकाजी नाइक ने शुक्रवार (2 सितंबर) को कहा, ‘मैं अब भी आरएसएस नागपुर मुख्यालय से जुड़ा हूं। आप इस तरह एक अलग आरएसएस प्रांत नहीं बना सकते। मैं ऐसा करने वाले समूह के साथ नहीं हूं।’ जहां कुछ पदाधिकारियों सहित आरएसएस कार्यकर्ताओं और समर्थकों की एक बड़ी संख्या वेलिंगकर के साथ है वहीं बहुत सारे स्वयंसेवक संघ से रिश्ता तोड़ने के खिलाफ हैं। वेलिंगकर को हाल में राज्य प्रमुख के पद से हटा दिया गया था। नाइक ने कहा कि वह अपनी व्यक्तिगत क्षमता में भारतीय भाषा सुरक्षा मंच (बीबीएसएम) की मांगों का समर्थन करते रहे हैं।

वेलिंगकर ने निर्देश के माध्यम के तौर पर क्षेत्रीय भाषा की प्रधानता की खातिर अभियान चलाने के लिए बीबीएसएम का गठन किया था। इसी के तहत उन्होंने राज्य की भाजपा सरकार को निशाने पर लिया हुआ है। नाइक ने गोवा में मार्च 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बीबीएसएम के एक राजनीतिक दल के गठन की घोषणा की तरफ इशारा करते हुए कहा, ‘मुझे नहीं पता कि बीबीएसएम भविष्य में क्या करेगा।’ वेलिंगकर ने बीबीएसएम के नेताओं के साथ आगामी चुनाव में भाजपा से लड़ने के लिए एक राजनीतिक दल के गठन की घोषणा की थी जिसके बाद उन्हें आरएसएस ने गोवा विभाग संघ चालक के पद से ‘मुक्त’ कर दिया।

आरएसएस के एक और वरिष्ठ नेता रत्नाकर लेले ने भी नए घटनाक्रम से खुद को दूर करने की कोशिश की। उन्होंने कहा, ‘मैं उनके साथ नहीं हूं।’ लेले ने साथ ही कहा कि 80 प्रतिशत स्वयंसेवक नए प्रांत में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि वेलिंगकर के नेतृत्व वाले गुट के अलग प्रांत के गठन का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है। वेलिंगकर ने गुरुवार को कहा था कि तटीय राज्य में संघ की शाखा कम से कम विधानसभा चुनाव तक मूल संगठन से अलग काम करेगी। हालांकि आरएसएस ने उनके दावों को खारिज करते हुए कहा कि उसकी कोई भी शाखा संगठन से खुद को अलग नहीं कर सकती और राज्य के लिए नए पदाधिकारियों की जल्द ही घोषणा की जाएगी।

इसी बीच गोवा के मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पारसेकर ने वेलिंगकर के उस आरोप पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया जिसमें वेलिंगकर ने अपने खिलाफ कार्रवाई के पीछे केंद्रीय मंत्री मनोहर पर्रिकर और नितिन गडकरी का हाथ होने की बात कही थी। पारसेकर ने वेलिंगकर के बयान को लेकर सवाल पूछे जाने पर एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘आप इसके बारे में पर्रिकर और गडकरी से पूछ सकते हैं। वे दिल्ली में हैं। गोवा में लक्ष्मीकांत पारसेकर इसपर कैसे टिप्पणी कर सकते हैं? मैं उनकी ओर से कैसे टिप्पणी कर सकता हूं।’ उन्होंने कहा, ‘पिछले दो दिन से मैं बार बार कह रहा हूं, मैं इसपर टिप्पणी नहीं करना चाहता। यह उनका अंदरूनी मामला है।’ मुख्यमंत्री ने वेलिंगकर और उनके समर्थकों के नये गोवा प्रांत के गठन को लेकर रुख मांगने पर कहा, ‘गोवा में नया प्रांत नहीं हो सकता।’ उन्होंने कहा, ‘आरएसएस में सभी फैसले केंद्रीय नेतृत्व लेता है।’


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