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एलएन मिश्रा हत्याकांड: चारों आरोपी दोषी करार, सज़ा का एलान 15 को

बिहार के समस्तीपुर रेलवे स्टेशन पर बम विस्फोट में तत्कालीन रेल मंत्री ललित नारायण मिश्र की हत्या के करीब 40 साल बाद दिल्ली की अदालत ने आज मिश्र और दो अन्य की हत्या और साजिश रचने के जुर्म में तीन आनंद मार्गियों और एक वकील को दोषी ठहराया। वर्ष 1975 के इस मामले में संतोषानंद […]
Author December 8, 2014 20:36 pm
कर्नल की बीवी से अवैध संबंध बनाने के आरोप में ब्रिगेडियर की चार साल के लिए पदोन्नति रोक दी गई है। (फाइल फोटो)।

बिहार के समस्तीपुर रेलवे स्टेशन पर बम विस्फोट में तत्कालीन रेल मंत्री ललित नारायण मिश्र की हत्या के करीब 40 साल बाद दिल्ली की अदालत ने आज मिश्र और दो अन्य की हत्या और साजिश रचने के जुर्म में तीन आनंद मार्गियों और एक वकील को दोषी ठहराया।

वर्ष 1975 के इस मामले में संतोषानंद अवधूत (75), सुदेवानंद अवधूत (79), गोपाल जी (73) (तीनों आनंदमार्गी) और 66 वर्षीय अधिवक्ता रंजन द्विवेदी को हत्या का दोषी ठहराया। द्विवेदी अभी तक जमानत पर थे और राजधानी की विभिन्न अदालतों में वकालत कर रहे थे।

उन्हें भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं 302 (हत्या), 120 बी (आपराधिक साजिश), 326 (खतरनाक हथियार या तरीके से स्वेच्छा गंभीर चोट पहुंचाना) और 324 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) सहित विभिन्न प्रावधानों के तहत अपराधों के लिये दोषी ठहराया गया। अदालत ने उन्हें विस्फोटक सामग्री अधिनियम के तहत भी दोषी ठहराया।

आनंद मार्गी संगठन एक वैश्विक, आध्यात्मिक और सामाजिक सेवा संगठन होने का दावा करता है। मिश्र की हत्या के बाद इस संगठन को दो वर्ष से कम समय के लिए प्रतिबंधित किया गया था।

जिला न्यायाधीश विनोद गोयल ने अपराह्न तीन बजकर 15 मिनट पर फैसला सुनाते हुए कहा, ‘‘चारों अभियुक्त एलएन मिश्रा की हत्या के दोषी हैं।’’
न्यायाधीश ने कहा कि आरोपी रंजन द्विवेदी, संतोषानंद अवधूत, सुदेवानंद अवधूत और गोपालजी को भारतीय दंड संहिता की धाराओं 120 बी, 302, 326, 324, 34 (समान आशय) के तहत अपराधों के लिए दोषी ठहराया जाता है।

अदालत ने इस मामले में सजा की अवधि पर दलीलें सुनने के लिए 15 दिसंबर की तारीख तय की है। इस मामले में दोषियों को उम्रकैद से मृत्युदंड तक की सजा हो सकती है।
अदालत में आज यह फैसला मिश्र के करीबी रिश्तेदारों, रंजन द्विवेदी की पत्नी और गोपालजी की बेटी सहित दोषियों के रिश्तेदारों की उपस्थिति में खचाखच भरे कक्ष में सुनाया। दो अन्य दोषियों संतोषानंद और सुवेदानंद के साथ आनंद मार्ग के सदस्य मौजूद थे।

फैसला सुनाए जाने के बाद, न्यायाधीश ने दोषियों को हिरासत में लेने का आदेश दिया। बाद में उन्हें जेल भेजा गया। सुदेवानंद को जेल से लाकर अदालत में पेश किया गया था क्योंकि वह वर्ष 1975 में तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश एएन राय की हत्या के प्रयास के जुर्म में पहले से ही जेल में बंद था।

उच्चतम न्यायालय ने अप्रैल 1986 में संतोषानंद, सुदेवानंद और गोपालजी को जमानत दी थी जबकि रंजन द्विवेदी को 1978 में जमानत पर रिहा किया गया था। दो जनवरी 1975 को हुए विस्फोट के कारण घटना के अगले दिन मिश्र की मौत हो गई थी और उनके भाई, जगन्नाथ मिश्र सहित 25 लोग घायल भी हुए थे। एलएन मिश्र के अलावा विस्फोट में मरने वाले दो अन्य लोग सूर्य नारायण झा और राम किशोर प्रसाद सिंह किशोर थे।

इतने लंबे समय तक चले इस मामले में 20 से अधिक न्यायाधीशों ने सुनवाई की। मिश्र के एक पड़पोते वैभव ने इतने लंबे समय तक कार्यवाही चलने पर निराशा जताई। वैभव (26) ने कहा, ‘‘इस मामले में फैसला आने में बहुत लंबा समय लगा। यह सबसे बड़ी निराशा है। कोई मामला इतना लंबा नहीं चलना चाहिए।’’

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