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हेरल्ड के बहाने कांग्रेस ने फिर नहीं चलने दी राज्यसभा

नेशनल हेरल्ड मामले की पृष्ठभूमि में कथित बदले की राजनीति के विरोध में कांगे्रस के हंगामे के चलते शुक्रवार को लगातार चौथे दिन भी राज्यसभा की कार्यवाही ठप रही।
Author नई दिल्ली | December 12, 2015 01:59 am

नेशनल हेरल्ड मामले की पृष्ठभूमि में कथित बदले की राजनीति के विरोध में कांगे्रस के हंगामे के चलते शुक्रवार को लगातार चौथे दिन भी राज्यसभा की कार्यवाही ठप रही। हालांंकि ऐसे आसार जरूर दिखे कि अगले हफ्ते गतिरोध दूर हो सकता है। सुबह बैठक शुरू होने पर सभापति हामिद अंसारी ने 13 दिसंबर को संसद पर आतंकवादी हमले की 14वीं बरसी होने का जिक्र किया। सदस्यों ने उस हमले में अपनी जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी और उनके सम्मान में कुछ क्षणों का मौन रखा। इसके बाद कांग्रेस सदस्य आसन के समक्ष आकर सरकार व प्रधानमंत्री के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।
हंगामे के बीच ही राज्यसभा ने भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) विधेयक 2015 को सदन की प्रवर समिति को सौंपने के लिए एक प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। शोरगुल के बीच ही उपसभापति कुरियन ने विशेष उल्लेख के जरिए लोक महत्त्व के विभिन्न मुद्दे सदन के पटल पर रखवाए और हंगामे को देखते हुए बैठक साढ़े 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। एक बार के स्थगन के बाद साढ़े 11 बजे बैठक शुरू होने पर भी कांग्रेस सदस्यों का हंगामा जारी रहा और वे आसन के समक्ष नारेबाजी करने लगे।
हंगामे के बीच ही माकपा के केके रागेश ने त्योहारों के मौसम में विमानन कंपनियों द्वारा किरायों में भारी वृद्धि कर लूट करने का मामला उठाया। शोरगुल जारी रहने के बीच कुरियन ने हंगामा कर रहे सदस्यों से कहा- आप अपने कर्त्तव्य का पालन करने में नाकाम रहे हैं। इसके बाद उन्होंने बैठक 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। दोपहर बारह बजे बैठक शुरू होते ही कांगे्रस के सदस्य आसन के समक्ष आकर नारेबाजी करने लगे। हंगामे के बीच संसदीय कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कुछ कहने का प्रयास किया। किंतु शोरगुल के कारण वे अपनी बात पूरी नहीं कर सके।
हंगामे के बीच सभापति अंसारी ने सदस्यों से पूरक सवाल पूछने को कहा। किंतु हंगामे के कारण यह भी संभव नहीं हो सका। अंतत: हंगामे के चलते उन्होंने बैठक को दोपहर साढ़े बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। बैठक फिर शुरू होने पर सदन में वही नजारा था। हंगामे के चलते सभापति ने बैठक को दोपहर ढाई बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। दोपहर ढाई बजे बैठक शुरू होने पर कानून मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने वाणिज्यिक न्यायालय, हाईकोर्ट वाणिज्यिक प्रभाग और वाणिज्यिक अपील प्रभाग विधेयक, 2015 को वापस ले लिया। गौड़ा ने इसे वापस लेने के लिए प्रस्ताव किया। जिसे सदन ने ध्वनिमत से मंजूर कर लिया।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने वर्ष 2015-16 की अनुपूरक अनुदान मांगों (सामान्य) को दर्शाने वाला विवरण सदल के पटल पर रखा। इसके बाद कांग्रेस के आनंद शर्मा व तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन सहित कई सदस्यों ने शुक्रवार को गैर सरकारी कामकाज का दिन होने के बाद भी कार्यसूची में विधेयकों पर चर्चा की बात प्रस्तावित किए जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि आमतौर पर शुक्रवार को सदन शाम पांच बजे तक चलता है। लेकिन अब इसे छह बजे तक बढ़ा दिया गया है। कई सदस्यों का कहना था कि सांसदों को अपने क्षेत्रों या शहरों में जाना होता है और उनके टिकट पहले से बुक होते हैं।
इस पर सरकार का पक्ष रखते हुए नकवी ने कहा कि गैर सरकारी कामकाज के लिए ढाई घंटे यानी ढाई बजे से लेकर पांच बजे तक का समय निर्धारित है। लेकिन पांच बजे से लेकर छह बजे के बीच के समय में सरकारी विधेयकों पर चर्चा हो सकती है। भाजपा सहित कई दलों के सदस्यों ने सदन की भावना के अनुसार फैसला करने का अनुरोध किया। उपसभापति कुरियन ने भी ढाई बजे से लेकर पांच बजे तक का समय गैर सरकारी कामकाज के लिए निर्धारित होने की बात की और कहा कि उसके बाद छह बजे तक सदन में चर्चा हो सकती है। सदन की भावना का जिक्र करते हुए कुरियन ने कहा कि इसके तहत दोनों ओर सहमति होनी चाहिए लेकिन सरकार सहमत नहीं है।
नकवी ने आरोप लगाया कि विपक्ष का इरादा है कि सरकारी कामकाज नहीं हो, लेकिन अन्य कार्य पर उन्हें कोई एतराज नहीं है। इसी बीच कांग्रेस के सदस्य आसन के समक्ष आकर नारेबाजी करने लगे और कुरियन ने करीब दो बजकर 50 मिनट पर बैठक साढ़े तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी। साढ़े तीन बजे बैठक शुरू होने पर विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने भी जोर दिया कि शुक्रवार को बैठक शाम पांच बजे तक ही होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सांसदों को खासकर दक्षिण और पूर्वोत्तर क्षेत्र के सांसदों को उड़ानें पकड़नी होती हैं जो अधिकतर शाम में छह बजे होती है। उन्होंने कहा कि शायद इसीलिए शुक्रवार को बैठक का समय शाम पांच बजे तक ही तय किया गया था।
इसके साथ ही उन्होंने पार्टी का रुख साफ करते हुए कहा कि सरकार की ओर से पेश किया जा रहा है कि हम नेशनल हेराल्ड मुद्दे को लेकर सदन नहीं चलने दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे दो बार स्पष्ट कर चुके हैं कि इस विरोध का नेशनल हेराल्ड से कोई मतलब नहीं है। लेकिन दुर्भाग्य से न तो टीवी चैनलों और न ही प्रिंट मीडिया में इसे खास कवरेज दिया गया। आजाद ने कहा कि वे एक बार फिर स्पष्ट करते हैं कि उन्हें अदालत से कोई शिकायत नहीं है और न ही इस विरोध का नेशनल हेराल्ड मुद्दे से लेना देना है। केंद्रीय मंत्री वीके सिंह के बयान के मुद्दे पर दो दिन सदन नहीं चला और उसके बाद दो तीन दिनों से सदन नहीं चल रहा है जिसका कारण सरकार द्वारा अपने मुख्यमंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करना है। उन्होंने राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
कुरियन ने व्यवस्था दी कि सदस्यों की मांग पर शुक्रवार को सदन की बैठक पांच बजे तक ही होगी। लेकिन यह व्यवस्था सिर्फ एक दिन के लिए है। आगे के दिनों के लिए कार्य मंत्रणा समिति में फैसला किया जा सकता है। इसके बाद उन्होंने सदन में गैर-सरकारी कामकाज शुरू करने को कहा। लेकिन कई सदस्यों की राय थी कि कार्यवाही स्थगित कर दी जाए। कुरियन ने दोपहर बाद करीब तीन बजकर 45 मिनट पर बैठक पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी। इसके पहले उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सोमवार से सदन में कामकाज सुचारु रूप से चलेगा। उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि अंत इस संकेत के साथ हो रहा है कि सोमवार से कामकाज सुचारु रूप से चलेगा।

 

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