Nashik TCS Case: राष्ट्रीय महिला आयोग ने सोमवार को टीसीएस नासिक में कथित यौन उत्पीड़न मामले पर एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें POSH अधिनियम के गंभीर उल्लंघनों को उजागर किया गया है। साथ ही, वर्कप्लेस को बेहद हानिकारक बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यूथ और Gen Z महिलाओं को आरोपियों ने यौन और धार्मिक उत्पीड़न का शिकार बनाया।
रिपोर्ट में कहा गया है, “वर्कप्लेस पर यौन उत्पीड़न और सत्ता के दुरुपयोग से भरा एक बेहद परेशान करने वाला और टॉक्सिक माहौल था। आरोपी व्यक्तियों ने टीसीएस, नासिक पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया था। वे कम उम्र की और कमजोर लड़कियों को निशाना बनाते थे और उन्हें यौन, भावनात्मक और मानसिक रूप से परेशान करते थे। रिपोर्ट में कहा गया है, “शिकायतकर्ताओं का वास्तव में यौन उत्पीड़न किया गया और आरोपी व्यक्तियों ने उनके साथ छेड़छाड़ करने की कोशिशें भी कीं।”
मुख्य आरोपी को हिरासत में लिखा गया
मुख्य आरोपी को पिछले हफ्ते पुलिस हिरासत में लिया गया था। उसे नासिक रोड कोर्ट में पेश किया जा रहा है। रिपोर्ट में आगे यह भी सामने आया कि आरोपी ने कथित तौर पर पीड़ितों के धर्म के साथ-साथ पौराणिक कथाओं, मान्यताओं, परंपराओं और रीति-रिवाजों का भी अपमान किया और लड़कियों पर यह बात बिठाने की कोशिश की कि इस्लाम, हिंदू धर्म से कहीं ज्यादा श्रेष्ठ धर्म है।
रिपोर्ट में कहा गया, “आरोपी हिंदू पौराणिक कथाओं, मान्यताओं, परंपराओं और रीति-रिवाजों को नीचा दिखाकर महिला कर्मचारियों को परेशान करता था और लड़कियों पर यह जोर डालता था कि इस्लाम, हिंदू धर्म से कहीं ज्यादा बेहतर धर्म है। आरोपी हिंदू धर्म की आस्था को अपमानित करने और उसे कमतर दिखाने में लगा रहता था और महिला कर्मचारियों को निशाना बनाकर बार-बार धर्म-विरोधी बातें कहकर एक दबाव वाला माहौल बनाता था।”
सीसीटीवी कैमरे तो थे, लेकिन काम नहीं कर रहे थे- रिपोर्ट
रिपोर्ट में आगे कहा गया, “कई पीड़ितों ने बताया कि युवा कर्मचारी (GEN Z) इस तरह की धर्म-विरोधी बातों से आसानी से प्रभावित हो जाते थे। सुरक्षा में कमियां, यह देखा गया कि सीसीटीवी कैमरे तो लगे थे, लेकिन वे काम नहीं कर रहे थे।” रिपोर्ट में पाया गया कि नासिक यूनिट में POSH व्यवस्था ज्यादातर बेअसर और काम न करने वाली थी, इसके नियमों के पालन और लागू करने में गंभीर कमियां थीं, जिससे पीड़ितों के लिए शिकायत दर्ज कराना और भी मुश्किल हो गया था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि POSH के किसी भी सदस्य ने नियमों के पालन की जांच करने के लिए नासिक ऑफिस का दौरा या निरीक्षण कभी नहीं किया था। वर्कप्लेस में इस कानून के तहत जरूरी बुनियादी चीजों की कमी थी, जैसे कि डिस्प्ले बोर्ड, पोस्टर या नोटिस, जो कर्मचारियों को POSH के नियमों, आईसी सदस्यों की जानकारी या सेक्शन 19 के तहत नियमों का पालन न करने पर होने वाली सजा के बारे में बताते हों।
देवेंद्र फड़नवीस को सौंपी गई रिपोर्ट
रिपोर्ट में कहा गया है, “कमेटी टीसीएस की POSH कमेटी/IC कमेटी के सदस्यों द्वारा दिखाई गई असंवेदनशीलता को देखकर हैरान थी। वे POSH कानून के सेक्शन 19(C) के आदेश का पालन करने में पूरी तरह से नाकाम रहे थे। टीसीएस नासिक में काम करने वाली महिला कर्मचारियों के प्रति उनमें कोई सहानुभूति या हमदर्दी नहीं थी। यह बात बिल्कुल साफ है कि संगठन की ओर से की गई यह लापरवाही सिर्फ नियमों के पालन में कमी नहीं थी, बल्कि यह शासन-प्रशासन में भी एक बड़ी कमी थी।” बता दें कि यह रिपोर्ट महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस को सौंप दी गई है।
निदा खान गिरफ्तार
नासिक की टीसीएस कंपनी में धर्मांतरण मामले में आरोपी निदा खान को संभाजीनगर से गिरफ्तार कर लिया गया है। यह कार्रवाई नासिक और छत्रपति संभाजीनगर शहर पुलिस के संयुक्त अभियान में की गई। पढ़ें पूरी खबर…
