कुल्लू जिले की ऊझी घाटी में इन दिनों रसोई सिलेंडरों की भारी किल्लत ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। घाटी के दूरस्थ इलाकों में आपूर्ति बाधित होने के कारण ग्रामीणों के घरों और व्यावसायिक होटलों में रसोई का काम लगभग ठप हो गया है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि लोग एक बार फिर लकड़ी के चूल्हों और पारंपरिक ईंधन पर निर्भर होने को मजबूर हैं।
बवाफोला निवासी शेर सिंह ने बताया कि रसोई गैस न मिलने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं अब लकड़ी जुटाने के काम में लग गई हैं, ताकि परिवार के लिए भोजन का प्रबंध किया जा सके। यह संकट न केवल घरेलू स्तर पर बल्कि पर्यटन व्यवसाय के लिए भी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। गैस किल्लत का सीधा प्रहार कुल्लू-मनाली के पर्यटन व्यवसाय पर पड़ा है।
होटल संचालक अमित के अनुसार गैस की कमी से खाना बनाने में घंटों लग रहे हैं, जिससे न केवल पर्यटक नाराज हो रहे हैं बल्कि होटलों को अपना ‘मेन्यू’ भी सीमित करना पड़ा है। इस संकट के बीच भारत गैस मनाली के संचालक देवेंद्र नेगी ने कहा कि एजेंसी की ओर से पिछले एक माह से लगातार आपूर्ति जारी है, लेकिन कुछ लोगों की ओर से की जा रही सिलेंडरों की जमाखोरी इस किल्लत की मुख्य वजह बनी हुई है। प्रशासन और एजेंसी अब इन जमाखोरों पर नकेल कसने की तैयारी में हैं ताकि आम जनता और पर्यटन उद्योग को इस समस्या से राहत मिल सके।
गैस सिलेंडर के लिए एजेंसियों में भीड़ न लगाएं उपभोक्ता
हिमाचल प्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम लिमिटेड मंडी के क्षेत्रीय प्रबंधक संजीव वर्मा ने प्रदेश के समस्त रसोई गैस व वाणिज्यिक उपभोक्ताओं से आग्रह किया है कि वे गैस रिफिलेंडर प्राप्त करने के लिए गैस एजेंसियों में व्यक्तिगत रूप से न आएं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि निगम उपभोक्ताओं को उनके घर-द्वार पर ही गैस सिलेंडर उपलब्ध करवाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसके लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।
क्षेत्रीय प्रबंधक ने कहा कि अक्सर यह देखा गया है कि कुछ उपभोक्ता अनावश्यक रूप से एजेंसी परिसर में सिलेंडर लेने पहुंच जाते हैं, जिससे वितरण व्यवस्था में बाधा उत्पन्न होती है और अनावश्यक विलंब होता है। उन्होंने जनता से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की घबराहट में न आएं, क्योंकि गैस सिलेंडरों की कोई कमी नहीं है।
