सुप्रीम कोर्ट ने यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) के रेगुलेशन, 2026 पर गुरुवार को रोक लगा दी है। साथ ही सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि ये नियम कई सारे सवाल खड़े कर रहे, जिनका समाधान न होने पर बहुत व्यापक परिणाम होगा, समाज का बंटवारा हो जाएगा। इस फैसले का मोदी सरकार के मंत्री गिरिराज सिंह ने स्वागत किया।
मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी किया।
‘रोक लगाने पर हार्दिक आभार’
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने स्वागत किया और फिर डिलीट कर दिया, डिलीट किए गए ट्विट में गिरिराज सिंह ने कहा, “सनातन को बांटने वाले यूजीसी के नियम पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने पर हार्दिक आभार। यह निर्णय भारत की सांस्कृतिक एकता और सनातन मूल्यों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण है। मोदी सरकार की पहचान सबका साथ, सबका विकास और सनातन की अखंड एकता की है।” हालांकि बाद में यह ट्वीट उन्होंने डिलीट कर दिया और पीएम मोदी और अमित शाह का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने लिखा, “आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं माननीय गृह मंत्री नरेंद्र का हार्दिक आभार। यूजीसी नियम पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक से देश के विद्यार्थियों, शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों को बड़ी राहत मिली है। मोदी सरकार की पहचान सबका साथ, सबका विकास तथा एकता के साथ न्याय, संतुलन व संवैधानिक मूल्यों की दृढ़ रक्षा।”
यह फैसला खुशी की बात है- केशव मौर्य
इस मुद्दे को लेकर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, सुप्रीम कोर्ट का कोई भी फैसला खुशी की बात है।
आदेश पर कोई उंगली नहीं उठा सकता- राजभर
इधर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओपी राजभर ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कोई उंगली नहीं उठा सकता। आज सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई है। सभी का हक है कि सुप्रीम कोर्ट में अपनी आवाज उठाएं। राज्य और केंद्र सरकारें संविधान का पालन कर रही हैं। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर कोई उंगली नहीं उठा सकता।”
क्या बोले अखिलेश यादव?
वहीं, यूजीसी दिशानिर्देश 2026 पर रोक लगाने के बाद समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा, “हम सभी मानते हैं कि दोषियों को बख्शा नहीं जाना चाहिए और निर्दोष लोगों को अन्याय का सामना नहीं करना चाहिए।”
सीजीआई ने हमारे दलीलों की सराहना की- याचिकाकर्ता
इधर यूजीसी नियमों पर रोक लगने के बाद याचिकाकर्ता और वकील विनीत जिंदल ने कहा, “आज सीजीआई ने हमारी दलीलों की सराहना की। यह हमारे लिए एक बहुत बड़ी जीत है। जैसा कि हम विशेष रूप से तीन मुद्दों पर बात कर रहे थे, पहला है धारा 3सी, जो जातिगत भेदभाव की बात करती है और उस विशेष धारा में सामान्य जाति को बाहर रखा गया है और अन्य सभी जातियों को शामिल किया गया है। इसलिए, यह विशेष धारा यह संदेश दे रही है कि सामान्य जाति द्वारा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के साथ भेदभाव किया जा रहा है। यही हमारी चीफ जस्टिस के समक्ष दलील थी और उन्होंने हमारी दलीलों की सराहना की और विशेष रूप से कहा कि हम जो कह रहे हैं वह सही है और यदि ऐसी धाराएं हैं, तो यह निश्चित रूप से सामान्य जाति के लिए बहुत कठोर और भेदभावपूर्ण होंगी और इसमें संशोधन किया जाना चाहिए।”
आगे उन्होंने कहा, “दूसरा मुद्दा इन नए यूजीसी सेक्शन की धारा 18 के तहत गठित समता समिति से संबंधित है। इन विशेष नियमों में सामान्य समुदाय के लिए कोई विशिष्ट अभ्यावेदन उद्धृत नहीं किया गया है। चीफ जस्टिस ने हमारी इस दलील को भी स्वीकार किया और सुझाव दिया कि एक विशिष्ट समिति का गठन किया जाना चाहिए जिसमें शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हों जिन्हें इन विषयों का ज्ञान हो। यह एक विशेष विषय है और अब इस मामले की सुनवाई 19 मार्च को होगी और उम्मीद है कि कुछ अच्छा होगा।” आगे पढ़िए UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, केंद्र से मांगा जवाब
