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किसानों की उम्मीदें पूरी करेंगे, बदहाली के लिए राज्य सरकार जिम्मेदार: मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि किसानों के बेटों को नौकरियां देने के लिए उद्योगों और सेवा क्षेत्र का विस्तार जरूरी है।

Author बरेली | February 29, 2016 12:24 AM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (पीटीआई फोटो)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों और खेती की बदहाली के लिए राज्य सरकारों को जिम्मेदार ठहराया है। बकौल मोदी कृषि राज्यों का विषय है। जिन राज्यों में सरकारों ने कृषि योजनाओं पर ध्यान दिया वहां किसान खुशहाल हैं। मध्य प्रदेश की मिसाल देते हुए उन्होंने कहा कि दस साल पहले यह प्रदेश कृषि के मामले में दसवें पायदान से भी नीचे था पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खेती पर ध्यान देने का नतीजा यह हुआ है कि यह प्रदेश कृषि उत्पादन के मामले में पिछले तीन साल से देश का अव्वल राज्य बना हुआ है।

भाजपा की ओर से यहां रबड़ फैक्टरी के मैदान में आयोजित किसान कल्याण रैली में प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने 2022 तक देश के सभी किसानों की आमदनी दोगुना करने का स्वप्न संजोया है। यह कोई मुश्किल काम भी नहीं है। उनकी विकास की अवधारणा तीन स्तंभों पर टिकी है। जिनमें कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र शामिल हैं। गांवों में परिवारों के बढ़ने पर कृषि भूमि का लगातार बंटवारा होने से किसानों की कास्त पहले ही काफी छोटी हो गईं हैं। अब इनमें और बंटवारे की गुंजाइश ही नहीं बची है। लिहाजा ज्यादातर किसान अपने बेटों में से सिर्फ एक को खेती में लगा कर बाकी बच्चों को नौकरी दिलाने का प्रयास करते हैं।

मोदी ने कहा कि किसानों के बेटों को नौकरियां देने के लिए उद्योगों और सेवा क्षेत्र का विस्तार जरूरी है। साथ ही किसानों को भी अब परंपरागत खेती के अलावा खेतों की मेड़ों पर पेड़ लगा कर वानिकी और पशुपालन के जरिए अपनी आय में बढ़ोतरी करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों की समस्याओं को दूर करने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। जल प्रबंधन पर विशेष जोर दिया जा रहा है ताकि हर खेत को पानी पहुंचाया जा सके। जल प्रबंधन ठीक तरह से न होने की वजह से ही बुंदेलखंड में पांच नदियां होने के बावजूद पीने का पानी तक लोगों को मयस्सर नहीं है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जल प्रबंधन के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 50 हजार करोड़ रुपए से शुरू की है। किसानों को सूखा और बाढ़ की आपदाओं से बचाने के मकसद से नदियों को जोड़ने का काम शुरू कराया गया है। मनरेगा में पहले धन तो खर्च होता था लेकिन काम कोई नहीं होता था। अब केंद्र सरकार ने राज्यों को निर्देश दिए हैं कि इस योजना के तहत तालाब गहरे करने और नहरोंं को साफ करने का काम प्राथमिकता से कराया जाए ताकि किसानों को इसका लाभ मिल सके। उर्वरकों और प्रामाणिक बीजों की किल्लत को खत्म करने के उपाय किए गए हैं। इसके अलावा खेतों की मिट्टी की जांच कराने के लिए किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड बांटे जा रहे हैं ताकि वे जरूरत के मुताबिक ही खेतों में कीटनाशकों और उर्वरकों का प्रयोग करें। उन्होंने केंद्र की नई फसल बीमा योजना की विस्तार से जानकारी देते हुए किसानों से इसे अपनाने का अनुरोध किया।

रैली में गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि किसान सिर्फ अन्नदाता नहीं बल्कि सामाजिक और राजनैतिक आंदोलनों का जन्मदाता भी है। उत्तर प्रदेश ने लोकसभा चुनाव में भाजपा की झोली भर कर नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाया है। हर संकट की घड़ी में भाजपा और केंद्र सरकार किसानों के साथ खड़े दिखाई देंगे।

जेएनयू की घटनाओं की ओर इशारा करते हुए गृहमंत्री ने कहा कि कुछ अवांछनीय तत्व राष्ट्र विरोधी नारेबाजी के अलावा देश के टुकड़े करने के नारे भी लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब केंद्र में मजबूत सरकार है। भारत के स्वाभिमान पर कोई आंच नहीं आने दी जाएगी।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मी कांत वाजपेयी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार की उदासीनता की वजह से राज्य की कृषि विकास दर तीन फीसद से भी कम है। जबकि भाजपा शासित राज्यों में यह विकास दर 10 से 20 फीसद है। केंद्रीय कपड़ा राज्यमंत्री संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरराष्ट्रीय जगत में भारत को नई पहचान दिलाई है।

रैली में कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने आरोप लगाया कि केंद्र की कृषि योजनाओं के तहत उत्तर प्रदेश को भेजी जा रही धनराशि का सही उपयोग नहीं हो रहा है। पिछले दिनों ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश का मुआवजा भी किसानों को जाति, धर्म और राजनैतिक निष्ठा देख कर बांटा गया।

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