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पाकिस्तान से स्वदेश लौटी गीता, महतो परिवार को पहचानने से किया इंकार

पाकिस्तान से 15 साल बाद गीता के लौटने से प्रसन्न बिहार के महतो परिवार के हाथ निराशा लगी क्योंकि गीता ने उन्हें पहचानने से इंकार कर दिया...

Author नई दिल्ली | October 27, 2015 12:54 AM
पाकिस्तान में दशक भर से ज्यादा वक्त गुजारने के बाद गीता इसी साल 26 अक्तूबर को भारत लौटी। (फाइल फोटो-पीटीआई)

मूक बधिर लड़की गीता पाकिस्तान में 14 वर्ष बिताकर सोमवार को स्वदेश लौट आयी और उसका यहां भव्य स्वागत किया गया। यद्यपि वह उस परिवार के सदस्यों को नहीं पहचान पायी जिन्हें उसने उनकी तस्वीर देखकर पहचाना था। हालांकि सरकार ने गीता को स्वदेश आने की इजाजत देने के लिए पाकिस्तान को ‘‘तहे दिल से’’ धन्यवाद दिया।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने गीता के स्वदेश लौटने के बाद उससे मुलाकात करने के बाद इसे ‘‘खुशी वाला दिन’’ बताया। उन्होंने कहा कि सरकार उसे उसके परिवार से मिलाने के लिए सब कुछ करेगी।

गीता को अपनी पुत्री बताने वाले बिहार के महतो परिवार के सदस्यों ने उससे सुषमा की मौजूदगी में मुलाकात की। गीता ने उन्हें पहचानने से इनकार कर दिया, यद्यपि उसने उन्हें तब उनकी तस्वीरों से पहचाना था जब वह कराची में थी।

गीता ने सुषमा की मौजूदगी में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में एक सांकेतिक भाषा की व्याख्या करने वाले की मदद से कहा, ‘‘मैं भारत आकर बहुत खुश हूं। मेरा दिल खुशियों से भर गया है। जिस तरीके से मेरा स्वागत हो रहा है, उससे मैं भावुक हूं, मैं अक्सर बहुत दुखी हो जाती थी।’’

गीता ने लाल और सफेद रंग का सलवार समीज पहना था। गीता 14 वर्ष पहले गलती से पाकिस्तान में प्रवेश कर गई थी। गीता ने कहा कि उसकी प्राथमिकता आत्मनिर्भर बनना है और उसकी विवाह की अभी कोई योजना नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने गीता के हवाले से कहा, ‘‘मेरा दिल हमेशा से भारत में ही रहा है।’’

सुषमा ने कहा कि गीता के डीएनए नमूने की जांच की जा रही है और यदि वह महतो दम्पति से मेल नहीं खाता है तो सरकार उसके अभिभावकों को खोजने की प्रक्रिया नये सिरे से शुरू करेगी। उन्होंने कहा, ‘‘यदि डीएनए का नमूना मेल नहीं खाता है तो वह एक जटिल स्थिति होगी। हम तब गीता से कहेंगे वह अपनी स्मृति का इस्तेमाल करते हुए चीजों को याद करे। हम उसे उनके (महतो दम्पति) साथ बैठाएंगे ताकि वह चीजों को याद कर सके।’’

उन्होंने कहा कि गीता ने जब महतो दम्पति को देखा तो उसने कोई उत्साह नहीं दिखाया। सुषमा ने कहा कि गीता इंदौर स्थित मूक बधिर लोगों के लिए पुनर्वास केंद्र में रहेगी और वहां उसे कौशल विकास प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं ईधी फाउंडेशन को धन्यवाद देती हूं जिसने इतने वर्षों तक उसकी देखभाल की। मैं भारत के लोगों और सरकार की ओर से पाकिस्तान सरकार को गीता की वापसी सुगम बनाने के लिए धन्यवाद देती हूं…यह हमारे लिए एक खुशी का दिन है क्योंकि मासूम गीता इतने वर्षों बाद वापस आयी है।’’

उन्होंने यद्यपि इन सवालों का उत्तर देने से इनकार कर दिया कि क्या गीता की वापसी से भारत और पाकिस्तान के संबंधों को सुधारने में मदद मिलेगी। गीता को ईधी फाउंडेशन की बिलकिस ईधी ने गोद लिया था और वह उनके साथ ही कराची में रही। बिलकिस के अलावा गीता के साथ बिलकिस के पोते…पोती सबा और साद ईधी भी आये हैं।

सुषमा ने ईधी फाउंडेशन की इसके लिए प्रशंसा की कि उसने गीता की धार्मिक आस्था का सम्मान किया और उसके लिए विभिन्न देवी देवताओं की मूर्तियां लाकर दी। गीता की कहानी सलमान खान अभिनीत फिल्म ‘बजरंगी भाईजान’ के रिलीज होने के बाद प्रकाश में आयी थी। उक्त फिल्म में अभिनेता एक पाकिस्तानी बच्ची को उसकी मां से मिलाता है। बच्ची अपनी मां से तब बिछड़ जाती है जब वह भारत यात्रा पर आती है।

महतो ने दावा किया कि गीता उसकी पहली बच्ची है और उसका नाम हीरा था जो 2004 में एक मेले में बिछड़ गई थी। यद्यपि महतो परिवार ने दावा किया कि उसका विवाह हो चुका है और उसका एक बच्चा भी है, लेकिन गीता ने इसे सिरे से खारिज किया।

सुषमा ने कहा, ‘‘हम डीएनए जांच के परिणाम का इंतजार करेंगे। गीता ने महतो परिवार के साथ जाने से इनकार कर दिया और कहा है कि वे उसके अभिभावक नहीं हैं। वह इंदौर में एक पुनर्वास केंद्र में रहेगी। ।’’ उन्होंने कहा कि डीएनए जांच के लिए गीता के रक्त का नमूना ले लिया गया है।

सुषमा ने ईधी फाउंडेशन की बिलकिस बानो की प्रशंसा करते हुए कहा कि गीता के साथ आये संगठन के सभी सदस्यों को राजकीय मेहमान का दर्जा दिया गया है। ईधी फाउंडेशन के सदस्य ताजमहल, अजमेर शरीफ दरगाह के साथ ही दिल्ली स्थित विभिन्न ऐतिहासिक स्थल देखने जा सकते हैं।

सुषमा ने विशेष रूप से बिलकिस की इसके लिए प्रशंसा की कि उन्होंने गीता को पाकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता दी और उसे सभी धार्मिक रस्में करने की इजाजत दी। उन्होंने कहा, ‘‘वह इन वर्षों तक शाकाहारी रही।’’

बिलकिस ने ईधी फाउंडेशन में गीता के रहने के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए कहा, ‘‘मैं अत्यंत प्रसन्न हूं। आज मेरे लिए ईद जैसा दिन है। मुझे गीता के लिए प्रसन्नता है।’’ उन्होंने कहा कि शुरू में गीता बेचैन थी और वह पाकिस्तान से भागना चाहती थी।

बिलकिस ने कहा कि गीता ने ‘‘बजरंगी भाईजान’’ कई बार देखी। बिलकिस ने गीता के हवाले से कहा, ‘‘उसने कहा था कि फिल्म मेरी कहानी को लेकर बनायी गई है लेकिन मुझे वापस नहीं ले जाया गया।’’ बिलकिस के साथ मुलाकात के दौरान सुषमा ने उनसे कहा कि उन्हें गीता के विवाह में बुलाया जाएगा।

सुषमा ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता उन भारतीयों को वापस लाने की है जो वर्षों से पाकिस्तानी जेलों में बंद हैं और जिन्हें मानसिक बीमारी हो गई है। पाकिस्तानी उच्चायोग की इस टिप्पणी कि वह उम्मीद करता है कि भारत 459 पाकिस्तानी कैदियों को उसी ‘‘प्रेम और स्नेह’’ से रिहा करेगा जैसा पाकिस्तान ने गीता के लिए दिखाया है, सुषमा ने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

सुषमा ने यद्यपि कहा कि गीता की वापसी ने दोनों देशों के बीच संबंधों में दोनों देशों के लोगों के बीच सम्पर्क के महत्व को प्रतिबिंबित किया है। उन्होंने कहा कि गीता जैसे कुछ मामले हैं और सरकार ऐसे परिवारों को अपने रिश्तेदारों को वापस लाने में मदद करेगी।

कराची में पाकिस्तान एयरलाइंस के विमान में सवार होने से पहले गीता ने पाकिस्तान के लोगों का उसकी देखभाल करने के लिए धन्यवाद दिया। ईधी फाउंडेशन के फैजल ने कराची में संवाददाताओं से कहा कि वे सोशल मीडिया के जरिये गीता के सम्पर्क में रहेंगे और उससे मिलने भी जाएंगे। उन्होंने कहा, ‘‘वह वास्तव में हमसे बिछुड़ नहीं रही है।’’

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