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पेरिस में भारतीय वायुसेना के राफेल प्रोजेक्‍ट ऑफिस में घुसे चोर, डेटा चुराने की कोशिश का शक

यह भी बताया गया कि आईएएफ ने इस घटना के बारे में रक्षा मंत्रालय को सूचित कर दिया है। राफेल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट का आईएएफ का दफ्तर राफेल जेट बनाने वाली कंपनी दसॉल्ट एविएशन के परिसर में है।

Author May 22, 2019 10:27 PM
समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक, यह जासूसी का मामला हो सकता है।(फाइल फोटोः एपी/पीटीआई)

फ्रांस की राजधानी पेरिस में राफेल जेट विमान का काम देखने वाले भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के दफ्तर में घुसपैठ की कोशिश हुई है। यह घटना बीते रविवार की है, जब भारत के लिए 36 राफेल विमानों के उत्पादन की निगरानी करने वाले दफ्तर पर चोर घुस आए थे। ऐसा माना जा रहा है कि वे डेटा चुराने की कोशिश में थे। सैन्य सूत्रों के हवाले से ‘भाषा’ की रिपोर्ट में बताया गया कि यह जासूसी का मामला हो सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ अज्ञात लोग पेरिस के उप-नगरीय इलाके में आईएएफ के राफेल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट टीम के दफ्तर में अवैध तरीके से घुस गए थे। ऐसे में स्थानीय पुलिस जांच कर रही है कि क्या विमान से जुड़े गोपनीय डेटा को चुराने की मंशा से यह घुसपैठ की कोशिश की गई? आगे एक सूत्र के आधार पर कहा गया, “शुरुआती आकलन के अनुसार कोई डेटा या हार्डवेयर नहीं चुराया गया है। पुलिस जांच कर रही है।”

यह भी बताया गया कि आईएएफ ने इस घटना के बारे में रक्षा मंत्रालय को सूचित कर दिया है। राफेल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट का आईएएफ का दफ्तर राफेल जेट बनाने वाली कंपनी दसॉल्ट एविएशन के परिसर में है। रक्षा मंत्रालय या आईएएफ की तरफ से इस पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

वायुसेना की प्रोजेक्ट मैनेजमेंट टीम की अध्यक्षता एक ग्रुप कैप्टन कर रहे हैं। इसमें दो पायलट, एक लॉजिस्टिक अधिकारी और कई हथियार विशेषज्ञ एवं इंजीनियर भी हैं। यह टीम राफेल विमानों के निर्माण और इसमें हथियारों के पैकेज के मुद्दे पर दसाल्ट एविएशन के साथ समन्वय कर रही है।

भारत ने 58,000 करोड़ रुपए की लागत से 36 राफेल विमानों की खरीद के लिए सितंबर 2016 में फ्रांस के साथ एक करार किया था। यह करार सीधे तौर पर दोनों देशों की सरकारों के बीच हुआ था। भारत को पहला राफेल विमान इस साल सितंबर में मिलने की संभावना है।

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