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एफटीआइआइ हड़ताल खत्म, दस फिल्मकारों ने लौटाए पुरस्कार

भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान (एफटीआइआइ) के अध्यक्ष पद पर गजेंद्र चौहान की नियुक्ति रद्द करने के लिए सरकार को बाध्य करने में असफल रहने पर आंदोलनकारी..

Author , पुणे /मुंबई/ दिल्ली | October 29, 2015 1:59 AM
एफटीआईआई छात्रों ने पिछले साल 17 अगस्त को पथरबे का कथित तौर पर घेराव किया था और उन्हें उनके दफ्तर में कैद कर दिया था। (फाइल फोटो)

भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान (एफटीआइआइ) के अध्यक्ष पद पर गजेंद्र चौहान की नियुक्ति रद्द करने के लिए सरकार को बाध्य करने में असफल रहने पर आंदोलनकारी छात्रों ने बुधवार को अपनी हड़ताल एकतरफा रूप से समाप्त कर दी। लेकिन साथ ही अपना विरोध जारी रखने की घोषणा की। वहीं 10 जाने-माने फिल्म निर्माताओं ने छात्रों के साथ एकजुटता जताते हुए और देश में बढ़ती असहिष्णुता के खिलाफ अपने राष्ट्रीय पुरस्कार लौटा दिए।

एफटीआइआइ स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एफएसए) के प्रतिनिधि विकास उर्स ने पुणे में कहा, हम छात्रों के हित में अपनी हड़ताल सामूहिक निर्णय के तौर पर तत्काल समाप्त कर रहे हैं और शिक्षा की ओर वापसी कर रहे हैं। लेकिन हमारा विरोध जारी रहेगा। हम अपनी लड़ाई को आगे ले जाएंगे। इस बीच एफटीआइआइ में जारी गतिरोध समाप्त होने पर दिवाकर बनर्जी और आनंद पटवर्धन सहित 10 प्रमुख फिल्म निर्माताओं ने छात्रों के मुद्दों का समाधान करने में सरकार की ‘उदासीनता’ और असहिष्णुता के माहौल के खिलाफ अपने राष्ट्रीय पुरस्कार लौटाने की मुंबई में घोषणा की।

उन्होंने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में कहा, फिल्म निर्माताओं के तौर पर हम एफटीआइआइ छात्रों के साथ खड़े हुए हैं और इस बात को लेकर प्रतिबद्ध हैं कि विरोध प्रदर्शन का पूरा बोझ केवल उनके ही कंधों पर नहीं पड़े।

उन्होंने कहा, हम वह सम्मान लौटाने को विवश हो रहे हैं जो हमें सरकार ने प्रदान किए हैं। हत्याओं में भूमिका निभाने वाली ताकतों से पूछताछ किए बिना मौतों पर संवेदना प्रकट करना, हमारे देश को नुकसान पहुंचा रही बुरी ताकतों को मौन स्वीकार्यता है।

एफटीआइआइ छात्रों की ओर से यह एकतरफा घोषणा तब हुई है जब आंदोलनकारी छात्रों और सूचना व प्रसारण मंत्रालय के प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत गतिरोध समाप्त करने में असफल रही। दोनों पक्ष चौहान को हटाने के मुद्दे पर परस्पर विरोधी स्थिति से हटने को तैयार नहीं हुए।

उर्स ने घोषणा की कि यद्यपि छात्रों ने हड़ताल समाप्त करने का निर्णय किया है। लेकिन सूचना और प्रसारण मंत्रालय के साथ कोई ‘सक्रिय बातचीत’ नहीं होगी। उर्स ने आंदोलन वापस लेने के बावजूद परिसर में बेचैनी जारी रहने की चर्चा करते हुए कहा, ‘अब बात इन पांच नियुक्तियों (चौहान और एफटीआइआइ सोसाइटी के चार सदस्यों की) से आगे चली गई है जिस पर हमने सवाल उठाया था। उर्स ने परोक्ष रूप से भाजपा के वैचारिक संरक्षक आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा, ‘दक्षिणपंथी रुख अब उजागर हो गया है और हमें पता है कि देश को कौन चला रहा है।’

यह पूछने पर कि चौहान के प्रभार संभालने पर छात्रों की क्या प्रतिक्रिया है, एफएसए के एक अन्य प्रतिनिधि राकेश शुक्ल ने यह संकेत देते हुए कि परिसर में सामान्य स्थिति बहाल होने में अभी कुछ और समय लग सकता है, कहा, ‘हमारा प्रदर्शन अभी तक शांतिपूर्ण रहा है और यह इसी तरह से जारी रहेगा। वे (चौहान) हमें स्वीकार नहीं हैं।

हड़ताल वापसी की घोषणा के तत्काल बाद केंद्रीय सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने इस कदम का स्वागत किया और कहा कि संस्थान में स्थिति सुधारने के लिए मंत्रालय छात्रों के साथ बातचीत जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि सरकार एफटीआइआइ को राष्ट्रीय महत्त्व का एक संस्थान बनाने को प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, मुझे प्रसन्नता है कि वे अपनी कक्षाओं को वापस लौट रहे हैं। संस्थान में कैसे सुधार करना है इस बारे में चर्चा जारी रहेगी।

बनर्जी और पटवर्धन के अलावा अपने पुरस्कार लौटाने वाले अन्य फिल्मकारों में निशिता जैन, परेश कामदार, कृति नखवा, फिल्म हंटर के निदेशक हर्षवर्धन कुलकर्णी, हरि नायर, राकेश शर्मा, इंद्रनिल लाहिड़ी और लिपिका सिंह दराई शामिल हैं।

बनर्जी ने संवाददाताओं से कहा, मैं गुस्से, आक्रोश में यहां नहीं आया हूं। वे भावनाएं बहुत समय पहले समाप्त हो गई हैं। मेरे लिए मेरा पहला राष्ट्रीय पुरस्कार लौटाना आसान नहीं जो मुझे फिल्म ‘खोसला का घोसला’ के लिए मिला था। वह मेरी पहली फिल्म थी और कई के लिए मेरी सबसे पसंदीदा। उन्होंने कहा, ‘अगर बहस, सवाल पूछे जाने को लेकर असहिष्णुता और पढ़ाई के माहौल को बेहतर बनाने की चाहत रखने वाले छात्र समूह को लेकर असहिष्णुता होगी, तो फिर वह असहिष्णुता उदासीनता में प्रकट होती है। हम इसी का विरोध कर रहे हैं।’

जाने-माने डाक्यूमेंटरी निर्माता पटवर्धन ने कहा कि सरकार ने ‘अति दक्षिणपंथी धड़ों’ को प्रोत्साहित किया है। उन्होंने कहा, मैंने इस तरह से एक समय पर बहुत सारी घटनाएं होती नहीं देखी हैं। यह इसका संकेत है कि क्या होने वाला है और मुझे लगता है कि पूरे देश में लोग अलग-अलग तरीकों से प्रतिक्रिया दे रहे हैं। पटवर्धन ने कहा, हम एफटीआइआइ पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। यह एक ऐसा संघर्ष है जिसका हम शुरू से ही समर्थन कर रहे हैं।

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