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लश्कर ए तैयबा और जैश ए मोहम्मद के खिलाफ ‘निर्णायक कार्रवाई’ के पक्ष में है फ्रांस

2016 सितंबर माह में किए गए लक्षित हमलों के बारे में फ्रांस के विदेश मंत्री एरॉल्ट ने कहा कि ऐसे खतरों के मद्देनजर देश को ‘अपनी रक्षा करने का अधिकार है।’

Author नई दिल्ली | January 12, 2017 8:45 PM
नई दिल्ली में आर.के. मिश्रा मेमोरियल लेक्चर के बाद सवाल सुनते फ्रांस के विदेश मंत्री ज्यां मार्क एरॉल्ट (PTI Photo by Manvender Vashist/11 Jan, 2017)

फ्रांस ने गुरुवार (12 जनवरी) को लश्कर ए तैयबा, जैश ए मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे भारत को ‘निशाना’ बनाने वाले पाकिस्तान के आतंकी समूहों के खिलाफ ‘निर्णायक कार्रवाई’ पर जोर दिया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद जिस आतंकी मसूद अजहर पर प्रतिबंध का प्रस्ताव लाई थी उसे पकड़ने के लिए उसने नई दिल्ली के साथ मिलकर काम करने का संकल्प लिया। संरा सुरक्षा परिषद में जैश ए मोहम्मद प्रमुख अजहर पर प्रतिबंध लगाने संबंधी प्रस्ताव को रोकने वाले चीन का नाम लिए बगैर फ्रांस के विदेश मंत्री ज्यां मार्क एरॉल्ट ने कहा, ‘खतरे की गंभीरता पर ना जाते हुए आतंकवाद से लड़ने की अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की प्रतिबद्धता हर जगह एक सी होनी चाहिए।’

उरी स्थित सेना के शिविर पर आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा नियंत्रण रेखा पार पिछले साल सितंबर माह में किए गए लक्षित हमलों के बारे में एरॉल्ट ने कहा कि ऐसे खतरों के मद्देनजर देश को ‘अपनी रक्षा करने का अधिकार है।’ उन्होंने एक साक्षात्कार के दौरान बताया, ‘उरी में हुए हमले समेत फ्रांस ने भारत के खिलाफ आतंकी हमलों की बड़ी जोरदार आलोचना की है और आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई में अपने पूरे समर्थन को दोहराया है।’ पाकिस्तान का नाम नहीं लेते हुए लेकिन उसके स्पष्ट संदर्भ में फ्रांस के विदेश मंत्री ज्यां मार्क एरॉल्ट ने कहा कि सभी देशों को ‘अपने क्षेत्र या अपने नियंत्रण वाले इलाकों से पैदा होने वाले’ आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी रूप से लड़ना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘हम भारत को निशाना बनाने वाले आतंकी समूह खासकर लश्कर ए तैयबा, जैश ए मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत निर्णायक कार्रवाई होते देखना चाहते हैं।’ वाइब्रेंट गुजरात समिट में शामिल होने चार दिवसीय दौरे पर भारत आए फ्रांस के मंत्री से जब लक्षित हमलों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘आतंकवाद को कोई भी तर्क न्यायसंगत नहीं ठहरा सकता, इससे हर जगह समान प्रतिबद्धता से लड़ना चाहिए। जब देश को इस किस्म के आतंकी खतरे का सामना करना पड़ता है तो उसे अपनी रक्षा करने का अधिकार भी है।’

चीन द्वारा अजहर पर प्रतिबंध को रोकने के बारे में उन्होंने कहा, ‘हम इसकी भर्त्सना करते हैं, हमारे संयुक्त प्रयासों और समिति से मिले भरपूर समर्थन के बावजूद सर्वसम्मति नहीं बन सकी।’ उन्होंने कहा कि जैश ए मोहम्मद का नाम समिति की आतंकी संगठनों की सूची में पहले से शामिल है इसलिए ‘इसके प्रमुख को इस सूची में शामिल करने के पक्ष में मजबूत तर्क मौजूद हैं जैसा कि भारत ने अनुरोध किया है।’ उन्होंने कहा कि इसीलिए फ्रांस ने इस अनुरोध का ना केवल समर्थन किया बल्कि इसे सह-प्रस्तावक भी किया। अप्रत्यक्ष तौर पर चीन को दिए संदेश में उन्होंने कहा, ‘अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को आतंक से खतरे की गंभीरता पर नहीं जाते हुए हर जगह एक सी प्रतिबद्धता से लड़ना चाहिए।’

अजहर के मुद्दे पर भविष्य में उठाए जाने वाले कदमों के बारे में फ्रांस के विदेश मंत्री ने कहा, ‘इस पर क्या हो सकता है इस बारे में हम भारत से चर्चा करेंगे। यह पेरिस में होने वाले आतंक निरोध पर हमारे द्विपक्षीय कार्यकारी समूह का एजेंडा होगा। भारत जानता है कि वह हमारे समर्थन पर भरोसा कर सकता है।’ देश में आतंकी गतिविधियों में अजहर की भूमिका के बारे में भारत द्वारा पर्याप्त सबूत देने के बावजूद चीन ने पाकिस्तान में बसे इस आतंकी पर प्रतिबंध लगाने संबंधी संरा सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव पर लंबे समय से ‘तकनीकी रोक लगा रखी थी।’ और हाल ही में उसने इस प्रस्ताव को ही रोक दिया।

पाकिस्तान के बहावलपुर का निवासी अजहर उन तीन आतंकियों में से एक है जिसे भारत ने दिसंबर 1999 में कंधार में अपहृत इंडियन एयरलाइंस के विमान आईसी-814 के 166 बंधकों को रिहा करने के बदले छोड़ दिया था। तब अजहर हरकत उल मुजाहिदीन संगठन से जुड़ा था और रिहाई के तुरंत बाद उसने पाकिस्तान में नए संगठन जैश ए मोहम्मद का गठन कर लिया। इस आतंकी समूह ने भारत में कई हमले किए। संसद पर 13 दिसंबर, 2001 को हुआ हमला भी इन्हीं में से एक था।

फ्रांस के विदेश मंत्री ज्यां मार्क एरॉल्ट ने फ्रांस और भारत के बीच आतंक से लड़ाई में सहयोग बढ़ाने का जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘फ्रांस और भारत दोनों ही आतंक से पीड़ित हैं और इससे आमने-सामने की लड़ाई में दोनों देश एक हैं।’ उन्होंने कहा कि भारत-फ्रांस की रणनीतिक साझेदारी में आतंक से लड़ाई एक स्तंभ है। ठोस शब्दों में कहें तो फ्रांस और भारत आतंकी खतरे पर ‘प्रभावी और महत्वपूर्ण जानकारियां लगातार’ साझा करते हैं।

एरॉल्ट ने कहा, ‘‘हमारे बीच एक द्विपक्षीय कार्यकारी समूह है जो आतंक से निबटने के अभियान में जुटे सभी संबद्ध पक्षों को एक मंच पर लाता है। इसके अलावा यह हमारी इकाईयों- फ्रांस की जीआईजीएन और भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के बीच जांच में सहयोग को बढ़ाता है। इस सहयोग का मैं स्वागत करता हूं।’ द्विपक्षीय संबंधों का एक खाका पेश करते हुए एरॉल्ट ने कहा कि फ्रांस के लिए भारत एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है। उन्होंने जोर देते हुए कहा, ‘ईमानदारी की सच्ची दोस्ती और लंबे समय से चली आ रही दोस्ती के जरिए हम एक हैं। हम जानते हैं कि कठिन समय में भी हम एक दूसरे पर भरोसा कर सकते हैं।’

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