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एफटीआईआई छात्रों की हड़ताल समाप्त, लेकिन जारी रहेगा विरोध

एफटीआईआई के छात्रों ने संस्थान के अध्यक्ष पद पर गजेंद्र चौहान की नियुक्ति के खिलाफ हड़ताल समाप्त कर दी लेकिन साथ ही यह भी घोषणा की कि उनके खिलाफ विरोध...

Author पुणे/दिल्ली | October 28, 2015 9:56 PM
एफटीआईआई छात्रों ने पिछले साल 17 अगस्त को पथरबे का कथित तौर पर घेराव किया था और उन्हें उनके दफ्तर में कैद कर दिया था। (फाइल फोटो)

भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान (एफटीआईआई) के छात्रों ने संस्थान के अध्यक्ष पद पर भाजपा सदस्य एवं अभिनेता गजेंद्र चौहान की नियुक्ति के खिलाफ 139 दिन से जारी अपनी हड़ताल बुधवार को एकतरफा रूप से समाप्त कर दी लेकिन साथ ही यह भी घोषणा की कि उनके खिलाफ ‘‘शांतिपूर्ण’’ विरोध जारी रहेगा।

एफटीआईआई स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एफएसए) के नेताओं ने अपनी हड़ताल समाप्त करने की घोषणा तो की लेकिन साथ ही ‘‘दक्षिणपंथ’’ की ओर झुकाव के लिए केंद्र की कड़ी आलोचना की। एफएसए के प्रतिनिधि विकास उर्स ने पुणे में कहा, ‘‘हम छात्रों के हित में अपनी हड़ताल सामूहिक निर्णय के तौर पर तत्काल समाप्त कर रहे हैं और शिक्षा की ओर वापसी कर रहे हैं लेकिन हमारा विरोध जारी रहेगा। हम अपनी लड़ाई को आगे ले जाएंगे।’’

यह एकतरफा घोषणा तब हुई है जब आंदोलनकारी छात्रों और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत गतिरोध को समाप्त करने में असफल रही। दोनों पक्ष चौहान को हटाने के मुद्दे पर परस्पर विरोधी स्थिति से हटने को तैयार नहीं हुए। चौहान को धारावाहिक महाभारत में युधिष्ठिर की उनकी भूमिका के लिए जाना जाता है।

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इस घोषणा के तत्काल बाद केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने इस कदम का स्वागत किया और कहा कि संस्थान में स्थिति सुधारने के लिए मंत्रालय छात्रों के साथ बातचीत जारी रखेगा।

उन्होंने कहा कि सरकार एफटीआईआई को राष्ट्रीय महत्व का एक संस्थान बनाने को प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे प्रसन्नता है कि वे अपनी कक्षाओं को वापस लौट रहे हैं। संस्थान में कैसे सुधार करना है इस बारे में चर्चा जारी रहेगी।’’

यद्यपि उर्स ने पुणे में घोषणा की कि हालांकि छात्रों ने हड़ताल वापस लेने का निर्णय किया है, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के साथ कोई ‘‘सक्रिय वार्ता’’ नहीं होगी। उन्होंने कहा, ‘‘यद्यपि एफएसए ने हड़ताल वापस लेने का निर्णय किया है लेकिन छात्र तब तक सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के साथ कोई ‘‘सक्रिय वार्ता’’ नहीं करेंगे जब तक नियुक्तियों के मुद्दे का समाधान नहीं हो जाता। उन्होंने कहा कि मंत्रालय ने असफल वार्ता के दौरान यह प्रभाव छोड़ा कि उसे इस मामले में निर्णय लेने का ‘‘कोई अधिकार नहीं’’ है।

उर्स ने आंदोलन वापस लेने के बावजूद परिसर में बेचैनी जारी रहने की चर्चा करते हुए कहा, ‘‘अब बात इन पांच नियुक्तियों (चौहान और एफटीआईआई सोसाइटी के चार सदस्यों की) से आगे चली गई है जिस पर हमने सवाल उठाया था।’’

उर्स ने परोक्ष रूप से भाजपा के वैचारिक संरक्षक आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘दक्षिणपंथी रूख अब उजागर हो गया है और हमें पता है कि देश को कौन चला रहा है।’’

यह पूछे जाने पर कि चौहान के प्रभार संभालने पर छात्रों की क्या प्रतिक्रिया है, एफएसए के एक अन्य प्रतिनिधि राकेश शुक्ल ने यह संकेत देते हुए कि परिसर में सामान्य स्थिति बहाल होने में अभी कुछ और समय लगेगा कहा, ‘‘हमारा प्रदर्शन अभी तक शांतिपूर्ण रहा है और यह इसी तरह से जारी रहेगा। वह हमें स्वीकार नहीं हैं।’’

इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए चौहान ने कहा कि उन्हें प्रसन्नता है कि छात्रों ने हड़ताल समाप्त करने का निर्णय किया है और वह उनके साथ काम करने को तैयार हैं। ‘‘हम सब साथ मिलकर काम करेंगे और आगे बढ़ेंगे।’’

चौहान ने कहा, ‘‘मुझे छात्रों के लिए बहुत प्रसन्नता है। मुझे प्रसन्नता है कि उन्होंने यह निर्णय किया है। मुझे भरोसा है कि भविष्य में हम एफटीआईआई में एक संचालन परिषद का गठन करेंगे और वहां काम शुरू करेंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘जीवन चुनौतियों से भरा हुआ है। मैं उन्हें स्वीकार करता हूं…यह एक चुनौती है और मैं यह जिम्मेदारी उठाने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करूंगा। मेरा प्रयास छात्रों के साथ अच्छे संबंध बनाने का होगा।’’

चौहान ने साथ ही कहा कि वह इस घटनाक्रम को ‘‘जीत या हार की स्थिति’’ के तौर पर नहीं देखते और उन्हें इस निर्णय को लेकर प्रसन्नता है क्योंकि छात्रों को शिक्षा को लेकर काफी नुकसान हो रहा था।

संवाददाता सम्मेलन में उर्स के साथ एफएसए अध्यक्ष एच नचीमुत्तू भी थे। उर्स ने कहा कि अपनी ओर से उठायी गई चिंताओं से आम आदमी को अवगत कराने के बाद छात्र अब ‘‘अपनी लड़ाई विस्तारित करेंगे और उसे आगे ले जाएंगे।’’

उन्होंने कहा कि छात्रों ने सरकार के साथ इस अनुभव से जो सीखा है वह भविष्य में उनकी कला और फिल्मों में प्रतिबिंबित होगा। उन्होंने कहा, ‘‘अब हमारी शिक्षा आगे जाएगी। उसमें वह झलकेगा जो हमने इन 139 दिनों में सीखा है। हो सकता है कि वह हमारी फिल्मों, हमारी पटकथाओं में सामने आये लेकिन वह निश्चित तौर पर आने वाले समय में कई तरह, कई मायने और उन विरोध प्रदर्शनों में सामने आएगा जो हम शिक्षा की ओर वापसी करने के साथ जारी रखेंगे।’’

उर्स ने कहा, ‘‘परंतु हम इसका इस्तेमाल केवल यह कहने के लिए नहीं कर रहे है कि हम शिक्षा की ओर वापस जा रहे हैं बल्कि हम इस मौके का इस्तेमाल फिल्मनिर्माताओं, शिक्षाविदों और देश के नागरिकों से आह्वान करने के लिए करना चाहते हैं कि वे इस लड़ाई को आगे ले जाएं। उन्होंने कहा कि परिसर अभी भी ऐसी तख्तियों और चित्रों से भरा हुआ है जिसमें ‘‘लोकतंत्र पर हमले’’ की निंदा की गई है।

छात्रों को प्रताड़ित करने की संभावना को लेकर पूछे गए सवाल पर एक अन्य छात्र प्रतिनिधि राकेश शुक्ल ने कहा, ‘‘हमें निश्चित तौर पर इसका भय है।’’

एफटीआईआई हड़ताल ने पूरे देश का ध्यान आकृष्ट किया और भारतीय सिनेमा की प्रमुख हस्तियों ने आंदोलन को अपना समर्थन दिया था। 20 अक्तूबर को आंदोलनकारी छात्रों और राठौड़ के बीच दिल्ली में बातचीत हुई थी लेकिन वह गतिरोध समाप्त करने में असफल रही थी।

एफएसए के विरोध जारी रखने के खतरे के बारे में पूछे जाने पर राठौड़ ने कहा कि ‘‘यदि वे किसी चीज के बारे में दृढ़ता से कुछ महसूस करते हैं’’ तो वे यह कर सकते हैं। छात्र गत 12 जून से ही कक्षा का बहिष्कार कर रहे थे और वे चौहान को पद से हटाने की अपनी मांग पर अड़े हुए थे जबकि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने उनकी नियुक्ति का मजबूती से समर्थन किया।

इस बीच मुंबई से प्राप्त समाचार के अनुसार जानेमाने फिल्मकारों दिबाकर बनर्जी, आनंद पटवर्धन तथा आठ अन्य लोगों ने एफटीआईआई के आंदोलनकारी छात्रों के साथ एकजुटता प्रकट करते हुए तथा देश में बढ़ती असहिष्णुता के विरोध में अपने राष्ट्रीय पुरस्कार लौटा दिए।

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