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दाऊद की संपत्‍त‍ि नीलाम: पूर्व पत्रकार ने 4.28 करोड़ में खरीदा रेस्‍तरां तो हिंदू महासभा ने खटारा कार के लिए खर्चे 3.32 लाख

दिल्ली जायका नामक रेस्तरां डांबरवाला बिल्डिंग में दाउद के घर से कुछ ही दूर स्थित है। पहले इसका नाम होटल रौनक अफरोज था।

Author मुंबई | December 10, 2015 1:09 AM
मुंबई के जिस होटल डिप्‍लोमैट में दाऊद की प्रॉपर्टी नीलाम हुई, वहां तैनात एक जवान। (Source: Express photo by Vasant Prabhu)

दक्षिण मुंबई में एक समय अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहीम के मालिकाना हक में रहा एक रेस्तरां, उसकी हरी सीडान कार और उपनगर माटुंगा में एक संपत्ति किराए पर देने के अधिकारों की बुधवार को नीलामी हुई। नीलामी में एक पूर्व पत्रकार ने रेस्तरां के लिए 4.28 करोड़ रुपए की सबसे अधिक बोली लगाई, जबकि डॉन के साथी छोटा शकील की तरफ से उन्हें ऐसा नहीं करने की धमकी मिली थी।

महाराष्ट्र के बाहर दाऊद के स्वामित्व वाली चार अन्य संपत्तियों की भी नीलामी की गई। हालांकि इन संपत्तियों का और उनके लिए बोली लगाने वालों का ब्योरा नहीं मिला। पत्रकारिता से समाजसेवा में आए एस बालाकृष्णन ने रेस्तरां के परिसर में गरीब बच्चों के लिए एक कंप्यूटर शिक्षा केंद्र शुरू करने की योजना बनाई है।

एनजीओ ‘देश सेवा समिति’ चलाने वाले बालाकृष्णन ने दक्षिण मुंबई के होटल डिप्लोमेट में एक घंटे तक चली नीलामी में बोहरा समुदाय के दुरहानी ट्रस्ट को पीछे छोड़ दिया। दाऊद की हुंडै एसेंट कार की बोली हिंदू महासभा ने 3.32 लाख रुपए में लगाई। हरे रंग की सीडान कार पिछले चार साल से घाटकोपर में एक सरकारी सोसायटी में खड़ी है और बुरी हालत में है जिसके टायर फट गए हैं और शीशे टूटे हुए हैं।

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बालाकृष्णन के अलावा बोली लगाने वालों में दिल्ली के वकील अजय श्रीवास्तव और हिंदू महासभा के अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि थे। हालांकि माटुंगा की महावीर बिल्डिंग में दाऊद के कमरे को किराए पर देने के अधिकार पाने वाले का पता नहीं है। दिल्ली जायका नामक रेस्तरां डांबरवाला बिल्डिंग में दाऊद के घर से कुछ ही दूर स्थित है जिसका नाम पहले होटल रौनक अफरोज था।

बालाकृष्णन ने पत्रकारों से कहा, ‘मेरा एनजीओ भिंडी बाजार के कमजोर महिलाओं और बच्चों को कंप्यूटर सिखाने में मदद के लिए इस संपत्ति को खरीदना चाहता है। इससे समाज में लोगों की मदद होगी और दाऊद जैसे गैंगस्टरों को कड़ा संदेश जाएगा कि भारतीय लोग उससे डरते नहीं हैं और वह अब देश में और आतंकवाद नहीं फैला सकता’। जब उनसे संपत्ति की कीमत के बारे में पूछा गया जिसका बंदोबस्त उन्हें एक महीने में करना है तो उन्होंने कहा कि वे देश के आम लोगों से पैसा एकत्रित करेंगे।

उन्होंने कहा, ‘मुझे देश के नागरिकों पर पूरा विश्वास है। मैं पूरी तरह उन पर निर्भर हूं। मेरे पास इतना पैसा नहीं है लेकिन भारत की जनता की मदद से एक महीने में बंदोबस्त हो जाएगा’। छोटा शकील से कथित तौर पर मिली धमकी को तवज्जो नहीं देते हुए पूर्व पत्रकार ने कहा, ‘अगर मैं इस प्रक्रिया में शामिल नहीं होता तो मुझे देश के सामने शर्मिंदा होना पड़ता। पाकिस्तान में बैठा कोई शख्स हम पर हुकुम नहीं चला सकता’।

  • यह नीलामी तस्कर और विदेशी मुद्रा विनिमय हेराफेरी (संपत्ति जब्ती) कानून, 1976 के तहत की गई।

दाऊद का डर नहीं:
मेरा एनजीओ यह संपत्ति (पकमोड़िया का रेस्तरां) लेना चाहता है ताकि भिंडी बाजार की वंचित महिलाओं और बच्चों की कंप्यूटर सीखने में मदद की जा सके। इससे समाज के लोगों को मदद मिलेगी और दाऊद जैसे गैंगस्टरों को यह कड़ा संदेश जाएगा कि भारतीय उससे डरते नहीं हैं और अब वह देश में आतंक का खेल और लंबे समय तक नहीं खेल सकता।… एस बालाकृष्णन, दाऊद का रेस्तरां खरीदने वाले पत्रकार

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