गाजियाबाद पुलिस ने बच्चा बेचने वाले रैकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने बताया किस तरह से गाजियाबाद में गरीब परिवारों को टारगेट किया जाता है और उनके बच्चों को बेचने के लिए मजबूर किया जाता था। पुलिस ने लोकल इंटेलिजेंस और सीसीटीवी के जरिए ये बड़ी कामयाबी हासिल की है। अब उसी मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। ऐसे ही एक मामले में बच्चे के पैदा होने से पहले ही उसके माता-पिता उसे बेचने के बारे में सोच रहे थे और खरीदार आंध्र प्रदेश के थे। माता-पिता मजदूरी करते हैं।

हालांकि मई में नवजात को देखकर माता-पिता का दिल पिघल गया। पुलिस ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उन्होंने बच्चा बेचने के लिए उनका पीछा कर रहे लोगों को मना कर दिया। 11 दिन बाद पूजा नाम की एक महिला, जो माता-पिता का पीछा कर रहे लोगों में से एक थी, उसने कथित तौर पर 26 मई को उसके घर से बच्ची को किडनैप कर लिया और बच्ची को मनोज नाम के एक दूसरे आरोपी को सौंप दिया।

ट्रॉनिका सिटी पुलिस ने बच्ची को बचाया

अधिकारियों ने बताया कि इस महीने की शुरुआत में ट्रॉनिका सिटी पुलिस ने बच्ची को बचाया और पूजा और मनोज के साथ 11 अन्य लोगों को गिरफ्तार किया।आरोपियों ने बच्ची को पूजा कॉलोनी से किडनैप किया था और उसे तीन अन्य लोगों को सौंपने वाले थे। गैंग ने बच्ची को आंध्र प्रदेश ले जाकर राजू और दीप्ति नाम के एक दंपति को बेचने की योजना बनाई थी।

शुक्रवार को पुलिस ने गाजियाबाद के ट्रॉनिका सिटी से तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनकी पहचान 29 वर्षीय तरन्नुम, 33 वर्षीय अनिल लकड़ा, और 49 वर्षीय करुण के तौर पर हुई है। अधिकारियों ने बताया कि यह कथित सिंडिकेट दिल्ली-NCR में काम करता था और अपने नेटवर्क के ज़रिए ऐसे माता-पिता की पहचान करता था जिनकी आर्थिक हालत खराब थी और जो बच्चे की उम्मीद कर रहे थे। अधिकारियों के मुताबिक आरोपियों ने कथित तौर पर पूरे देश में नए जन्मे बच्चों को बेचा, लेकिन उनके खरीदार ज़्यादातर तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में थे।

WhatsApp पर करते थे बात

आरोपी अनिल और करुण ने बताया कि वे तरन्नुम और सिंडिकेट के एक और सदस्य प्रदीप के जरिए गैंग में शामिल हुए थे। उन्होंने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि वे ऐसे परिवारों से संपर्क करेंगे, उन्हें पैसे का लालच देंगे, और WhatsApp (उनका रेगुलर बातचीत का ज़रिया है) के जरिए गैंग के दूसरे सदस्यों के साथ जानकारी शेयर करेंगे। पुलिस ने कहा, “एक बार काम पूरा हो जाने के बाद, वे WhatsApp मैसेज डिलीट कर देते थे।”

रैकेट चलाने के अलावा आरोपी माता-पिता को पेमेंट करते समय नकली नोट का भी इस्तेमाल करते थे। एक अधिकारी ने कहा, “बच्चे के जन्म के बाद, उन्होंने कुछ असली नोटों के साथ नकली नोट मिलाकर पैसे किडनैप हुए बच्चे के माता-पिता को दे दिए। जब तक माता-पिता को पता चलता कि नोट नकली हैं, तब तक गैंग बच्चे को लेकर भाग चुका होता था।” उन्होंने यह भी कहा कि क्योंकि माता-पिता ने खुद बच्चे के बदले पैसे लिए थे, इसलिए वे गैंग के खिलाफ शिकायत करने से डर रहे थे।

आरोपियों के पास से 2,500 रुपये के नकली नोट और चार मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। इस महीने की शुरुआत में दिल्ली पुलिस ने भी नॉर्थवेस्ट दिल्ली के बेगमपुर में एक डॉक्टर के क्लिनिक से चल रहे ऐसे ही एक रैकेट का भंडाफोड़ किया था।

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