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गाजियाबाद मामले पर ट्विटर का एक्शन, 50 ट्वीट किए प्रतिबंधित, उधर, राना अयूब को बांबे HC से राहत

गाजियाबाद पुलिस ने एक बुजुर्ग व्यक्ति के साथ मारपीट के सिलसिले में ट्वीट करने पर ट्विटर, ट्विटर कम्युनिकेशंस इंडिया के साथ-साथ मोहम्मद जुबैर और राणा अयूब सहित पत्रकारों पर मामला दर्ज किया है।

बम्बई उच्च न्यायालय ने पत्रकार राणा अय्यूब को ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी। (twitter/rana)

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के लोनी में एक बुजुर्ग मुस्लिम शख्स के साथ कथित मारपीट के मामले में ट्विटर ने एक्शन लेते हुए 50 ट्वीट्स पर रोक लगा दी है। ट्विटर अधिकारियों के मुताबिक, अब्दुल समद सैफी पर कथित हमले और उनकी दाढ़ी काटने वाले वीडियो से संबंधित ट्वीट्स पर पहुंच से रोक दी गई है।

ट्विटर ने एक बयान में कहा, “जैसा कि हमारी कंट्री विदहेल्ड पॉलिसी में बताया गया है, वैध कानूनी मांग के जवाब में या स्थानीय कानून के उल्लंघन के मामले में, कंटेंट तक पहुंच को रोकना जरूरी हो सकता है। विदहोल्डिंग उस विशेष क्षेत्र/देश तक सीमित है, जहां कंटेंट को अवैध माना गया है। हम अकाउंट्स को सीधे सूचित करते हैं ताकि उन्हें पता चले कि हमें अकाउंट से संबंधित कानूनी आदेश प्राप्त हुआ है।”

गाजियाबाद पुलिस ने एक बुजुर्ग व्यक्ति के साथ मारपीट के सिलसिले में ट्वीट करने पर ट्विटर, ट्विटर कम्युनिकेशंस इंडिया के साथ-साथ मोहम्मद जुबैर और राणा अयूब सहित पत्रकारों पर मामला दर्ज किया है। वहीं इस मामले में बॉम्बे उच्च न्यायालय ने राणा अय्यूब को चार सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दे दी।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने अय्यूब के खिलाफ सोशल मीडिया पर उस वीडियो को कथित तौर पर प्रसारित करने के लिए प्राथमिकी दर्ज की थी जिसमें एक बुजुर्ग मुस्लिम व्यक्ति ने दावा किया था उसे पीटा गया और उनसे ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने के लिए कहा गया। पुलिस ने अपनी प्राथमिकी में दावा किया कि वीडियो सांप्रदायिक अशांति पैदा करने के लिए प्रसारित किया गया था।

उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद के लोनी बॉर्डर पुलिस थाने में भारतीय दंड संहिता की धाराओं 153 (दंगा भड़काने के इरादे से उकसाना), 153ए (धर्म, वर्ग आदि के आधार पर समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 295 ए (किसी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वास का अपमान करके उसकी धार्मिक भावनाओं को आहत करने के इरादे से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य करना), 120बी (आपराधिक साजिश) और अन्य के प्राथमिकी दर्ज की गई है।

अय्यूब के वकील मिहिर देसाई ने सोमवार को न्यायमूर्ति पी डी नाइक की एकल पीठ को बताया कि आवेदक एक पत्रकार है जिसने अपने ट्विटर हैंडल से वीडियो को केवल ‘फॉरवर्ड’ किया था। देसाई ने कहा, ‘‘जब 16 जून को उन्हें पता चला कि वीडियो की सामग्री सही नहीं है, तो उन्होंने उसे हटा दिया।’’ उन्होंने कहा कि जिन अपराधों के तहत अय्यूब पर मामला दर्ज किया गया है, उन सभी में केवल तीन साल तक की जेल की सजा हो सकती हैं और इसलिए, उन्हें राहत पाने के लिए उत्तर प्रदेश में संबंधित अदालत से संपर्क करने का समय दिया जाना चाहिए।

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