केंद्र सरकार ने शुक्रवार को जनगणना के दौरान लोगों की गिनती के चरण में पूछे जाने वाले 40 सवालों को नोटफाई किया है। जनगणना के दौरान लोगों से पूछा जाएगा कि क्या वे एससी/एसटी या किसी अन्य दूसरी जाति से संबंध रखते हैं।
जनगणना के इस कदम को इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि देश में 1931 के बाद जाति की गणना नहीं हुई है। केंद्र सरकार जाति जनगणना के साथ ही सामाजिक और आर्थिक स्थिति की भी विस्तृत तस्वीर तैयार करेगी।
रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया मृत्युंजय कुमार नारायण के आदेश में पूछे गए सवालों की जानकारी दी गई है। जैसे कि क्या व्यक्ति अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से है और उसकी जाति क्या है। इस महीने की शुरुआत में जारी गैजेट नोटिफिकेशन के अनुसार, लद्दाख और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखंड के हिमपात वाले इलाकों में लोगों की गिनती एक से 30 सितंबर के बीच होगी।
सेल्फ-एन्यूमरेशन का भी होगा विकल्प
आदेश में कहा गया है, ”इस जनगणना को कराने के लिए, घर-घर जाकर लोगों की गिनती शुरू होने से ठीक पहले, 17 से 31 अगस्त तक खुद से जानकारी भरने (सेल्फ-एन्यूमरेशन) का विकल्प भी होगा।” देश के बाकी हिस्सों में लोगों की गिनती अगले साल शुरू होगी।
भारत में सरकारी योजनाओं को लागू करने को लेकर जातीय आंकड़ों की कमी लंबे समय से बहस का मुद्दा रही है। जाति जनगणना से अलग-अलग जाति समूहों की आबादी और उनकी स्थिति से संबंधित ज्यादा जानकारी मिल सकती है।
जाति जनगणना से मिले आंकड़ों का इस्तेमाल सरकार शिक्षा, रोजगार, सामाजिक कल्याण और अन्य क्षेत्रों में नीतियां बनाने के लिए कर सकती है।
जनगणना में जाति की गिनती किए जाने का फैसला पिछले साल 30 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट की राजनीतिक मामलों की समिति ने लिया था।
क्या कहा गया नोटिफिशेन में?
भारत के रजिस्ट्रार जनरल की ओर से जारी नोटिफिशेन में कहा गया है कि जवाब देने वालों से व्यक्तिगत जानकारी मांगी जाएगी, जैसे कि वैवाहिक स्थिति, शादी के समय उम्र, जीवनसाथी का नाम, राष्ट्रीयता, धर्म, अनुसूचित जाति (SC)/अनुसूचित जनजाति (ST), जाति, माता-पिता का विवरण, विकलांगता, मातृभाषा और अन्य ज्ञात भाषाएं, साक्षरता और डिजिटल साक्षरता की स्थिति आदि।


लोगों से क्या पूछा जाएगा?
लोगों से पूछा जाएगा कि क्या वे किसी शिक्षण संस्थान में जाते हैं, उनकी शिक्षा का उच्चतम स्तर, स्ट्रीम, विषय, क्या उन्होंने पिछले साल के दौरान कभी काम किया है, आर्थिक गतिविधि की श्रेणी, पेशा, उद्योग, व्यापार या सेवा का प्रकार, कामगार की श्रेणी आदि।
इसमें कहा गया है कि गणना करने वाले जवाब देने वालों से जन्म की जगह, पिछली बार कहां रहे, माइग्रेशन का कारण, पिछली बार माइग्रेशन के बाद से इस गांव/कस्बे में रहने का समय और स्थायी आवासीय पता भी पूछेंगे।
विवाहित, विधवा, तलाकशुदा और अलग रह रही महिलाओं से बच्चों की संख्या, मौजूदा शादी से बच्चों की संख्या और पिछले एक साल में पैदा हुए बच्चों की संख्या के बारे में पूछा जाएगा।
नोटिफिकेशन में कहा गया है कि जवाब देने वालों से कोविड-19 टीकाकरण की जगह, बैंक खातों की कुल संख्या, मोबाइल नंबर, आधार नंबर, वोटर आईडी नंबर, पासपोर्ट नंबर और क्या उनके पास ड्राइविंग लाइसेंस है, इसके बारे में भी पूछा जाएगा।
पूरी तरह डिजिटल होगी जनगणना
केंद्र सरकार के अनुसार Census 2027 देश की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी। यानी डेटा को इकट्ठा करना और इससे जुड़ी प्रक्रिया में डिजिटल तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाएगा।
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