पोर्न देखने वालों को पुलिस बन फंसाता था गैंग, लाखों वसूलने वाले रैकेट का भंडाफोड़

आरोपियों ने कथित तौर पर कई लोगों के ठिकानों पर फर्जी पुलिस नोटिस भेजकर उनसे 3,000 रुपये का जुर्माना भरने या कानूनी कार्रवाई का सामना करने को कहा।

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पुलिस का दावा है कि आरोपियों को पकड़ने के लिए उन्होंने तमिलनाडु में एक हफ्ते में 2,000 किमी से अधिक की यात्रा की। (प्रतिकात्मक तस्वीर)

देश में कई तरह के गैंग खुद को पुलिस ऑफिसर बताकर लोगों को फंसाने और उनसे जबरन वसूली के धंधे में लगे हैं। इस खेल में देश के अंदर के अलावा कई बाहरी लोग भी जुटे हैं। पुलिस की जांच में इस रैकेट का खुलासा हुआ। पुलिस ने कंबोडिया और तमिलनाडु से संचालित हाई-टेक जबरन वसूली गिरोह के भारतीय मास्टरमाइंड समेत तीन को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने कथित तौर पर उनके ठिकानों पर फर्जी पुलिस नोटिस भेजकर उनसे 3,000 रुपये का जुर्माना भरने या कानूनी कार्रवाई का सामना करने को कहा।

पुलिस ने कहा कि गिरोह का मास्टरमाइंड कंबोडिया से इसका संचालन करता है। पिछले छह महीनों में गिरोह ने देश भर में हजारों लोगों से 30 लाख रुपये से अधिक की उगाही करने में कामयाब रहा। पुलिस का दावा है कि आरोपियों को पकड़ने के लिए उन्होंने तमिलनाडु में एक हफ्ते में 2,000 किलोमीटर से अधिक की यात्रा की। जबरन वसूली के लिए यूपीआई और क्यूआर कोड का इस्तेमाल किया जा रहा था। पुलिस ने जब जांच शुरू की तो उसे इसमें भारी धोखाधड़ी करने वाले बड़े गैंग का पता चला। इस अनूठी धोखाधड़ी का मास्टरमाइंड कंबोडिया, दक्षिण-पूर्व एशिया में है। पुलिस ने आशंका जताई है कि 20 से ज्यादा खातों के जरिए पैसा क्रिप्टोकरेंसी से देश से बाहर भेजा जाता है।

इस बारे में दिल्ली पुलिस के साइबर सेल के डीसीपी अनियेश रॉय के मुताबिक सोशल मीडिया शिकायत की निगरानी के दौरान यह पाया गया कि कुछ लोगों ने एक नोटिस के बारे में रिपोर्ट की है। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने बताया कि यह नोटिस उन्हें पुलिस मिला है, जिसमें कहा गया था कि वे पोर्नोग्राफी देख रहे थे जो एक प्रतिबंधित गतिविधि है, इसलिए उनके कंप्यूटर की सभी फाइलों को ब्लॉक कर दिया गया है। इसके लिए उन्हें 3000 रुपये का जुर्माना देने के लिए कहा जाता था। पीड़ितों ने यह भी बताया कि उनकी स्क्रीन पर यह मैसेज तब भी आया जब वे वेब ब्राउजर पर कोई भी अश्लील सामग्री नहीं खोज रहे थे।

सोशल मीडिया इनपुट के आधार पर पुलिस ने केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू की। फर्जी पॉपअप नोटिस की तकनीकी जांच से पता चला कि ये विदेश से आ रहे हैं। हालांकि, मनी ट्रेल की जांच में पता चला कि ठगी के पैसे तमिलनाडु में संचालित कई बैंक खातों में जा रहे थे। इसकी जांच के लिए पुलिस की एक टीम तमिलनाडु पहुंची तो वहां कई फर्जी बैंक खातों का पता चला। ये सभी खाते फर्जी पते पर खोले गए थे। पुलिस टीम एक सप्ताह तक चेन्नई, त्रिची, कोयंबटूर, उधगमंडलम और कई अन्य स्थानों के पर जांच पड़ताल करने के बाद स्थानीय मास्टरमाइंड बी. धीनुशांत उर्फ धीनू सहित तीन लोगों को पकड़ लिया।

पुलिस पूछताछ में धीनुशांत ने खुलासा किया कि पूरे गोरखधंधे का तकनीकी हिस्सा यानी फर्जी पुलिस नोटिस भेजना और इंटरनेट उपयोग करने वालों का चुनाव उसका भाई बी चंद्रकांत उर्फ चंद्रू करता है, जो दक्षिण पूर्व एशिया के कंबोडिया की राजधानी नोम पेन्ह के पास वील पोन से काम कर रहा है।

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