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साधु-सन्यासिय़ों पर बनी फिल्म ‘ग्लोबल बाबा’ को लेकर मचा बवंडर

साधु-महात्माओं के जीवन चरित्र को लेकर बनी फिल्म ‘ग्लोबल बाबा’ के रिलीज होने के बाद कुछ संगठनों ने इसे हिंदू धर्म को बदनाम करने की अंतरराष्ट्रीय साजिश करार दिया तो कुछ संगठनों ने इसे समाज में जागरूकता फैलाने वाली फिल्म बताया है।

Author नई दिल्ली | March 18, 2016 7:53 AM

साधु-महात्माओं के जीवन चरित्र को लेकर बनी फिल्म ‘ग्लोबल बाबा’ के रिलीज होने के बाद कुछ संगठनों ने इसे हिंदू धर्म को बदनाम करने की अंतरराष्ट्रीय साजिश करार दिया तो कुछ संगठनों ने इसे समाज में जागरूकता फैलाने वाली फिल्म बताया है। उधर फिल्म के निर्माता विजय बंसल ने अपनी फिल्म में किसी धर्म विशेष या किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाए जाने के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उनकी फिल्म में केवल एक सामाजिक संदेश देने की कोशिश की गई है।

बंसल ने बातचीत में कहा, ‘हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी कहते हैं कि किसी उम्मीदवार को वोट देने से पहले उसकी पृष्ठभूमि की जांच कर लेनी चाहिए। हमने भी अपनी फिल्म के जरिए यह संदेश देने का प्रयास किया है कि लोगों को बाबाओं और साधु संतों का अनुयायी बनने से पहले उनकी पृष्ठभूमि आदि के बारे में जानने का प्रयास करना चाहिए।’ उन्होंने ‘ग्लोबल बाबा’ फिल्म के खिलाफ उत्तर प्रदेश के कुछ शहरों में साधुओं और बाबाओं के संगठनों द्वारा विरोध किए जाने की रिपोर्टों के बारे में पूछे जाने पर यह बात कही।

उधर, अखिल भारतीय सनातन धर्म संघर्ष समिति के राष्ट्रीय महासचिव आचार्य कुशमुनि ने कहा कि ग्लोबल बाबा, पीके और ओ माई गॉड जैसी फिल्में अंतरराष्ट्रीय साजिश का हिस्सा हैं जिसके तहत हिंदू धर्माचार्यों को बदनाम करने की साजिश हो रही है। इसी के चलते रोज एक योजना के तहत संतों पर नए नए इल्जाम लगाए जाते हैं। उन्होंने ग्लोबल बाबा तथा अन्य ऐसी फिल्मों के निर्माता निर्देशकों के धन के स्रोतों की जांच की मांग करने के साथ ही इस फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की।

कुशमुनि ने कहा कि फिल्म से वह आहत हुए हैं। क्या इस्लाम या ईसाई धर्म में बुराइयां नहीं हैं? लेकिन उनके बारे में बोलने की हिम्मत किसी की नहीं होती। उन्होंने ऐसी फिल्मों के निर्माण के पीछे ईसाई, मुस्लिम और वामपंथी ताकतों का हाथ बताया और साथ ही आरोप लगाया कि इस प्रकार की फिल्में अंडरवर्ल्ड के पैसे से बनती हैं। मार्तन्ड पुरी जी महाराज ने कहा कि उन्होंने अभी इस फिल्म को नहीं देखा है लेकिन वह इस प्रकार की फिल्मों के जरिए समाज में सनातन धर्म की बुराइयों के संबंध में जनता को जागरूक करने के पक्षधर नजर आए।

पिछले कुछ सालों से धर्मगुरुओं से जुड़े मामलों का उपयोग धन कमाने के लिए करने की प्रवृत्ति बढ़ गई है और हिंदू संत इसका शिकार हो जाते हैं। इसका एक कारण तो यह है कि हिंदू धर्म में काफी सहिष्णुता है जबकि बाकी धर्मों में ऐसा कुछ होने पर तुरंत प्रतिक्रिया सामने आ जाती है। मार्तन्ड पुरीजी ने कहा, ‘मैं इसे गलत नहीं मानता हूं लेकिन ऐसे विषय पर बनने वाली फिल्म में यह देखना होता है कि कहानी के पीछे का उद्देश्य क्या है। हिंदू धर्म में भ्रष्टाचार, ठगी नहीं है, मैं यह नहीं कहता लेकिन इस प्रकार की चीजों से सनातन धर्म कलंकित हुआ है।’
उन्होंने पीके , ओ माई गॉड को भगवान पर हमला करार दिया लेकिन साथ ही कहा कि समाज को जागरूक करने की भी जरूरत है।’

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