scorecardresearch

गाजियाबादः बनारस सीरियल ब्लास्ट मामले के आरोपी वलीउल्लाह को फांसी, ताबड़तोड़ किए धमाकों में हुई थी 18 की मौत

यूपीः बनारस के वकीलों ने वलीउल्लाह की पैरवी करने से मना कर दिया था। हाईकोर्ट के आदेश पर 24 दिसंबर 2006 को यह मामला सुनवाई के लिए गाजियाबाद स्थानांतरित हुआ था।

Banaras serial blasts, Waliullah, Sentenced to death, Ghaziabad, Ghaziabad session court, 18 died in the blasts
बनारस का प्रसिद्ध संकट मोचन मंदिर। (एक्सप्रेस फोटो)

2006 में बनारस के सीरियल ब्लास्ट मामले में दोषी करार दिए गए आतंकी वलीउल्लाह को सेशन जज जितेंद्र कुमार सिन्हा की अदालत ने फांसी की सजा सुनाई। गाजियाबाद की कोर्ट ने शनिवार को वलीउल्लाह को दोषी करार दिया था। धमाकों में 18 लोगों की मौत हुई थी जबकि 50 घायल हुए थे।

बनारस के वकीलों ने वलीउल्लाह की पैरवी करने से मना कर दिया था। उसके बाद हाईकोर्ट ने 24 दिसंबर 2006 को यह मामला गाजियाबाद स्थानांतरित कर दिया था। सेशन कोर्ट में इस मामले की सुनवाई लगातार की जा रही थी। वलीउल्लाह प्रयागराज का रहने वाला है।

ध्यान रहे कि सात मार्च 2006 को बनारस में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। पहला धमाका शाम सवा 6 बजे संकटमोचन मंदिर में हुआ था। इसमें सात लोग मारे गए थे जबकि 26 घायल हुए थे। इसके 15 मिनट के बाद यानि साढ़े 6 बजे दशाश्वमेध घाट थाना क्षेत्र में जम्मू रेलवे फाटक की रेलिंग के पास कुकर बम मिला था। पुलिस की मुस्तैदी के चलते यहां विस्फोट होने से बचा गया था। धमाका होता तो कई लोगों की जान जाती।

सात मार्च को ही 6.35 बजे कैंट रेलवे स्टेशन के वेटिंग रूम के सामने धमाका हुआ था। संकट मोचन और कैंट के धमाकों में कुल 18 लोगों की जान गई जबकि 100 से ज्यादा जख्मी हुए थे। मामले में पांच अन्य आतंकियों के नाम सामने आए थे। एक आतंकी मोहम्मद जुबैर कश्मीर में मारा जा चुका है। जबकि तीन आतंकी जकारिया, मुस्तकीम और वशीर देश छोड़कर बांग्लादेश भाग चुके हैं।  

संकटमोचन व दशाश्वमेध घाट के मामलों में हत्या, हत्या का प्रयास के साथ आतंकी गतिविधि के आरोप में अदालत आतंकी वलीउल्लाह को पहले ही दोषी करार दे चुकी थी। कैंट रेलवे स्टेशन धमाके में साक्ष्यों के अभाव में उसे बरी कर दिया गया था। सोमवार को गाजियाबाद कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान बेहद सतर्कता बरती गई। फैसले के दौरान अदालत में सुरक्षा के कड़े इंतेजाम किए गए थे। डॉग स्क्वाड के जरिए अदालत परिसर की तलाशी आखिर तक चलती रही। दोनों पक्षों के वकीलों की मौजूदगी में ये फैसला सुनाया गया। मीडिया को भी बाहर ही रोक दिया गया था।

पढें राष्ट्रीय (National News) खबरें, ताजा हिंदी समाचार (Latest Hindi News)के लिए डाउनलोड करें Hindi News App.

X