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पहले पीएम राजीव गांधी के प्लेन में सर्च अभियान चलाया, फिर उनकी ही कुर्सी पर बैठ गया था यह अफसर!

चुनाव आयोग को एक ऐसी ही स्थिति का सामना 1985 में भी करना पड़ा था। 1985 में आनंद लाल बनर्जी जो उस समय गोरखपुर के एसपी थे उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के स्पेशल एयर फोर्स एयरक्राफ्ट की जांच की थी।

पूर्व पीएम राजीव गांधी। (फोटो: इंडियन एक्सप्रेस)

चुनाव आयोग ने बीते 16 अप्रैल को आईएएस अधिकारी मोहम्मद मोहसिन को सस्पेंड कर दिया था। वजह थी उन्होंने चुनावी रैली के लिए जा रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हेलिकॉप्टर की तलाशी ली। आईएएस अधिकारी पर हुई कार्रवाई की विपक्षी दलों ने आलोचना की। चुनाव आयोग के आदेश के अनुसार कर्नाटक कैडर के आईएएस अधिकारी मोहसिन को 16 अप्रैल को एसपीजी सुरक्षा से संबंधित आयोग के निर्देशों के विपरीत कार्रवाई करने के लिए निलंबित किया गया।

चुनाव आयोग को एक ऐसी ही स्थिति का सामना 1985 में भी करना पड़ा था। आनंद लाल बनर्जी जो उस समय गोरखपुर के एसपी थे उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के स्पेशल एयर फोर्स एयरक्राफ्ट की जांच की थी। लेकिन उनके साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ जैसा मोहसिन के साथ हुआ।

1979 बैच के आईपीएस अधिकारी बनर्जी गोरखपुर एयरफील्ड के मुखिया के तौर पर नियुक्त थे। उन्हें राजीव गांधी के एयरक्राफ्ट के लैंडिंग एरिया के एयरफील्ड की सुरक्षा का जिम्मा सौंपा गया था। चुनावी रैली के लिए पहुंचे राजीव गांधी के एयरक्राफ्ट की लैंडिंग के बाद एयरफील्ड के सबसे सीनियर अधिकारी बनर्जी ने पीएम के एयरक्राफ्ट की जांच करने का निर्णय करते हुए पूरे विमान की जांच की। न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में उन्होंने बताया ‘मैं उनके एयक्राफ्ट पर सवार हो गया था। जिसके बाद मैंने विमान की कॉकपिट से लेकर अंतिम छोर तक जांच की। मैं पीएम की कुर्सी पर भी जाकर बैठा था।’

मोहसिन पर हुई कार्रवाई पर उन्होंने कहा कि ‘चुनाव आयोग ने मोहसिन को ओडिशा में प्रतिनियुक्त पर तैनात किया था। मुझे उन्हें दिए गए काम के चार्टर के बारे में पता नहीं है। क्या यह विशेष रूप से उन्हें पीएम के वाहनों/हेलीकॉप्टर की जांच करने से प्रतिबंधित करता है या नहीं इस बारे में कुछ नहीं कह सकता। इसलिए मैं आपको नहीं बता सकता कि वह गलत थे या नहीं।’

पुलिस महानिदेशक (DGP) उत्तर प्रदेश के पद से सेवानिवृत्त हुए बनर्जी ने अपने और मोहसिन के मामले को एक-दूसरे से अलग बताया। इसके लिए उन्होंने तत्कालीन परिस्थितियों को हवाला दिया। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी वाला मामला तब का है जब एसपीजी सुरक्षा नहीं होती। लेकिन अब एसपीजी सुरक्षा है जिनका अपना प्रोटोकॉल है। वीवीआईपी लोगों की सुरक्षा बेहद अहम है। और यह बात हमारी अबतक की सभी सरकारों ने समझी है। सुरक्षा एक गंभीर व्यवसाय है और राजनीतिक दलों के बीच अंतर से वर्गीकृत नहीं किया जाता है, उदाहरण के लिए, आवश्यक एसपीजी एक्ट केंद्र में सरकार के बदलने के बावजूद अपरिवर्तित रहता है।

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