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मनोहर पर्रिकर सरकार के बहुमत परीक्षण के दौरान अचंभा: शपथ लेते ही सदन से गायब हो गया कांग्रेस विधायक, एनसीपी सदस्य ने पार्टी से पूछे बिना दे दिया समर्थन

कांग्रेस एमएलए विश्वजीत राणे ने कहा कि, 'दिग्विजय सिंह का बयान काफी अहम है, मैने तय किया कि मैं पार्टी छोड़ दूंगा और विश्वास मत परीक्षण के दौरान सदन से अनुपस्थित रहूंगा। दिग्विजय सिंह के आरोपों से दुखी विश्वजीत राणे ने कहा कि, 'ऐसे बयानों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है

अपने दफ्तर में मौजूद गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर (Source-PTI)

गोवा में मनोहर पर्रिकर सरकार ने विश्वास मत तो हासिल कर लिया, लेकिन बीजेपी की ये जीत गोवा में कांग्रेस के आपसी कलह का खुलासा कर गई। गोवा में कांग्रेस के 17 विधायक हैं लेकिन जब पर्रिकर सरकार के खिलाफ वोटिंग की बात आई तो 16 विधायकों ने ही कांग्रेस का समर्थन किया। कांग्रेस के विधायक विश्वजीत राणे विश्वास मत के दौरान गायब हो गये। हालांकि उन्होंने 38 दूसरे विधायकों के साथ शपथ जरुर ली, लेकिन शपथ ग्रहण करते ही लापता हो गये। गुरुवार को मनोहर पर्रिकर और प्रोटेम स्पीकर सिद्धार्थ कुकानिलेकर को छोड़कर राज्य के 38 विधायकों ने शपथ ली थी।

बाद में गोवा के पूर्व सीएम प्रतापसिंह राणे के पुत्र विश्वजीत राणे ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बताया कि, उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है क्योंकि पार्टी गोवा में अपने दायित्वों का पालन करने में फेल हो गई थी। विश्वजीत राणे ने कांग्रेस के सीनियर नेता दिग्विजय सिंह पर भी हमला बोला। विश्वजीत राणे ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा देने का फैसला तब किया जब उन्होंने अपने ऊपर दिग्विजय सिंह के आरोंपो को सुना। विश्वजीत राणे के मुताबिक दिग्विजय सिंह ने उन पर आरोप लगाया था कि, ‘वे पाला बदलकर बीजेपी में चले गये हैं और मनोहर पर्रिकर के साथ एक होटल चाय पीते देखे गये थे।’

विश्वजीत राण ने कहा कि, ‘दिग्विजय सिंह का बयान काफी अहम है, मैने तय किया कि मैं पार्टी छोड़ दूंगा और विश्वास मत परीक्षण के दौरान सदन से अनुपस्थित रहूंगा। दिग्विजय सिंह के आरोपों से दुखी विश्वजीत राणे ने कहा कि, ‘ऐसे बयानों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है, पूरे चुनाव प्रचार के दौरान हमलोगों ने एक ताकत के रुप में काम किया और बीजेपी, साम्प्रदायिक शक्तियों के खिलाफ लड़ते रहे।’ गोवा विधानसभा में शक्ति परीक्षण एक और रोचक घटना हुई। एनसीपी के विधायक चर्चिल एलेमाओ भी पर्रिकर सरकार के समर्थन में खड़े दिखे, बाहर से सरकार को समर्थन का वादा दिया। हालांकि उन्होंने इसके लिए पार्टी आलाकमान से राय भी नहीं ली। बाद में एनसीपी ने उनपर दल बदल कानून के तहत कार्रवाई की धमकी दी और पर्रिकर सरकार को समर्थन देने के लिए 7 दिनों के अंदर जवाब मांगा।

गोवा फ्लोर टेस्ट: मनोहर पार्रिकर ने विधानसभा में साबित किया बहुमत

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