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अब IAS बनाम IA&AS की लड़ाई! गिरीश चंद्र मुर्मू को CAG बनाने पर ऑडिटिंग सेवा के अफसरों ने खोला मोर्चा

सरकार पर जीसी मुर्मू को ऐसे वक्त कैग प्रमुख बनाया है, जब IA&AS के 1983 बैच के अधिकारी और डिप्टी कैग वी.रविंद्रन, रॉय एस. मथरानी और सुधा कृष्णन डेप्युटेशन पर स्पेश कमीशन में काम कर रहे हैं।

gc murmu cag ias vs ia&asजम्मू कश्मीर के पूर्व उप-राज्यपाल जीसी मुर्मू को सरकार ने कैग प्रमुख नियुक्त किया है।

जम्मू कश्मीर के पूर्व उप-राज्यपाल और 1985 बैच के आईएएस अधिकारी जीसी मुर्मू को सरकार ने CAG (Comptroller and Auditor General) नियुक्त किया है। हालांकि इस नियुक्ति के बाद IAS (Indian Administrative Service) और IA&AS (Indian Audit and Accounts Service) सेवाओं के बीच की नाराजगी उभर गई है। दरअसल इस नियुक्ति से एक बार फिर IA&AS अधिकारियों पर IAS अधिकारी को तरजीह दी गई है। द प्रिंट की एक रिपोर्ट के अनुसार, करीब 6 IA&AS अधिकारियों पर गिरीश चंद्र मुर्मू को तरजीह देते हुए CAG नियुक्त किया गया है।

सरकार पर जीसी मुर्मू को ऐसे वक्त कैग प्रमुख बनाया है, जब IA&AS के 1983 बैच के अधिकारी वी.रविंद्रन, रॉय एस. मथरानी और सुधा कृष्णन डिप्टी कैग के पद पर काम कर रहे हैं और फिलहाल डेप्युटेशन पर स्पेश कमीशन में कार्यरत हैं। वहीं IA&AS के 1984 बैच के तीन अधिकारी और डिप्टी कैग मीनाक्षी गुप्ता और सरोज पुनहानी और गार्गी कौल भी डेप्युटेशन पर रक्षा मंत्रालय में काम कर रहे हैं।

IA&AS के एक अधिकारी का कहना है कि हमारी सर्विस में ऐसी कोई मिसाल नहीं है, जिसमें CAG की नियुक्ति इतने वरिष्ठ अधिकारियों पर तरजीह के बाद हुई है। इसके साथ ही इस बार पूरे 7 साल का जंप देकर कैग की नियुक्ति हुई है, इसे लेकर भी IA&AS अधिकारियों में नाराजगी है। इससे पहले पिछले CAG रहे राजीव महर्षि 1978 और शशिकांत शर्मा 1976 बैच के आईएएस अधिकारी थे।

इससे पहले जब 1972 के बैच के आईएएस अधिकारी विनोद राय को कैग बनाया गया था, तब भी 1971 बैच की IA&AS अधिकारी भारती प्रसाद पर उन्हें तरजीह दी गई थी। बता दें कि आजादी के बाद से अब तक 14 ऑडिटर जनरल नियुक्त किए गए हैं। इनमें से पहले तीन कैग IA&AS सर्विस के अधिकारी ही थे। इसके बाद इस पद पर आईएएस अधिकारी की नियुक्ति की गई। बता दें कि उसके बाद से सिर्फ 1972-1978 तक ही IA&AS सेवा के अधिकारी CAG चुने गए हैं, वरना बाकी समय आईएएस अधिकारी को ही यह जिम्मेदारी मिली हैं।

माना जाता है कि आईएएस अधिकारी अपनी सेवा के दौरान लगातार सरकार, मंत्री और पीएम के संपर्क में रहते हैं, जबकि इसके उलट IA&AS अधिकारी सरकार के संपर्क में नहीं आते हैं और अपनी रिपोर्ट्स तैयार करने में ही बिजी रहते हैं। यही वजह है कि जब CAG की नियुक्ति की बात आती है तो आईएएस अधिकारी को तरजीह दी जाती है। हालांकि संवैधानिक पद होने के चलते इस पद पर सरकार को अपनी मर्जी से नियुक्त करने का पूरा अधिकार है लेकिन IA&AS अधिकारियों की मांग है कि नियुक्ति प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए।

गौरतलब है कि ऑडिटर जनरल को देश का ऑडिटर कहा जाता है और यह सरकार के सभी राजस्व, खर्च आदि पर अपनी नजर रखता है। यही वजह है कि इसे बहुत ही ताकतवर संस्था माना जाता है।

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