कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने अपने बजट में 16 साल से कम उम्र के बच्चों द्वारा सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है और आंध्र प्रदेश एक ऐसा उपाय लाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है जो 13 साल से कम उम्र के लोगों को ऐसी सेवाओं का इस्तेमाल करने से प्रतिबंधित करेगा। यह भारत में बच्चों को सोशल मीडिया प्लेटफार्मों से होने वाले नुकसानों से बचाने के लिए बढ़ते प्रयास का संकेत है।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार को राज्य का बजट पेश करते हुए कहा, “बच्चों में मोबाइल के बढ़ते उपयोग के प्रतिकूल प्रभावों को रोकने के उद्देश्य से 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जाएगा।” उन्होंने इस प्रतिबंध को लागू करने के तकनीकी पहलुओं के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने कहा है कि राज्य 90 दिनों के भीतर इसी तरह के नियम लागू करेगा।
दुनियाभर में मांगे पकड़ रही जोर
बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की मांगें दुनिया भर में जोर पकड़ रही हैं। इसकी मिसाल पिछले साल लागू हुए ऑस्ट्रेलिया के एक ऐतिहासिक कानून से मिलती है। पिछले महीने इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट में अपने मुख्य भाषण के दौरान, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत से बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने पर विचार करने का आग्रह किया।
मैक्रों ने कहा कि फ्रांस एआई से बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में काम करेगा। उन्होंने कहा, “यही कारण है कि फ्रांस में हम 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल नेटवर्क पर प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि स्पेन और कई अन्य यूरोपीय देश भी इसी तरह का कदम उठाने जा रहे हैं और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस क्लब में शामिल होने का आग्रह किया।
हालांकि, भारत सरकार ने अभी तक पूरे देश के लिए सोशल मीडिया पर उम्र से जुड़ा कोई नियम लागू नहीं किया है, लेकिन इस विषय पर चर्चा शुरू हो गई है। पिछले महीने केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा था कि केंद्र सोशल मीडिया कंपनियों के साथ आयु-आधारित प्रतिबंधों पर चर्चा कर रहा है। इस साल की शुरुआत में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने भी सरकार से बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर आयु-आधारित सीमा लागू करने का आह्वान किया था।
इसमें यह भी कहा गया है कि बच्चों के बीच साधारण डिवाइस, जैसे कि बेसिक फोन या केवल शिक्षा के लिए बने टैबलेट, को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, साथ ही उपयोग की सीमाएं और कंटेंट फिल्टर भी लागू किए जाने चाहिए। सर्वेक्षण में कहा गया है कि इससे बच्चों को हिंसा या जुए से संबंधित सामग्री सहित हानिकारक सामग्री के संपर्क में आने से बचाया जा सकता है।
तकनीकी अधिकारियों का कहना है कि अगर सोशल मीडिया पर नियम अलग-अलग राज्यों में अलग तरीके से लागू किए जाएं, तो उन्हें लागू करना मुश्किल हो सकता है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “सोशल मीडिया के उपयोग के लिए नियम निर्धारित करने वाला केंद्रीय स्तर का कानून एकसमान रूप से लागू किया जा सकता है। लेकिन, कुछ राज्यों में इसके उपयोग पर प्रतिबंध है और कुछ में नहीं, इसलिए कनेक्टिविटी की प्रकृति को देखते हुए इसे लागू करना परिचालन की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। राज्य स्तर पर भौगोलिक प्रतिबंधों को लागू करना निश्चित रूप से कठिन है।”
केंद्रीय लेवल पर उपाय बेहतर विकल्प
एक अन्य तकनीकी अधिकारी ने बताया कि कर्नाटक में सरकार 16 साल से कम उम्र के लोगों द्वारा सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर रही है, जबकि आंध्र प्रदेश में यह उपाय 13 साल से कम उम्र के लोगों पर लागू हो सकता है। अधिकारी ने कहा, “अगर अलग-अलग राज्य अलग-अलग कानून लाते हैं तो ‘बच्चा’ की परिभाषा में यह असंगति पैदा होगी, इसलिए केंद्रीय स्तर का उपाय बेहतर हो सकता है।”
मेटा के एक प्रवक्ता ने कहा कि कर्नाटक में प्रतिबंध लागू होने पर वह इसका पालन करेगी, लेकिन ऐसे प्रतिबंध किशोरों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सभी ऐप्स पर समान रूप से लागू होने चाहिए, न कि केवल कुछ कंपनियों पर।” प्रवक्ता ने आगे कहा, “प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रही सरकारों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वे किशोरों को कम सुरक्षित, अनियमित साइटों या लॉग-आउट किए गए ऐसे अनुभवों की ओर धकेलने से बचें जो महत्वपूर्ण सुरक्षा उपायों को दरकिनार करते हैं।”
दिल्ली स्थित डिजिटल अधिकार समूह इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन ने कहा कि सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध एक “असंतुलित प्रतिक्रिया है जो फायदे से ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है” और आगे कहा कि ऐसे उपाय “अक्सर उन मूल कारणों को दूर करने में विफल रहते हैं जैसे कि प्लेटफॉर्म डिजाइन विकल्प जो सुरक्षा की तुलना में सहभागिता को अधिकतम करते हैं।”
आईएफएफ ने कहा, “भारत के संदर्भ में, जहां लड़कियों और युवतियों को डिजिटल पहुंच में पहले से ही महत्वपूर्ण बाधाओं का सामना करना पड़ता है, ‘सुरक्षा’ के नाम पर लगाया गया प्रतिबंध उन्हें पूरी तरह से कनेक्टिविटी से वंचित करने का एक और हथियार बन सकता है। परिवार और समुदाय इस तरह के प्रतिबंधों का उपयोग लड़कियों को स्थायी रूप से डिजिटल दुनिया से दूर रखने को उचित ठहराने के लिए कर सकते हैं, जिससे डिजिटल लैंगिक असमानता कम होने के बजाय और गहरी हो जाएगी।”
ऑस्ट्रेलियाई टेम्पलेट
पिछले साल ऑस्ट्रेलिया सोशल मीडिया के इस्तेमाल के लिए न्यूनतम आयु सीमा लागू करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया। इसके तहत इंस्टाग्राम, यूट्यूब और स्नैप जैसे प्लेटफॉर्म को 16 साल से कम उम्र के दस लाख से ज्यादा यूजर्स के अकाउंट को ब्लॉक करना अनिवार्य हो गया। ऑस्ट्रेलियाई कानून, जिसकी तकनीकी कंपनियों ने आलोचना की है लेकिन अभिभावकों ने समर्थन किया है।
ऑस्ट्रेलिया के ऑनलाइन सेफ्टी अमेंडमेंट (सोशल मीडिया मिनिमम एज) एक्ट के तहत, प्लेटफॉर्मों से यह अपेक्षा की जाएगी कि वे 16 साल से कम उम्र के व्यक्तियों द्वारा बनाए गए अकाउंट का पता लगाने और उन्हें डिएक्टिवेट या हटाने के लिए कड़े कदम उठाएं, साथ ही उन्हें नए अकाउंट खोलने से रोकें और प्रतिबंधों को दरकिनार करने के किसी भी तरीके पर रोक लगाएं। प्लेटफॉर्मों के पास ऐसी प्रक्रियाएं भी होनी चाहिए जिनसे किसी के खाते को गलती से प्रतिबंधों में शामिल किए जाने या छूट जाने की स्थिति में गलतियों को सुधारा जा सके, ताकि किसी का भी अकाउंट अनुचित रूप से न हटाया जाए।
ऑस्ट्रेलियाई सरकार के अनुसार, इन प्रतिबंधों का उद्देश्य युवाओं को उन दबावों और जोखिमों से बचाना है जिनका सामना सोशल मीडिया अकाउंट पर लॉग इन करते समय यूजर्स को करना पड़ सकता है। ये जोखिम उन डिजाइन सुविधाओं से पैदा होते हैं जो उन्हें स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताने के लिए प्रोत्साहित करती हैं, साथ ही ऐसी सामग्री भी दिखाती हैं जो उनके स्वास्थ्य और कल्याण को नुकसान पहुंचा सकती है। इससे पहले, देश के ई-सेफ्टी कमिश्नर ने एक सर्वेक्षण में पाया था कि 50% से ज्यादा ऑस्ट्रेलियाई युवाओं को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साइबरबुलिंग का सामना करना पड़ा है।
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दक्षिण भारत के राज्य कर्नाटक, जहां टेक हब बेंगलुरु है, ने 16 साल से कम उम्र के लोगों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर बैन लगा दिया है। राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार को कहा कि ऐसा करने वाले वे भारत के पहले मुख्यमंत्री बन गए हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों पर मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल के कुप्रभाव को रोकने के मकसद से, 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल बैन कर दिया जाएगा। पढ़ें पूरी खबर…
