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लड़की पर लगा नाबालिग प्रेमी से यौन शोषण का आरोप, फेसबुक पर हुआ था प्यार

बच्चों के साथ होने वाले अपराधों को रोकने के लिए साल 2012 में विशेष कानून बनाया गया था। यह कानून बच्चों को छेड़खानी, बलात्कार, कुकर्म और यौन शोषण जैसे मामले से सुरक्षा प्रदान करता है।

Author कोट्टायम | April 3, 2017 4:11 PM
इस तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

केरल के कोट्टायम जिले में एक 21 साल की लड़की को नाबालिग प्रेमी के यौन शौषण के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। लड़की के खिलाफ पास्को एक्ट में मामला दर्ज किया गया है। दरअसल इस संबंध में लड़की के बॉयफ्रेंड की मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। महिला की शिकायत के बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की। 17 साल के लड़के की मां ने अपनी शिकायत में कहा कि लड़की उनके नाबालिग बेटे का यौन शोषण कर रही है। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए रामापुरम पुलिस महिला की बताई हुई जगह पर पहुंची। लड़की और उसका नाबालिग प्रेमी पुलिस को घर में ही मौजूद मिले। हालांकि दोनों मे खुद बाहर आने से मना कर दिया। जिसके बाद पुलिस ने दरवाजा तोड़कर दोनों को बाहर निकाला।

एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक एर्नाकुलम की रहने वाली महिला को कोट्टायम जिले के जेएफएमसी पाला में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। वहीं, नाबालिग लड़की को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड भेज दिया गया है। कहा जा रहा है कि दोनों (लड़का और लड़की) के बीच रिश्ता फेसबुक के जरिए बना। दोनों अधिकतर समय तक एक-दूसरे के संपर्क में रहते थे।

क्या है पॉस्को एक्ट
बच्चों के साथ होने वाले अपराधों को रोकने के लिए साल 2012 में विशेष कानून बनाया गया था। यह कानून बच्चों को छेड़खानी, बलात्कार, कुकर्म और यौन शोषण जैसे मामले से सुरक्षा प्रदान करता है। इसे ही पॉस्को एक्ट (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस) कहा जाता है। इस एक्ट के तहत नाबालिग बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराध और छेड़छाड़ के मामलों में कार्रवाई की जाती है। इस कानून के तहत अलग-अलग अपराधों के लिए अलग-अलग सजा तय की गई है। 18 साल के बच्चे के साथ किसी भी तरह का यौन-व्यवहार इस कानून अंतर्गत आता है। यह लड़कियों और लड़कों दोनों को समान रूप से सुरक्षा प्रदान करता है।

– पॉस्को एक्ट की धारा 6 के अधीन वे मामले आते हैं जिनमें बच्चों को दुष्कर्म या कुकर्म के बाद गम्भीर चोट पहुंचाई गई हो। इसमें 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है और साथ ही जुर्माना का भी प्रावधान है।
– पॉस्को अधिनियम की धारा 7 और 8 के तहत वो मामले पंजीकृत किए जाते हैं जिनमें बच्चों के गुप्तांग से छेडछाड़ की जाती है। इसके धारा के आरोपियों पर दोष सिद्ध हो जाने पर पांच से सात साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है।
– पॉस्को कानून की धारा 3 के तहत पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट को भी परिभाषित किया गया है। जिसमें बच्चे के शरीर के साथ किसी भी तरह की हरकत करने वाले शख्स को कड़ी सजा का प्रावधान है।

 

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