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जी-20 की बैठक में प्रधानमंत्री का जोर रक्षा और सुरक्षा पर

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के साथ जापान-अमेरिका-इंडिया की पहली त्रिपक्षीय बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र से जुड़े सुरक्षा मुद्दों पर अहम चर्चा की। यह बैठक ऐसे समय में हुई हुई, जब चीन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र में अपना प्रभुत्व दिखा रहा है।

जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (फोटो – एपी)

जी-20 शिखर सम्मेलन के मौके पर अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे, सऊदी अरब के वली अहद मोहम्मद बिन सलमान और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ब्रिटिश प्रधानमंत्री थेरेसा मे समेत कई देशों के राष्ट्रध्यक्षों से द्विपक्षीय वार्ता की। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुतारेस से भी अलग से मुलाकात की। अमेरिका व चीन के बीच जारी व्यापार युद्ध व रूस द्वारा यूक्रेन के तीन पोतों को जब्त करने के बाद तनाव के माहौल में शुरू हुई इस शिखर बैठक में मोदी ने दक्षिणी चीन सागर में नौवहन की आजादी और क्षेत्रीय सुरक्षा की स्थिति पर जापान-अमेरिका-इंडिया (जय) की पहली त्रिपक्षीय बैठक और रूस-भारत-चीन (आरआइसी) की बारह साल बाद हुई बैठक में रक्षा व सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। इसके अलावा मोदी ने ब्रिक्स देशों की बैठक में भी हिस्सा लिया।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के साथ जापान-अमेरिका-इंडिया की पहली त्रिपक्षीय बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र से जुड़े सुरक्षा मुद्दों पर अहम चर्चा की। यह बैठक ऐसे समय में हुई हुई, जब चीन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र में अपना प्रभुत्व दिखा रहा है। यह त्रिपक्षीय बैठक अतीत में ट्रंप और आबे के साथ हुई द्विपक्षीय बैठकों का ही विस्तार है। दोनों गठबंधनों की त्रिपक्षीय बैठकों में दक्षिण चीन सागर, पूर्वी चीन सागर और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता व शांति के विभिन्न बिंदुओं पर बात की गई।

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री ने शी से कहा कि वे अगले साल एक अनौपचारिक बैठक में उनकी मेजबानी करने की आशा करते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज की बैठक हमारे संबंधों को मजबूत करने के संदर्भ में एक दिशा प्रदान करने में अहम होगी। इस तरह की पहल गति को बनाए रखने में मददगार है। मोदी ने कहा-इस मुलाकात के लिए वक्त निकालने को लेकर मैं आपको (राष्ट्रपति शी को) अपनी हार्दिक बधाई देता हूं। दोनों देशों के बीच संबंधों ने पिछले एक साल में लंबे डग भरे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया, ‘टिकाऊ विकास को और बढ़ाने के उद्देश्य से जी-20 के शिखर-सम्मेलन में व्यापक चर्चा हुई।’ मोदी ने जर्मन चांसलर एंगिला मरकेल से भी मुलाकात की।

इन बैठकों के पहले प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस व सऊदी अरब के वली अहद से मुलाकात की। गुतारेस से मुलाकात में प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें भारत की ओर से भरोसा दिलाया कि भारत अगले हफ्ते पोलैंड में जलवायु परिवर्तन पर होने वाली वार्ता में उचित और जिम्मेदार भूमिका निभाएगा। विदेश सचिव विजय गोखले के मुताबिक, प्रधानमंत्री की चर्चा का मुख्य विषय पोलैंड के केटोवाइस में तीन दिसंबर से होने जा रही सीओपी24 जलवायु परिवर्तन बैठक रहा। गोखले के मुताबिक, ‘महासचिव ने कहा है कि भारत जलवायु परिवर्तन वार्ताओं में प्रमुख भूमिका निभाता है। उन्होंने माना कि प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में कई ठोस उपाए किए हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन का जिक्र किया।’ गोखले के मुताबिक, गुतारेस ने उम्मीद जताई कि भारत विकसित देशों और विकासशील देशों के विभिन्न समूहों को साथ लाएगा ताकि वे किसी ऐसे समाधान को सामने लाएं जिसे 2019 में जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन में शामिल किया जा सके।

प्रधानमंत्री की अन्य महत्वपूर्ण वार्ता सऊदी अरब के वली अहद (क्राउन प्रिंस) मोहम्मद बिन सलमान के साथ रही। दोनों नेताओं के बीच सऊदी अरब के भारत में ऊर्जा, आधारभूत संरचना और रक्षा क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने के लिए नेतृत्व के स्तर पर एक प्रणाली स्थापित किए जाने का फैसला किया। दोनों नेताओं ने बैठक के दौरान आर्थिक, सांस्कृतिक और ऊर्जा संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा की। विदेश सचिव विजय गोखले के मुताबिक, इस बारे में विशिष्ट चर्चा हुई कि सऊदी अरब कैसे दो से तीन साल में भारत में विभिन्न क्षेत्रों में अपना निवेश बढ़ा सकता है। सऊदी अरब राष्ट्रीय बुनियादी संरचना कोष में शुरुआती निवेश को अंतिम रूप देगा। उन्होंने प्रौद्योगिकी, कृषि और ऊर्जा क्षेत्रों में निवेश की भविष्य की संभावनाओं का भी जिक्र किया।

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