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…तब गौरी लंकेश ने कहा था- मेरा महिला होना ही मेरी सुरक्षा है

पत्रकार गौरी लंकेश की तीन हमलावरों ने उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या की दी।

गौरी लंकेश की हत्या के बाद कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। (Photo Source: AP)

कर्नाटक की 55 वर्षीय पत्रकार गौरी लंकेश की तीन हमलवारों ने उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी। उनकी मौत के बाद जिस तरह सोशल मीडिया पर उन्हें लेकर अपशब्दों का प्रयोग किया गया और कुछ लोगों ने जिस तरह उस पर “खुशी” जाहिर की है उससे एक नई बहस छिड़ गयी है कि क्या देश में एक नई संस्कृति विकसित हो रही है? मृतक को गाली देने और हत्याओं का जश्न मनाने की संस्कृति? विडंबना ये है कि खुद गौरी लंकेश ने करीब 17 साल पहले दिए एक इंटरव्यू में खुद के महिला होने को फायदेमंद बताया था क्योंकि उनके अनुसार महिलाओं के संग कोई गालीगलौज नहीं कर सकता।

मार्च 2000 में रेडिफ डॉट कॉम पर प्रकाशित इस इंटरव्यू से कुछ महीने पहले ही गौरी ने अपने पिता पी लंकेश के देहांत के बाद कन्नड़ में छपने वाली “लंकेश पत्रिका” का संपादक के तौर पर कार्यभार संभाला था। उससे पहले वो अंग्रेजी पत्रकारिता से जुड़ी हुई थीं। गौरी के भाई लंकेश पत्रिका के प्रकाशक थे। पी लंकेश की साप्ताहिक पत्रिका अपनी सत्ताविरोधी और बेबाकी के लिए जानी जाती थी।  जब रेडिफ ने गौरी लंकेश से पूछा कि “आपको पिता को जान से मारने की धमकियां मिला करती थीं, मुकदमे किये जाते थे और उन्हें बदनाम किया जाता था, वो सब सहते हुए काम करते रहे, आप अकेली महिला होकर ऐसे दबाव में कैसे काम करेंगी?” इस पर गौरी लंकेश ने जवाब दिया, “मेरे पिता पर जितने लोग मुकदमे करते थे उससे कहीं ज्यादा लोग ऐसा नहीं करते थे क्योंकि उन्हें पता था कि वो सहीं हैं।”

गौरी लंकेश ने आगे कहा, “मुझे लगता है कि ऐसे हालात में महिला होना थोड़ा फायदेमंद है क्योंकि जब हमारा कोई रिपोर्टर किसी ऐसे नेता से मिलता जो मेरे पिता से नाराज होता था तो वो मेरे पिता को गाली देने लगता था। लेकिन वो एक महिला को गाली देंगे तो वो समाज में अपनी इज्जत और मर्यादा अपने आप खो देंगे! इसलिए इस वक्त महिला होना मेरे लिए एक ढाल है।”

जब गौरी लंकेश से पूछा गया कि भले ही महिला होने के कारण उनके संग गाली-गलौज न हो लेकिन क्या उन्हें शारीरिक हमले का डर नहीं लगता, क्योंकि उनके पिता पर कई बार हमले हो चुके थे? इस पर उन्होंने कहा था, “मुझे शारीरिक हमले का डर नहीं लगता। एक पखवाड़े पहले तक मैं कई बार रात को तीन बजे घर आती थी।  लेकिन मैंने ऐसा करना तब बंद कर दिया जब एक दिन मैंने एक आदमी को आधी रात को सड़क पर साड़ी में ओढ़े लेटे देखा। तब से मैं घर पहुंचने तक अपने ड्राइवर को साथ रखती हूं। इसके अलावा मुझे ब्लैकमेलिंग के फोन भी आते रहते हैं…मैं कहती हूं तुम लोगों को जो छापना हो छापो।” साल 2005 में दोनों के बीच हुए विवाद के बाद गौरी ने अपनी नई पत्रिका “गौरी लंकेश पत्रिका” शुरू की थी।

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