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गांधी की हत्या के बाद गिरफ्तार गोलवलकर का नाम मोहन भागवत के भाषण से गायब, मुस्लिमों को शत्रु बताने वाला बयान भी हटाया

भागवत ने बताया कि नए संस्करण में इस बात का जिक्र नहीं है। भागवत ने कहा, 'रही बात 'बंच ऑफ थॉट्स' की, बातें जो बोली जाती हैं, वो परिस्थिति विशेष, प्रसंग विशेष के संदर्भ में बोली जाती हैं।

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माधव सदाशिव गोलवलकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सबसे लंबे वक्त तक प्रमुख रहे। संघ के दूसरे प्रमुख गोलवलकर श्री गुरुजी के नाम से भी जाने जाते थे। आजादी के बाद भारत में संगठन का दायरा बढ़ाने का श्रेय उन्हें जाता है। वर्तमान संघ प्रमुख मोहन भागवत ने आरएसएस के व्याख्यान में 32 हस्तियों का जिक्र किया, लेकिन इनमें गोलवलकर का नाम गायब था। इस व्याख्यान का मकसद आरएसएस के बारे में विस्तार से समझाना और संगठन के बारे में फैली ‘भ्रांतियों’ को दूर करना था। भागवत ने अपने व्याख्यान के आखिरी दिन बुधवार (19 सितंबर) को एक बार गोलवलकर का जिक्र किया। उनसे गोलवलकर के ‘बंच ऑफ थॉट्स’ के बारे में पूछा गया था, जिसमें मुस्लिमों को शत्रु बताया गया था।

भागवत ने बताया कि नए संस्करण में इस बात का जिक्र नहीं है। भागवत ने कहा, ‘रही बात ‘बंच ऑफ थॉट्स’ की, बातें जो बोली जाती हैं, वो परिस्थिति विशेष, प्रसंग विशेष के संदर्भ में बोली जाती हैं। वो शाश्वत नहीं रहती हैं। एक बात तो यह है कि गुरुजी के जो शाश्वत विचार हैं, उनका एक संकलन प्रसिद्ध हुआ है ‘श्री गुरुजी: विजन एंड मिशन’, उसमें तात्कालिक संदर्भ से आने वाली सारी बातें हटाकर उसमें जो सदा काल के लिए उपयुक्त विचार हैं, वो रखे हैं। उसको आप पढ़िए। उसमें आपको ऐसी बातें नहीं मिलेंगी।’ बता दें कि इसके अलावा, भागवत ने एक अन्य सवाल के जवाब में भी गोलवलकर का जरा सा जिक्र किया। 1942 में अंतरजातीय विवाह को बढ़ावा देने को लेकर गोलवलकर के जीवन से जुड़ी एक ऐसी घटना के बारे में, जिसे कम लोग जानते हैं।

तीन दिवसीय व्याख्यान श्रृंखला में भागवत ने 32 हस्तियों के बारे में 102 बार जिक्र किया गया। मोहन भागवत ने सबसे ज्यादा 45 बार केबी हेडगेवार का जिक्र किया। इसके अलावा, संघ प्रमुख ने महात्मा गांधी, मोतीलाल नेहरू, जवाहर लाल नेहरू, रवींद्र नाथ टैगोर, सुभाष चंद्र बोस, वीर सावरकर, एमएन रॉय, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के संस्थापक सर सैयद अहमद खान का जिक्र किया। यहां तक कि संघ के मार्तण्ड राव जोग और किशन सिंह राजपूत की भी चर्चा हुई, जिनके बारे में कम लोग ही जानते हैं। इसके अलावा, बुद्ध, रामकृष्ण परमहंस, दयानंद सरस्वती, विवेकानंद, गुरु नानक, शिवाजी को भी भागवत के व्याख्यान में जगह मिली।

बता दें कि गोलवलकर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख शिल्पकार के तौर पर जाना जाता है। संघ संस्थापक हेडगेवार के 1940 में निधन के बाद गोलवलकर ने संघ प्रमुख की जिम्मेदारी संभाली और 1973 तक संगठन का संचालन किया। महात्मा गांधी की हत्या के बाद उन्हें गिरफ्तार भी किया गया। आरएसएस पर लगे प्रतिबंध को हटाने के लिए संगठन का संविधान बनाने की जरूरत के मद्देनजर वह तत्कालीन गृह मंत्री सरदार बल्लभ भाई पटेल के संपर्क में भी रहे।आजादी के तुरंत बाद लगे इस प्रतिबंध के बावजूद गोलवलकर विभिन्न क्षेत्रों में संगठन का विस्तार करते रहे। समाज के विभिन्न तबकों तक पहुंचने के लिए विभिन्न अनुषांगिक संगठन बनाने का आइडिया भी उन्हीं का माना जाता है।

उनके कार्यकाल के दौरान ही भारतीय जनसंघ, एबीवीपी, भारतीय मजदूर संघ और विश्व हिंदू परिषद प्रकाश में आए। ये संगठन वर्तमान में आरएसएस के सबसे बड़े अनुषांगिक संगठन हैं। आरएसएस के बैनर तले आज ऐसे तीन दर्जन संगठन काम कर रहे हैं। भागवत के भाषणों से गोलवलकर का  जिक्र हटने की काफी अहमियत है। दरअसल, संघ के सबसे बड़े आलोचक गोलवलकर और उनकी विचारधारा को लेकर संगठन की आलोचना करते रहे हैं। मुस्लिमों और संविधान को लेकर गोलवलकर के विचारों को लेकर आलोचक आरएसएस को निशाने पर लेते रहे हैं।

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