पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच सरकार ने ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। कीमतों में 2 से 3 रूप का इजाफा किया गया है। इस फैसले ने आम जनता की जेब पर अतिरिक्त भार डाल दिया है। सरकार के फैसले की आलोचना हो रही है। इस बीच गिग और प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन ने इस फैसले के विरोध में 16 मई को दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक देशव्यापी ऐप-आधारित सेवाओं के बंद का आह्वान किया है।
यूनियन की मांग है कि डिलीवरी और राइड-हेलिंग वर्कर्स के लिए प्रति किलोमीटर सेवा दर बढ़ाई जाए। यूनियन अध्यक्ष सीमा सिंह ने ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी को गिग वर्कर्स पर “सीधा हमला” बताया। उन्होंने कहा कि स्विगी, जोमैटो और ब्लिंकिट जैसे प्लेटफॉर्म्स पर काम करने वाले कर्मचारियों की कमाई पर इसका गंभीर असर पड़ेगा।
यूनियन ने प्रति किलोमीटर न्यूनतम 20 रुपये भुगतान की मांग की है। उनका कहना है कि लगातार बढ़ती पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतें और भीषण गर्मी की स्थिति कई गिग वर्कर्स को इस क्षेत्र को छोड़ने पर मजबूर कर सकती हैं।
गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति में आ रही दिक्कतों के बीच भारत सरकार ने शुक्रवार को देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का एलान किया है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तीन-तीन रुपये का इजाफा किया गया है। साथ ही सीएनजी के भी दाम में बढ़ोतरी की गई है। सीएनजी के दाम 2 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ा दिए गए हैं।
कीमतों में बढ़तरी के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 3.14 रुपये बढ़कर 97.77 रुपये प्रति लीटर हो गई है जबकि डीजल 3.11 रुपये महंगा होकर 90.67 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। वहीं, सीएनजी की नई कीमत 79.09 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है।
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पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच इस बात की आशंका पहले से जताई जा रही थी कि तेल और गैस की कमी की वजह से आने वाले दिनों में जरूरी वस्तुओं की महंगाई बढ़नी तय है। खासतौर पर रसोई गैस की किल्लत की वजह से आम लोगों के सामने कैसी परिस्थितियां पैदा हुई हैं, यह सब जानते हैं। इस दौरान देश में ईंधन, बिजली और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की वजह से थोक महंगाई दर अप्रैल में 8.3 फीसद दर्ज की गई, जो मार्च में 3.88 फीसद थी। साफ है कि घरेलू बाजार पर अब अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर पड़ना शुरू हो चुका है। पूरी खबर पढ़ें…
