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दिल्ली पुलिस के सभी विभागों तक पहुंचा कोरोना

सभी संवेदनशील जगहों पर मुस्तैद जवानों के लिए कोरोना किट उपलब्ध कराने के साथ उनके आने-जाने के लिए छह विशेष गाड़ियों का बंदोबस्त किया गया है। दिल्ली पुलिस ने स्टैंडर्ड आॅपरेटिंग प्रोसिजर (एसओपी) भी जारी की है। हालांकि इस दौरान राहत यह कि 35 पुलिस वाले ठीक होकर ड्यूटी पर लौट रहे हैं।

संवेदनशील जगहों पर आने जाने के लिए विशेष वाहन में चालक पीपीई किट में रहेंगे।

राजधानी में कोरोना वारियर्स में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले 135 दिल्ली पुलिसकर्मियों के संक्रमित होने के बाद महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। अस्पतालों, एकांतवास, होटल, अतिथि गृह, पीसीआर की गाड़ियों में रोगियों को अस्पताल में भर्ती कराने से लेकर वीआइपी, वीवीआइपी की सुरक्षा में दिन रात ड्यूटी से लेकर अन्य सभी संवेदनशील जगहों पर मुस्तैद पुलिस का इस तरह कोरोना संक्रमित होने को महकमे ने गंभीरता से लिया है। अस्पतालों में सीटें रिजर्व रखी गई हैं।

सभी संवेदनशील जगहों पर मुस्तैद जवानों के लिए कोरोना किट उपलब्ध कराने के साथ उनके आने-जाने के लिए छह विशेष गाड़ियों का बंदोबस्त किया गया है। दिल्ली पुलिस ने स्टैंडर्ड आॅपरेटिंग प्रोसिजर (एसओपी) भी जारी की है। हालांकि इस दौरान राहत यह कि 35 पुलिस वाले ठीक होकर ड्यूटी पर लौट रहे हैं। दिल्ली पुलिस का कोई ऐसा यूनिट नहीं बची है जो कोरोना की चपेट में नहीं है। स्पेशल सेल, अपराध शाखा, बटालियन और जिलों के साथ ही अन्य सभी यूनिटस के कोई न कोई पुलिस वाले कोरोना की चपेट में शामिल हैं। इनके परिवार घर में पृथकवास में है। कांस्टेबल की कोरोना से मौत के बाद तो पूरे महकमे के अधिकारियों में चिंता है।

पुलिस के अतिरिक्त प्रवक्ता एके मित्तल ने कहा की 135 के करीब कोरोना संक्रमित हुए लेकिन 35 जवान ठीक भी हुए हैं। पुलिस मुख्यालय ने दिशानिर्देश जारी की है जिसके तहत कोरोना में पुलिस के जवान बीमार हुए तो थानेदार उसे भर्ती कराएंगे। पुलिस द्वारा जारी इस स्टैंडर्ड आॅपरेटिंग प्रोसिजर (एसओपी) का उद्देश्य समय पर पुलिसवालों के कोरोना के संभावित मरीजों की पहचान करना और उन्हें सर्वोत्तम इलाज मुहैया कराना है।

एसओपी के मुताबिक संबंधित थाने के एसएचओ या इंस्पेक्टर इंचार्ज की ये जिम्मेदारी होगी कि वो मेडिकल इमरजेंसी अथवा कोरोना के लक्षण दिखने की हालत में पीड़ित पुलिसकर्मी को डॉक्टर के पास ले जाएं और राय लें कि कोरोना टेस्ट कराया जाना चाहिए या नहीं। इसके अलावा बाकी सदस्यों को भी सावधानियों की जानकारी देंगे। दिल्ली पुलिस के संयुक्त आयुक्त और उपायुक्त की ये जिम्मेदारी होगी कि वे एसओपी का प्रभावी कार्यान्वयन करवाएं।

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