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वैदिक मैथ्स से जूनॉटिक डिसीज़ तक…स्कूलों के पाठ्यक्रम में क्या बदलाव लाना चाहती है मोदी सरकार?

मंत्रालयों से मिल रहे सभी सुझावों का नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (एनसीएफ) के विशेषज्ञों की एक टीम विश्लेषण करेगी और उसके बाद एनसीईआरटी की किताबों में बदलाव किया जा सकता है।

NCERT| Education Ministry| NCERT Book Changes
स्कूल की एक कक्षा में पढ़ते हुए बच्चे (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

देश के स्कूलों के पाठ्यक्रम में बदलाव के लिए चल रहे अंतर मंत्रालय परामर्श में उभरते हुए विषयों जैसे जूनॉटिक रोगों (जैसे कोरोना वायरस) के विनाशकारी परिणाम, वैदिक गणित, कोडिंग और स्वच्छ भारत जैसे विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है।

मंत्रालयों से मिल रहे सभी सुझावों का नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (एनसीएफ) के विशेषज्ञों की एक टीम विश्लेषण करेगी और उसके बाद एनसीईआरटी की किताबों में बदलाव किया जा सकता है। गौरतलब है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान फिलहाल बेंगलुरु में है और पाठ्यक्रम में बदलाव करने वाली नेशनल स्ट्रिंग कमेटी के सदस्यों से मुलाकात कर रहे हैं।

दरअसल, शिक्षा मंत्रालय की ओर से इस महीने की शुरुआत में शिक्षा पाठ्यक्रम में बदलाव के लिए अंतर-मंत्रालय परामर्श की शुरुआत की गई थी। जानकारी के अनुसार अब तक पर्यावरण मंत्रालय, डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय अब तक अपने सुझाव पाठ्यक्रमों में बदलाव को लेकर दे चुके हैं।

22 अप्रैल को डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी की ओर से स्कूल के पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों के लिए “पारंपरिक टेक्नोलॉजी की शिक्षा, कोडिंग पेटेंट्स, बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights) और वैदिक गणित” जैसे विषयों को शामिल करने का सुझाव दिया।

केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने अपने प्रस्ताव में कहा, “हमें बच्चों और स्कूली छात्रों को स्वच्छ व्यवहार के संदेशवाहक और सूत्रधार बनने के लिए प्रेरित और प्रेरित करने की आवश्यकता है। इसके साथ स्वच्छता को स्कूल के पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिए।”

13 अप्रैल को पर्यावरण मंत्रालय की ओर से दिए गए प्रस्ताव के अनुसार पर्यावरण शिक्षा बच्चों को प्री स्कूल लेवल से दी जानी चाहिए। मंत्रालय की ओर से प्रैक्टिकल कांसेप्ट पर अधिक जोर दिया गया। इन विषयों में कचरे का प्रबंधन करना, एक बार उपयोग में लाए जाने वाले प्लास्टिक, जंगल का संरक्षण और वेटलैंड और जंगली जानवरों के साथ मानवीय दुस्साहस के कारण जूनॉटिक रोगों के विनाशकारी परिणाम और उनकी उत्पत्ति जैसे विषयों का सुझाव दिया गया है।

स्कूल शिक्षा सचिव अनीता करवाल की ओर से सभी मंत्रालयों को लिखे गए पत्र में कहा गया था कि जिसमें सभी संबंधित मंत्रालयों से सुझाव मांगे गए थे। पाठ्यक्रम में यह सभी बदलाव नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के तहत होंगे।

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