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साथ बैठे, चाय पी और फैसला ले लिया- उधर भारत हारा, इधर गोवा में भाजपाई हो गए कांग्रेस के 10 विधायक

एंटोनियो मोन्सेराटे का कहना है कि हमने कोई समझौता नहीं किया है। हम सब दोस्त हैं। हम बैठे, चाय पी और बातचीत की। मोन्सेराटे ने कहा कि उन्हें कोई मंत्री पद नहीं चाहिए, उन्हें बस अपने विधानसभा क्षेत्र का विकास करना है।

goaकांग्रेस के 10 विधायक भाजपा में हुए शामिल।

कर्नाटक में जहां कांग्रेस की गठबंधन सरकार पर संकट के बादल छाए हुए हैं। वहीं गोवा में भी कांग्रेस को करारा झटका लगा है। दरअसल कांग्रेस के 10 विधायकों ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली है। बुधवार को घटे इस घटनाक्रम में विधानसभा में विपक्ष के नेता चंद्रकांत कावेलकर समेत कांग्रेस के 10 विधायकों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया और भाजपा में शामिल हो गए। इसके बाद विधानसभा में भाजपा विधायकों की संख्या अब बढ़कर 27 हो गई है, वहीं कांग्रेस, जिसके साल 2017 में 17 विधायक थे, अब उसके पास सिर्फ 5 विधायक बचे हैं। कांग्रेस के 2 विधायक पहले ही भाजपा का दामन थाम चुके हैं।

माना जा रहा है कि भाजपा सरकार अब राज्य में अपनी कैबिनेट में कुछ बदलाव कर सकती है। इस बदलाव के तहत भाजपा की सहयोगी पार्टियों की अब कैबिनेट से छुट्टी हो सकती है। मौजूदा कैबिनेट में 12 मंत्री पद में से 5 पर सहयोगी पार्टियों का कब्जा है। विधानसभा स्पीकर ने भी कांग्रेस के बागी विधायकों का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने विधानसभा में नए सदस्यों का स्वागत किया और बताया कि ‘इन लोगों ने राज्य और अपने विधानसभा क्षेत्रों के विकास के लिए हमारी पार्टी ज्वाइन की है। भाजपा की सदस्यता उन्होंने बिना कोई शर्त ग्रहण की है।’

कांग्रेस के जिन विधायकों ने भाजपा की सदस्यता ली है, उनमें चंद्रकांत कावलेकर, एंटोनियो मोन्सेराटे, जेनिफर मोन्सेराटे, फिलिप नेरी रोड्रिगेज, नीलकंठ हलारंकर , फ्रांसिस्को सिल्वेरा, क्लेफेसियो डायस, इसीडोर फर्नांडेज, विल्फ्रेड डिसूजा, टोनी फर्नांडेज का नाम शामिल है। खास बात ये है कि इन विधायकों पर दल-बदल कानून के तहत भी कार्रवाई नहीं हो पाएगी, क्योंकि इन्होंने नियमों के मुताबिक दो तिहाई सदस्यों ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की है।

भाजपा में शामिल होने वाले विधायकों का कहना है कि उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए भाजपा में शामिल होने का फैसला किया है। एंटोनियो मोन्सेराटे का कहना है कि हमने कोई समझौता नहीं किया है। हम सब दोस्त हैं। हम बैठे, चाय पी और बातचीत की। मोन्सेराटे ने कहा कि उन्हें कोई मंत्री पद नहीं चाहिए, उन्हें बस अपने विधानसभा क्षेत्र का विकास करना है।

वहीं कांग्रेस ने इसकी आलोचना की है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष गिरीश चोदांकर ने कहा कि इससे भाजपा की अपने सहयोगी पार्टियों के प्रति असुरक्षा जगजाहिर हो गई है। भाजपा ने आम जनता के जनादेश का अपमान किया है। बता दें कि अब राज्य में कांग्रेस के सिर्फ 5 विधायक रवि नाईक, लुजिन्हो फालेरियो, प्रताप सिंह राने, दिगंबर कामत और एलेक्स रेगीनाल्डो ही बचे हैं।

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