ताज़ा खबर
 

नक्सली हमला: सपूतों को दी गई अश्रुपूर्ण अंतिम विदाई

गांव सथियाल में ग्रामीणों ने अपने बहादुर सपूत रघुबीर को मंगलवार को आंसुओं के साथ अंतिम विदाई दी।

Author अमृतसर | April 26, 2017 1:56 AM
नक्सली हमले में सीआरपीएफ के 25 जवान शहीद।

गांव सथियाल में ग्रामीणों ने अपने बहादुर सपूत रघुबीर को मंगलवार को आंसुओं के साथ अंतिम विदाई दी। नक्सली हमले में शहीद इस सीआरपीएफ जवान की अंत्येष्टि राजकीय सम्मान के साथ की गई। प्रशासनिक अधिकारियों सहित बड़ी संख्या में आसपास के ग्रामीण भी अंतिम विदा देने पहुंचे और अपने सपूत की बहादुरी को नमन किया। रघुबीर अपने पीछे पत्नी और दो बच्चे छोड़ गए हैं। यह परिवार चंडीगढ़ में रहता है। रघुबीर छत्तीसगढ़ में तैनात थे। ग्रामीणों को अपने इस सपूत की शहीदी पर गर्व है लेकिन अभी सभी आंसुओं में डूबे हैं। परिजनों में भारत सरकार के प्रति गुस्सा है और उनका आरोप है कि बाकी  रघुबीर सिंह के भाई बिक्रम सिंह का कहना है, ‘हमें अपने भाई की शहादत पर फख्र है। बड़े दुख की बात है कि ये नक्सली पहले भी उसी जगह पर 2007 में भी भारतीय सुरक्षा बलों की जान ले चुके हैं। इसका साफ मतलब यही है कि भारत सरकार वहां इलाके में नक्सली हमलों से कारगर तरीके से निपटने में नाकाम है। क्या सरकार एक और हमले का ही इंतजार कर रही है? इतने सालों तक सरकार क्यों सोई रही?

रघुबीर ने सीआरपीएफ में बतौर जवान कदम रखा था, और तरक्की पाकर इंस्पेक्टर बने थे।मंडी में सुकमा नक्सली हमले में शहीद 33 वर्षीय जवान सुरेंद्र कुमार को मंगलवार शाम बल्ह घाटी के नेरचौक में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। उनके पार्थिव देह को विशेष हेलिकॉप्टर से सुंदरनगर के पोलिटेक्निक मैदान में उतारा गया, जहां से विशेष गाड़ी से शहीद के पैतृक गांव नेरचौक लाया गया। सुरेंद्र कुमार 74वीं बटालियन में हेड कांस्टेबल थे। वे 2003 में भर्ती हुए थे और पिछले तीन सालों से वे सुकमा में तैनात थे। सुरेंद्र के परिवार में विधवा मां, पत्नी किरण और तीन साल की बेटी है।

सुरेंद्र की शहादत की खबर सुनते शहीद के घर में मातम छा गया। शहीद की माता और पत्नी के विलाप से कलेजा फट रहा था। बुधवार को शाम पांच बजे जैसे ही शहीद का पार्थिव शरीर घर पहुंचा, सभी शोक में डूब गए। पत्नी सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाईं और बार-बार गश खाकर गिरी। तीन वर्षीय एलिना को दोपहर तक पता नहीं था कि उसके पापा देश की रक्षा करते हुए शहादत दे चुके हैं। शहीद की मां बिमला देवी के विलाप से हर कोई अंदर तक हिल गया जबकि उनका भाई जितेंद्र किसी तरह से खुद को संभाले हुए था। शहीद के पार्थिव शरीर के नेरचौक पहुंचने से पहले ही शहीद के घर में सैकड़ों लोग इकट्ठा हो चुके थे। जैसे ही पार्थिव शरीर नेरचौक पहुंचा, लोगों ने जब तक सूरज चांद रहेगा सुरेंद्र तेरा नाम रहेगा के नारे लगाए। पूरे सम्मान के साथ सुरेंद्र कुमार को नेरचौक के श्मशान घाट पर अंतिम विदाई दी गई। बेटी एलीना ने शहीद पिता को मुखाग्नि दी। सोनीपत: नक्सलियों के हमले में सोनीपत के गांव जैनपुर के रहने वाले नरेश कुमार भी शहीद हो गए। उनके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। नरेश कुमार आरएएफ में बतौर एएसआइ के पद पर तैनात थे। वे अपने पीछे पत्नी राजबाला और तीन बच्चों को छोड़ गए हैं। राजबाला का कहना है कि सरकार को सख्त कदम उठाने चाहिए नहीं तो ऐसे ही सारे फौजी शहीद हो जाएंगे। वहीं परिजन बलवान ने कहा है कि सरकार को परिवार के तीनों बच्चों के लिए कदम उठाना चाहिए। बेटी की शादी के लिए भी सरकार को मदद करनी चाहिए। परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी देनी चाहिए। गांव के सरंपच सुनील ने कहा है कि यह फौज पर पहला हमला नहीं है। सरकार को अब सख्त कदम उठाने चाहिए ताकि कोई और फौजी शहीद न हो।

करनाल: नक्सलियों के हमले में शहीद हुए जवान राममेहर महज छह दिन बाद ही छुट्टी पर आने वाले थे। इससे पहले ही सोमवार देर रात उनके घर उनकी शहादत की खबर पहुंची। इसके बाद पूरे परिवार में मातम छा गया। करनाल के खेड़ी मानसिंह गांव के रहने वाले राममेहर छह भाईयों में चौथे नंबर के थे। वे पिछले 19 साल से देश की सेवा कर रहे थे और इस साल अक्तूबर में रिटायर होने वाले थे। शहीद की पत्नी पूनम और बेटा रोहित व बेटी लविशा करनाल रहते हैं। गांव में राममेहर की शहादत की सूचना रात में ही पहुंच गई थी लेकिन परिवार वालों ने उनकी पत्नी को सुबह घर बुलाने के बाद सूचित किया। राममेहर की तीन दिन पहले ही पत्नी से बात हुई थी। पिता पूर्ण संधू का कहना है कि उनके बेटे की मौत के लिए सरकार दोषी है। सरकार उग्रवादियों के खिलाफ खुली कार्रवाई के आदेश नहीं देती। तभी आए दिन जवान शहीद हो रहे हैं। राममेहर के भाई राज कुमार पूर्व सैनिक है और इस समय हरियाणा पुलिस में कार्यरत है।

 

2008 मालेगांव ब्लास्ट: बॉम्बे हाई कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को दी जमानत

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App