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नितिन गडकरी ने माना, सड़क हादसों को रोकने में नाकाम रहा विभाग

गडकरी ने सदन में 'मोटर यान (संशोधन) विधेयक-2019' चर्चा के लिए रखते हुए कहा कि मौजूदा मोटरयान कानून 30 साल पुराना है। लोगों को बहुत असुविधाएं हो रही हैं। भ्रष्टाचार की बहुत शिकायतें आई हैं।

Author Updated: July 22, 2019 11:27 PM
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने स्वीकार किया कि देश में पिछले पांच साल में सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने में उनका विभाग नाकाम रहा है। इस बाबत उन्होंने उम्मीद जताई कि मोटर यान संशोधन विधेयक पारित होने के बाद सड़क हादसों से लोगों की जान बचाने में मदद मिलेगी। गडकरी ने सदन में ‘मोटर यान (संशोधन) विधेयक-2019’ चर्चा के लिए रखते हुए कहा कि मौजूदा मोटरयान कानून 30 साल पुराना है। लोगों को बहुत असुविधाएं हो रही हैं। भ्रष्टाचार की बहुत शिकायतें आई हैं। ऐसे में इस संशोधन विधेयक की जरूरत पड़ी। साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि राज्यों को किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं हैं। उनके अधिकार क्षेत्र में कोई दखल नहीं दिया जाएगा। मंत्री ने कहा कि लाइसेंस और वाहनों के पंजीकरण की व्यवस्था को ऑनलाइन किया गया है जिससे भ्रष्टाचार पर पूरी तरह लगाम लग सकेगी।

गडकरी ने कहा, मेरी तरफ से पूरा प्रयास करने के बावजूद सड़क हादसों में होने वाली मौतों में तीन-चार फीसदी की कमी आई हैं। मैं इसमें विफल रहा हूं, यह स्वीकार करता हूं। यह विधेयक पारित होने से इन हादसों में होने वाली मौतों में बहुत कमी आएगी। उन्होंने आगे कहा कि पिछड़े जिलों में ड्राइंविंग ट्रेंनिंग सेंटर खोला जाएगा और इसके लिए उनका मंत्रालय एक करोड़ रुपये की मदद देगा। उन्होंने कहा कि 2017 में यह विधेयक लोकसभा में पारित हुआ, लेकिन उन्हें इस बात का दुख है कि यह राज्यसभा में पारित नहीं हो पाया।

गडकरी ने लोकसभा से मोटरयान संशोधन विधेयक पारित करने की अपील करते हुए कहा कि परिवहन व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए राष्ट्रीय परिवहन नीति बनाई जा रही है। विधेयक पर चर्चा की शुरूआत करते हुए कांग्रेस के एंटो एंटनी ने कहा कि सरकार इस विधेयक के माध्यम से यातायात सुरक्षित करने की बात कर रही है लेकिन वह परिवहन के मामले में राज्यों के अधिकार लेना चाहती है। सरकार राष्ट्रीय परिवहन नीति के नाम पर निजी क्षेत्रों की भागीदारी बढ़ाना चाहती है और परिवहन क्षेत्र का निजीकरण करना चाहती है।

प्रस्तावित नीति के गंभीर परिणाम होंगे और देशभर के राज्य परिवहन निगम इससे प्रभावित होंगे। वहीं भाजपा के गोपाल शेट्टी ने कहा,यह जनहितैषी विधेयक है और ऐसे विधेयक पारित होने में भी संसद में सालों लग जाते हैं, इस पर हम सभी को विचार करना चाहिए। उन्होंने मांग की कि राजमार्गों के पास स्थित बड़े अस्पतालों को दुर्घटना के मामले में स्वत: स्फूर्त तरीके से पीड़ितों को सुविधा पहुंचाने के लिए पहल करनी चाहिए।

विधेयक में इन बातों का रखा गया है ध्यान

इस विधेयक में सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में काफी सख्त प्रावधान रखे गये हैं। किशोर नाबालिगों द्वारा वाहन चलाना, बिना लाइसेंस, खतरनाक ढंग से वाहन चलाना, शराब पीकर गाड़ी चलाना, निर्धारित सीमा से तेज गाड़ी चलाना और निर्धारित मानकों से अधिक लोगों को बिठाकर अथवा अधिक माल लादकर गाड़ी चलाने जैसे नियमों के उल्लंघन पर कड़े जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसमें आपातकालीन वाहनों को रास्ता नहीं देने पर भी जुर्माने का प्रस्ताव किया गया है । विधेयक में किये गये प्रावधान 18 राज्यों के परिवहन मंत्रियों की सिफारिशों पर आधारित हैं। इन सिफारिशों को संसद की स्थायी समिति ने भी जांच परख की है।

विधेयक में तेज गाड़ी भगाने पर भी जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है। बिना बीमा पॉलिसी के वाहन चलाने पर भी जुर्माना रखा गया है। बिना हेलमेट के वाहन चलाने पर जुर्माना एवं तीन माह के लिए लाइसेंस निलंबित किया जाना शामिल है। किशोर द्वारा गाड़ी चलाते हुए सड़क पर कोई अपराध करने की स्थिति में गाड़ी के मालिक अथवा अभिभावक को दोषी माना जायेगा और वाहन का पंजीकरण भी निरस्त किया जायेगा। इस तरह के अपराध में वाहन मालिक अथवा अभिभावक को दोषी माना जाएगा। विधेयक में केंद्र सरकार के लिए मोटर वाहन दुर्घटना कोष के गठन की बात कही गई है जो भारत में सड़क का उपयोग करने वालों को अनिवार्य बीमा कवर प्रदान करेगा । इसमें यातायात नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है।

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