तमिलनाडु की राजनीति में ‘विजय युग’ के शुरुआत में ही बड़ा घटनाक्रम देखने को मिल सकता है। आने वाले दिनों में राज्य की तीसरे नंबर की पार्टी AIADMK में दो फाड़ हो सकते हैं। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, AIADMK के कुछ सीनियर नेता खुलकर पलानीस्वामी (EPS) की नेतृत्व क्षमता पर सवाल खड़े कर रहे हैं। ये नेता चाहते हैं कि उनकी पार्टी तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की पार्टी TVK के साथ गठबंधन करे।

जयललिता के निधन के बाद दिल्ली में बैठी पार्टियों को यह उम्मीद की थी कि AIADMK कमजोर हो जाएगी और इसके नेताओं के बीच आपसी मतभेद बढ़ेंगे। अब ऐसा सच होता मालूम पड़ता है। इस समय AIADMK के नेता न सिर्फ खुलकर एडप्पाडी पलानीस्वामी को खुलकर चैलेंज कर रहे हैं बल्कि उनपर तमिलनाडु की राजनीति में नई साझेदारियों से दूर करन का भी आरोप लगा रहे हैं।

AIADMK में विवाद की वजह क्या है?

इस समय AIADMK में चल रहे विवाद की सबसे बड़ी वजह यह है कि AIADMK को विजय की पार्टी टीवीके का समर्थन करना चाहिए या नहीं। AIADMK के विश्वनीय सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के करीब 30 से 36 विधायक और सीनियर पदाधिकारी का नेतृत्व पूर्व मंत्रियों एस.पी. वेलुमणि, सी. विजयभास्कर और सीनियर नेता सी. वे. षणमुगम कर रहे हैं।

यह गुट चाहता है कि AIADMK टीवीके का समर्थन करे और विजय की सरकार में शामिल हो जाए। हालांकि EPS ऐसा करने को तैयार नहीं हैं। तमिलनाडु में हाल में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में AIADMK 47 सीटें जीती हैं।

AIADMK के बागी सूट में शामिल सूत्रों ने बताया कि विरोध में आए विधायक की संख्या की वजह से EPS पार्टी के अंदर कमजोर हो गए हैं। एक सीनियर नेता ने कहा कि वो भले ही आधिकारिक तौर पर पार्टी के जनरल सेक्रेटरी हों लेकिन पार्टी के भीतर सत्ता के अधिकांश केंद्र अब उनके साथ नहीं हैं।

सूत्रों की मानें तो अगर पार्टी के अंदर बात नहीं बनती तो AIADMK का बागी गुट आधिकारिक तौर पर टूटने के लिए तैयार है। इस कैंप के कई नेताओं का मानना है कि वो एक हफ्ते के अंदर टीवीके के साथ होंगे।

कहां से शुरू हुए मतभेद?

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल की लड़ाई की शुरुआत तब हुई जब पिछले हफ्ते DMK और AIADMK के बीच कथित सरकार बनाने की बातचीत रुक गई। इस बातचीत के दौरान AIADMK के दोनों गुट एकजुट हो गए थे।

सूत्रों की मानें तो तब योजना यह थी कि पलानीस्वामी के नेतृत्व में AIADMK गठबंधन सरकार बनाएगी और डीएमके उसका बाहर से समर्थन करेगी। इस सरकार को डीएमके और AIADMK के साथी दलों का भी समर्थन हासिल होगा। हालांकि बाद में यह योजना टूट नेतृत्व और अन्य मतभेदों को लेकर सफल न हो सकती।

सूत्रों ने बताया कि VCK के नेता थोल थिरुमावलवन ने EPS के मुख्यमंत्री बनने पर आपत्ति जताई। रिपोर्ट में बताया गया है कि जब सीएम पद के लिए थिरुमावलवन का आया तो EPS इस प्रस्ताव को स्वीकार करने को तैयार नहीं थे। जैसे ही यह प्लान असफल हुआ टीवीके ने वीसीके के साथ सरकार बनाने का ऐलान कर दिया और फिर इसके बाद AIADMK के भीतर की पुरानी दरारें फिर से उभर आईं।

EPS का पार्टी पर कितना नियंत्रण?

AIADMK के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि EPS ने रविवार का पूरा दिन जिला सचिवों से मिलकर पार्टी पर अपने कंट्रोल को बरकरार रखने की कोशिश की लेकिन उन्हें वहां से भी चिंता बढ़ाने वाले संकेत मिले। माना जा रहा है कि आधे से ज्यादा जिला सचिव वेलुमणि की तरफ झुक रहे हैं। कोयंबटूर से आने वाले वेलुमणि लंबे समय तक EPS के सबसे करीबी माने जाते रहे हैं।

AIADMK के एक पूर्व मंत्री ने कहा कि अब पार्टी के अंदर एक सीरियस सवाल यह उठ रहा है कि EPS के साथ कितने भरोसेमंद बचे हैं। AIADMK के बागी गुट ने EPS के सामने महासचिव पद छोड़ने और पार्टी को टीवीके से बातचीत करने देने की मांग रखी है।

बागी खेमे में भी खेमेबंदी

ऐसा नहीं है कि बागी गुट पूरी तरह से एकजुट है, यहां भी नेतृत्व के मुद्दे पर तनाव उभर रहा है। सूत्रों के अनुसार, इस बात पर अभी तक कोई आम सहमति नहीं बन पाई है कि यदि EPS को हटा दिया जाता है, तो पार्टी की कमान वेलुमणि संभालेंगे या शनमुगम। खबर ये भी है कि AIADMK के कार्यकर्ताओं के बीच भी इस बात को लेकर संशय बना हुआ है कि क्या यह बागी नेतृत्व वास्तव में कोई नया बदलाव लाएगा, या फिर सिर्फ नेतृत्व में परिवर्तन होगा।

पश्चिमी तमिलनाडु से आने वाले एक सीनियर नेता ने कहा कि लोग सवाल कर रहे हैं कि अगर बागी गुट नियंत्रण लेता है तो वो मौजूदा लीडरशिप से कितना अलग होगा।बागी गुट का नेतृत्व कर रहे नेताओं में शामिल शनमुघम वन्नियार समुदाय से आते हैं। यह समुदाय तमिलनाडु के सबसे बड़े OBC समूहों में से एक हैं। उत्तर तमिलनाडु में वन्नियार समुदाय काफी प्रभाव है। उत्तर तमिलनाडु में विजय की लहर उतना असर नहीं कर पाई, जितना राज्य के अन्य हिस्सों में। यहां AIADMK और पीएमके के कई उम्मीदवार चुनाव जीते।

AIADMK संकट पर बीजेपी की नजर

AIADMK के अंदर चल रहे संकट में बीजेपी की भूमिका को लेकर भी काफी चर्चा हो रही है। AIADMK के कुछ वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान EPS द्वारा बीजेपी के एक सीनियर नेता की बेइज्जती करने के बाद बीजेपी और EPS के रिश्ते खराब हो गए थे।

AIADMK के बागी नेताओं का यह भी आरोप है कि 2026 के चुनाव में EPS ने जानबूझकर BJP को कमजोर करने की कोशिश की। उनका कहना है कि EPS ने BJP को 27 ऐसी सीटें दीं जहां जीतना बहुत मुश्किल था। 

पार्टी के कुछ नेताओं की सोच बेहद व्यवहारिक

AIADMK के कुछ नेताओं की सोच अब बहुत सीधी और व्यवहारिक हो गई है। उनका कहना है कि उनकी पार्टी पांच साल से विपक्ष में है और चुनाव हार रही है। ऐसे में अगर वे अब भी सरकार से बाहर रहे तो पार्टी और कमजोर हो सकती है। इसलिए विजय की सरकार में AIADMK का शामिल होना पार्टी के लिए फायदेमंद हो सकता है।

यह भी पढ़ें: चुनाव जीतने के हफ्ते भर बाद ही गुटों में बंटे AIADMK विधायक! विधानसभा में पहले दिन दिखा ऐसा नजारा

AIADMK महासचिव पलानीस्वामी के समर्थक विधायक और सी.वी. षणमुगम के समर्थक विधयक शपथ समारोह के दौरान अलग-अलग गुटों में बैठे नजर आए। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें