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4 साल पहले आज ही के दिन नोटबंदीः अपनी मूर्खता की तबाही देख सरकार भी भूल गई, मोदी जी तो Demonization का नाम नहीं लेते है- रवीश कुमार का पोस्ट

टीवी पत्रकार के मुताबिक, "मोदी सरकार ने नोटबंदी कर लघु व छोटे उद्योगों की कमर तोड़ दी। हिन्दू मुस्लिम नफ़रत के नशे में लोग नहीं देख सके कि असंगठित क्षेत्र में मामूली कमाने वाले लोगों की कमाई घट गई। उनका संभलना हुआ नहीं कि जीएसटी आई और फिर तालाबंदी। तीन चरणों में अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर देश को बेरोज़गारी की आग में झोंक दिया।"

Author Edited By अभिषेक गुप्ता नई दिल्ली | Updated: November 8, 2020 10:54 AM
Four Years of Demonization, Demonization in India, Demonizationतस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फोटोः Freepik)

चार साल पहले आज ही के दिन Demonization का ऐलान हुआ था। NDTV के वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने इस पर एक फेसबुक पोस्ट लिखा है। रविवार को ‘नोटबंदी के चार साल’ शीर्षक वाले पोस्ट में उन्होंने कहा, “मोदी ने भारत को कपोर-कल्पनाओं का देश बना दिया है। चार साल पहले आज ही के दिन नोटबंदी हुई थी। उसी दिन से सत्यानाश की कहानी शुरू हो गई। कई तरह के दावे हुए कि ये ख़त्म हो जाएगा वो ख़त्म हो जाएगा। मूर्खतापूर्ण फ़ैसले को भी सही ठहराया गया। बड़े और कड़े निर्णय लेने की सनक का भारत की अर्थव्यवस्था को बहुत गहरी क़ीमत चुकानी पड़ी है।”

बकौल रवीश, “दशकों की मेहनत एक रात के फ़ैसले से तबाह हो गई। हफ़्तों लोग लाइन में लगे रहे। लोगों के घर में पड़े पैसे बर्बाद हो गए। सबको एक लाइन से काला धन करार दिया गया और काला धन कहीं और के लिए बच गया। उसके लिए बना इलेक्टोरल फंड। जिसमें पैसा देने वाले का नाम गुप्त कर दिया गया। उस वक्त इस फ़ैसले को सबसे बड़ा फ़ैसला बताया गया मगर अपनी मूर्खता की तबाही देख सरकार भी भूल गई। मोदी जी तो नोटबंदी का नाम नहीं लेते है। मिला क्या उस फ़ैसले से?”

टीवी पत्रकार के मुताबिक, “मोदी सरकार ने नोटबंदी कर लघु व छोटे उद्योगों की कमर तोड़ दी। हिन्दू मुस्लिम नफ़रत के नशे में लोग नहीं देख सके कि असंगठित क्षेत्र में मामूली कमाने वाले लोगों की कमाई घट गई। उनका संभलना हुआ नहीं कि जीएसटी आई और फिर तालाबंदी। तीन चरणों में अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर देश को बेरोज़गारी की आग में झोंक दिया। लाखों करोड़ों घरों में आज उदासी है।”

उन्होंने आगे लिखा, “भारत को संभावनाओं का देश बनाने की जगह कपोर-कल्पनाओं का देश बना दिया। युवाओं की एक पूरी पीढ़ी बर्बाद हो गई। उनके सपनों में नफ़रत भर दी गई। बुज़दिल बना दिए गए। उन्हें हर बात में धर्म की आड़ में छिपना बतला दिया। महान बनने की सनक का दूसरा नाम है- नोटबंदी।”

नोटबंदी का क्या असर हुआ?: नोटबंदी के बाद भी देश में कैश बढ़ा। ऐसा इसलिए, क्योंकि RBI की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2016 में नोटों की कीमत 16,41,500 थी, जो मार्च 2020 में आकर 24,20975 हो गई। साथ ही UPI का लेन-देन भी तेजी से बढ़ता गया। 2015-16 में ट्रांजैक्शन की संख्या 694.56 थी, जबकि कुल पेमेंट 1,77,752 का हुआ था। 2019-20 में यह आंकड़ा क्रमशः 3,523.62 और 3,89,743 हो गया।

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