भारत में जंगलों की स्थिति पर नजर रखने वाली केंद्रीय संस्था भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) ने जंगलों की कटाई पर निगरानी रखने के लिए बनाया गया अपना एक अहम अलर्ट सिस्टम फिलहाल रोक दिया है। इस सिस्टम के जरिए राज्यों को हर 15 दिन में यह जानकारी दी जाती थी कि कहां कहां जंगल का क्षेत्र कम हुआ है। लेकिन अब इस पोर्टल पर नवंबर 2025 के बाद से कोई नया डेटा अपडेट नहीं हुआ है।

यह सिस्टम अनावरण डिफॉरेस्टेशन अलर्ट सिस्टम के नाम से जनवरी 2024 में शुरू किया गया था। इसमें सैटेलाइट तस्वीरों और मशीन लर्निंग तकनीक की मदद से जंगलों में होने वाली कटाई पर लगभग रीयल टाइम में नजर रखी जाती थी। हर पंद्रह दिन में राज्यों को अलर्ट भेजा जाता था, ताकि वन विभाग मौके पर जाकर जांच कर सके और अगर अवैध कटाई हो रही हो तो उसे तुरंत रोका जा सके।

सूत्रों के अनुसार जनवरी 2026 से इस पोर्टल की सक्रिय निगरानी बंद कर दी गई और उसके बाद राज्यों को पंद्रह दिन वाले अलर्ट भी मिलना बंद हो गए। राजस्थान वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि दिसंबर 2025 के बाद उन्हें कोई नया अलर्ट नहीं मिला। जयपुर के एक वरिष्ठ वन अधिकारी के मुताबिक, जैसे जंगल की आग पर नजर रखने वाला सिस्टम समय के साथ और बेहतर हुआ है, वैसे ही यह डिफॉरेस्टेशन अलर्ट सिस्टम भी संरक्षण के लिए एक बहुत उपयोगी तकनीकी कदम था और उम्मीद है कि इसे और बेहतर बनाकर फिर से शुरू किया जाएगा।

इस बारे में पूछने पर FSI की संयुक्त निदेशक शिवानी डोगरा ने बताया कि अनावरण पोर्टल अभी केवल एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चलाया गया था। उनका कहना है कि इसे औपचारिक रूप से लॉन्च नहीं किया गया था और फिलहाल राज्यों से इसकी उपयोगिता को लेकर फीडबैक लिया जा रहा है।

अनावरण पोर्टल के रिकॉर्ड बताते हैं कि जनवरी 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच कुल 12351 डिफॉरेस्टेशन अलर्ट राज्यों को भेजे गए। इस दौरान हर महीने औसतन 561 अलर्ट जारी किए गए। नवंबर से मार्च के बीच यह औसत बढ़कर करीब 1028 अलर्ट प्रति माह हो गया था। दरअसल इस समय मौसम ऐसा होता है जब इंसानी गतिविधियों के कारण जंगलों की कटाई ज्यादा होती है।

मध्य प्रदेश के एक वन अधिकारी के अनुसार यह सिस्टम सैटेलाइट डेटा के बेहतर उपयोग की दिशा में एक बड़ी पहल थी। उनका कहना है कि मशीन लर्निंग और फील्ड जांच को मिलाकर जंगलों की निगरानी को और प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में राज्य सरकारें भी ऐसी तकनीक विकसित कर सकती हैं।

सबसे ज्यादा अलर्ट पंजाब 637 में जारी हुए

हालांकि अनावरण के सार्वजनिक डेटा में यह नहीं बताया गया कि कितने क्षेत्र में जंगल खत्म हुए, लेकिन अलर्ट की संख्या के आधार पर कुछ राज्यों में ज्यादा गतिविधि दिखी। सबसे ज्यादा अलर्ट पंजाब 637 में जारी हुए। इसके बाद आंध्र प्रदेश 617 और अरुणाचल प्रदेश 611 का स्थान रहा। इसके अलावा नागालैंड 579, मणिपुर 577, उत्तराखंड 543, असम 533, त्रिपुरा 516, महाराष्ट्र 504, मिजोरम 499, गुजरात 498 और कर्नाटक 450 में भी बड़ी संख्या में अलर्ट भेजे गए।

तकनीकी तौर पर यह सिस्टम Google Earth Engine प्लेटफॉर्म पर काम करता है। इसमें Sentinel 2 सैटेलाइट की तस्वीरों का इस्तेमाल किया जाता है। बादलों या मानसून के मौसम में भी निगरानी जारी रखने के लिए Sentinel 1 रडार डेटा को भी जोड़ा जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार अलग अलग मौसम के पुराने आंकड़ों से तुलना करके एल्गोरिद्म यह पहचानता है कि किसी इलाके में जंगल का क्षेत्र अचानक कम हुआ है या नहीं, और फिर उसी आधार पर अलर्ट जारी किया जाता है।

एक पूर्व FSI अधिकारी के मुताबिक यह सिस्टम लैटिन अमेरिकी देशों के शुरुआती चेतावनी तंत्र जैसा है। पेरू ने 2014 में सैटेलाइट के जरिए हर तीन महीने में ऐसे अलर्ट देना शुरू किया था। बाद में इसे एक महीने तक लाया गया, जबकि भारत का अनावरण सिस्टम हर 15 दिन में अलर्ट देकर उससे भी आगे की व्यवस्था माना गया।

गौरतलब है कि FSI पहले से जंगल की आग की निगरानी में अहम भूमिका निभा रहा है। 2004 से सैटेलाइट आधारित वन अग्नि अलर्ट सिस्टम काम कर रहा है, जिसे समय समय पर अपग्रेड किया गया है। अब वन अग्नि और सचेत जैसे पोर्टल आग लगने से पहले भी चेतावनी देने की सुविधा देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अनावरण जैसे सिस्टम को और मजबूत किया जाए तो भारत में जंगलों की कटाई पर निगरानी और भी प्रभावी हो सकती है।

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